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लखीसराय अशोकधाम हादसे पर बरसे प्रशांत किशोर; बोले- ₹4 लाख में आंकी 7 जिंदगियों की कीमत, नाकामी छिपा रही ब‍िहार सरकार

Published: Tue, 18 Aug 2026 03:05 PM (IST)

प्रशांत किशोर ने लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में हुई भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत पर बिहार सरकार और प्रशासन ...और पढ़ें

HighLights

  1. प्रशांत किशोर ने लखीसराय भगदड़ पर सरकार की आलोचना की।

  2. 7 मौतों पर 4 लाख मुआवजा नाकामी छिपाने का आरोप।

  3. दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग।

जागरण संवाददाता, लखीसराय। अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी को मची भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की घटना को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को लखीसराय पहुंचकर पीड़ित परिवारों और घायलों से मुलाकात करने के बाद पीके ने आरोप लगाया कि सरकार ने सात बेकसूर जिंदगियों की कीमत महज चार-चार लाख रुपये लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

उन्होंने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बांटकर सांत्वना देने का दिखावा किया जा रहा है, जबकि घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार अपनी घोर नाकामी और लापरवाही को छिपाने में जुटी है।

पीड़ित परिवारों से मिले पीके, घायलों का जाना हाल

प्रशांत किशोर ने लखीसराय पहुंचते ही सबसे पहले बड़हिया का रुख किया, जहां उन्होंने भगदड़ में जान गंवाने वाली मनमाला देवी के शोकाकुल परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। इसके बाद वे बालगुदर और निशा नर्सिंग होम पहुंचे, जहां इलाजरत घायलों का कुशलक्षेम जाना और डॉक्टरों से बेहतर इलाज का आग्रह किया।

इसके उपरांत पीके हलसी प्रखंड के प्रतापपुर गांव पहुंचे, जहां एक ही परिवार की तीन गोतनियों की मौत से पसरे मातम के बीच परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की।

Prashant Kishor Slams Bihar Govt Over Lakhisarai Stampede (1)

भीड़ की जानकारी के बावजूद प्रशासन ने नहीं की थी तैयारी

प्रशांत किशोर ने प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सावन के सोमवार को अशोकधाम में लाखों की भीड़ जुटने की जानकारी प्रशासन को पहले से थी। इसके बावजूद भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और बैरिकेडिंग को लेकर जो पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, वे नदारद थे।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में पुलिस व्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। जिले के आला पुलिस अधिकारी फुल टाइम उपलब्ध नहीं रहते, जिसके चलते इतने बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और यह भीषण हादसा हुआ।

हवलदार तक नहीं नपा, जांच के नाम पर खानापूर्ति का आरोप

पीके ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 7 मौतों के बाद भी डीएम, एसपी, एसडीएम, एसडीपीओ या थानाध्यक्ष तो दूर, किसी एक सिपाही तक को निलंबित नहीं किया गया है। बिहार में जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, तो मुआवजा देकर मामले को रफा-दफा करने का चलन बन गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिन अफसरों की देखरेख में लापरवाही हुई, वही अपनी गलती की जांच कैसे कर सकते हैं? यह जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति है।

सरकारी अस्पतालों की बदहाली से निजी क्लिनिक जाने को मजबूर हुए घायल

प्रशांत किशोर ने सदर अस्पताल की बदहाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई घायल शाम होते-होते निजी क्लीनिकों में जाने या घर लौटने को मजबूर हो गए।

उन्होंने दो टूक कहा कि पीड़ित परिवारों को केवल मुआवजे का चेक नहीं, बल्कि न्याय चाहिए। घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर तत्काल आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।