तीन साल, 2 हजार भूखे पेट और संजना की सेवा, किशनगंज में जरूरतमंदों के लिए बनीं उम्मीद की किरण
किशनगंज की संजना कुमारी पिछले तीन वर्षों से 2000 से अधिक जरूरतमंदों को निस्वार्थ भोजन कराकर मानवता की सेवा कर रही हैं।

किशनगंज की संजना कुमारी।
HighLights
संजना कुमारी ने तीन साल में 2000 से अधिक लोगों को भोजन कराया।
किशनगंज में गरीब और वंचितों को निस्वार्थ भोजन सेवा प्रदान की।
मजबूत इच्छाशक्ति और संवेदनशील हृदय से समाज में सकारात्मक बदलाव।
संवाद सहयोगी,किशनगंज। "किसी भूखे को भोजन कराना केवल एक तात्कालिक मदद नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी और पवित्र सेवा है।" इसी मूल भावना को अपने जीवन का संकल्प बनाकर किशनगंज की संजना कुमारी पिछले तीन वर्षों से समाज के गरीब, दलित, पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच निस्वार्थ भोजन सेवा में जुटी हुई हैं।
इस अवधि के दौरान वह अब तक दो हजार से अधिक जरूरतमंदों को अपने हाथों से भोजन करा चुकी हैं। उनका यह अनवरत प्रयास सामाजिक संवेदना, परोपकार और मानवीय मूल्यों को जीवंत करने की दिशा में एक बेहद प्रेरक पहल बनकर उभरा है।
संजना के लिए यह भोजन सेवा महज खाना बांटने का कोई औपचारिक कार्य नहीं है, बल्कि हाशिए पर मौजूद जरूरतमंद लोगों के उदास चेहरों पर सुकून और मुस्कान लाने की एक दिल से की गई कोशिश है। वह मुख्य रूप से समाज के उस अति-वंचित तबके के बीच काम कर रही है।
जहां आज भी चरम आर्थिक तंगी के कारण लोगों को अपने परिवार की दो वक्त की बुनियादी भोजन संबंधी जरूरतें पूरी करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे बेबस लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाकर वह उनके जीवन में राहत, सुरक्षा और अपनत्व का अहसास करा रही हैं।
इच्छाशक्ति और सेवा भाव से बदला परिदृश्य
पिछले तीन वर्षों से बिना किसी रुकावट के जारी इस सेवा अभियान के माध्यम से संजना कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि समाज में बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमेशा विशाल संसाधनों या भारी बजट की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल एक मजबूत इच्छाशक्ति और संवेदनशील हृदय की जरूरत होती है। उनकी निष्ठा और लगन को देखकर अब स्थानीय लोग भी उनके इस मानवीय कार्य की सराहना कर रहे हैं।
सक्षम वर्ग से मदद की अपील
संजना कुमारी का स्पष्ट मानना है कि इस समृद्ध समाज में किसी भी व्यक्ति को केवल अपनी आर्थिक कमजोरी या गरीबी के कारण भूखे पेट सोने को मजबूर नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि समाज के सक्षम और संपन्न लोगों को अपने आसपास मौजूद जरूरतमंदों की सहायता के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सहर्ष आगे आना चाहिए।
उनकी तीन वर्षों की यह निरंतर सेवा यात्रा और दो हजार से अधिक लोगों तक पहुंची सीधी मदद यही संदेश दे रही है कि आपसी सहयोग, मानवता और परोपकार की मजबूत नींव पर ही एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।
