लखीसराय अशोकधाम हादसा: मां को बचाने के लिए भीड़ से जूझती रही पल्लवी, फिर भी नहीं बचा सकी
बड़हिया के अशोकधाम मंदिर में तीसरी सोमवारी को हुई भगदड़ में मणिमाला देवी की मौत हो गई, उनकी बेटी पल्लवी ...और पढ़ें

मां को बचाने के लिए भीड़ से जूझती रही पल्लवी, फिर भी नहीं बचा सकी
HighLights
अशोकधाम भगदड़ में मणिमाला देवी की दुखद मृत्यु।
बेटी पल्लवी ने मां को बचाने का किया प्रयास।
विधायक प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार को दी सांत्वना।
संवाद सूत्र, बड़हिया (लखीसराय)। अशोकधाम मंदिर में तीसरी सोमवारी की सुबह हुई भगदड़ ने बड़हिया नगर के वार्ड संख्या 12 निवासी निरंजन कुमार सिंह के परिवार को जीवनभर का दर्द दे दिया। भगदड़ में उनकी पत्नी मणिमाला देवी की मौत हो गई।
सोमवार को बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर भी उनके आवास पर पहुंचे और शोकाकुल स्वजनों से मिलकर घटना की जानकारी ली तथा उन्हें सांत्वना दी।
मणिमाला देवी के इकलौते पुत्र अंकित कुमार के देर रात पंजाब से घर पहुंचने के बाद मंगलवार की अलसुबह बड़हिया गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मां की अंतिम यात्रा में शामिल हुए पुत्र और स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
पल्लवी की आंखों के सामने छूटा मां का साथ:
मां के साथ अशोकधाम गई पुत्री पल्लवी कुमारी ने घटना की भयावहता बयां करते हुए बताया कि वह मां, चाची और अन्य स्वजनों के साथ रात करीब दो बजे ई-रिक्शा से अशोकधाम पहुंची थी।
स्टेशन की ओर जाने वाले रास्ते में मां के साथ लाइन में लग गई। करीब एक घंटे तक सभी लाइन में खड़े रहे। इसी दौरान सड़क किनारे लगा बिजली का पोल गिर गया। उस समय भगदड़ नहीं मची थी।
पल्लवी ने बताया कि कुछ देर बाद ट्रेन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उतरे और वे भी उसी स्थान पर लाइन में लगने लगे। अचानक आपाधापी शुरू हुई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई। भगदड़ में वह और उसकी मां दोनों गिर गईं। लोग जान बचाकर भाग रहे थे। किसी तरह कुछ लोगों ने पल्लवी को भीड़ के नीचे से बाहर निकाला, लेकिन उसकी मां वहीं गिर गई थी।
भीड़ छंटी तो मां को बेहोश पाया:
पल्लवी के अनुसार, जब भीड़ कुछ कम हुई तो वह मां के पास पहुंची। मणिमाला देवी बेहोश पड़ी थीं। वह दौड़कर लोगों से मां को उठाने की गुहार लगाने लगी। इसी दौरान उसने अपने पिता और पंजाब में पढ़ रहे भाई अंकित को फोन कर घटना की जानकारी दी।
कुछ देर बाद एंबुलेंस पहुंची और मणिमाला देवी को सदर अस्पताल लखीसराय ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना बताते-बताते पल्लवी बार-बार मां को याद कर रो पड़ती है।
देवघर जो रहे मामा वापस लौटे:
मणिमाला देवी के इकलौते पुत्र अंकित ने बताया कि उनकी मां धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। उन्हें यह संस्कार उनके ननिहाल रामचंद्रपुर से मिला था। उनके पांच मामा में से चार मामा दंड देते हुए अजगैबीनाथ से देवघर जा रहे थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद वे कटोरिया से लौटकर बड़हिया आ गए हैं।
अंकित ने बताया कि मां परिवार की सुख-शांति की कामना को लेकर सावन के प्रत्येक सोमवार को अशोकधाम जाती थीं। इस बार भी वह पूजा-अर्चना के लिए गई थीं, लेकिन यही यात्रा उनके जीवन की अंतिम यात्रा बन गई। घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में है।
परिवार की जिम्मेदारी संभालती थीं मणिमाला:
पति निरंजन कुमार सिंह ने बताया कि घर की पूरी जिम्मेदारी मणिमाला ही संभालती थीं। उनकी पत्नी के चले जाने के बाद घर की व्यवस्था कौन संभालेगा, यही सोचकर उनका मन व्यथित हो जाता है। परिवार के लिए मणिमाला केवल पत्नी और मां नहीं, बल्कि घर की वह धुरी थीं, जिसके सहारे पूरा परिवार चलता था।
