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लखीसराय के किसानों के लिए जरूरी सलाह, मिट्टी की सेहत बिगड़ने से कैसे बचाएं, जैविक खाद, दलहन से बढ़ेगी उर्वरा शक्ति

Published: Sun, 25 Oct 2026 09:07 AM (IST)

लखीसराय जिले में मिट्टी जांच रिपोर्ट से पोषक तत्वों की कमी उजागर होने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को विशेष उपाय सुझाए हैं।

खेतों की मिट्टी की जांच और जैविक खेती (AI Generated Image)

खेतों की मिट्टी की जांच और जैविक खेती (AI Generated Image)

HighLights

  1. मिट्टी जांच में पोषक तत्वों की भारी कमी पाई गई।

  2. जैविक खाद, हरी खाद, दलहन अपनाने की सलाह।

  3. मृदा स्वास्थ्य कार्ड अनुसार करें उर्वरकों का प्रयोग।

संवाद सूत्र, लखीसराय। लखीसराय जिले के विभिन्न प्रखंडों से एकत्रित किए गए मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में आवश्यक पोषक तत्वों की भारी कमी सामने आने के बाद कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है।

विभाग द्वारा जिले के सभी प्रमुख क्षेत्रों— लखीसराय, बड़हिया, सूर्यगढ़ा, हलसी, रामगढ़ चौक, चानन और पिपरिया के किसानों को मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति को सुधारने और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

जांच में यह बात सामने आई है कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेतों की सेहत प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों को अब जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र में दलहनी फसलों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

दलहनी फसलें और हरी खाद बढ़ाएंगी नाइट्रोजन की मात्रा

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, दलहनी फसलों की जड़ें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में उसकी उपलब्धता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने का काम करती हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी पारंपरिक खेती के साथ फसल चक्र (Crop Rotation) में दलहनी फसलों को जरूर जगह दें।

इसके अलावा, खेतों की बोआई से पहले ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसल को उगाकर उसे खेत में ही जोतकर मिट्टी में मिला देने से जैविक पदार्थों (Organic Carbon) की मात्रा में जबरदस्त सुधार होता है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता मजबूत होती है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही करें उर्वरकों का इस्तेमाल

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे बिना सोचे-समझे और बिना मिट्टी की जांच कराए रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें।

  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी: मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर जिंक सल्फेट और अमोनियम सल्फेट जैसे उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने की बात कही गई है।

  • पीएच (pH) स्तर और खनिज सुधार: मिट्टी का पीएच स्तर सुधारने तथा कैल्शियम और सल्फर की कमी को दूर करने के लिए जरूरत के मुताबिक जिप्सम या डोलोमाइट का उपयोग किया जा सकता है।

विभाग ने जोर देकर कहा है कि किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही खाद व उर्वरक डालें। इससे न केवल मिट्टी में पोषक तत्वों का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और कुल पैदावार में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

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