किशनगंज में महिला किसानों की बदलेगी तकदीर: ड्रैगन फ्रूट, अनानास और चाय की खेती से बढ़ाई जाएगी इनकम
किशनगंज जिला प्रशासन सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों की महिला किसानों की आय बढ़ाने के लिए ड्रैगन फ्रूट, अनानास और चाय ...और पढ़ें

ड्रैगन फ्रूट, अनानास और चाय की खेती (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
महिला किसानों की आय बढ़ाने को नई पहल।
ड्रैगन फ्रूट, अनानास, चाय की खेती को बढ़ावा।
प्राकृतिक खेती, सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों की महिला किसानों की आय बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन अब पारंपरिक खेती के साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित करेगा। इसके तहत ड्रैगन फ्रूट, अनानास, चाय की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को प्राकृतिक एवं बहुस्तरीय खेती से जोड़ा जाएगा।
गुरुवार को खगड़ा स्थित सम्राट अशोक भवन में आयोजित जिला स्तरीय वासंतिक (रबी) प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में डीएम नवीन कुमार ने अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया।
महिला किसानों को किचन गार्डन किट वितरित
अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 एवं महिला किसान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ डीएम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान महिला किसानों को रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में डीएम ने वासंतिक (रबी) महाभियान 2026-27 पुस्तक का विमोचन करने के साथ प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित किया और किचन गार्डन किट वितरित की।
पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने का निर्देश
डीएम ने वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत चिह्नित गांवों के 5000 किसानों को पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत तैयार करने तथा उनके उपयोग की विधि का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले।
डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र किसानों तक कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। उन्होंने बहुस्तरीय खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर उपयुक्त फसलों की खेती से उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं विकसित होंगी।
2026-27 में तीन क्लस्टरों का चयन
जिला कृषि पदाधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती मिशन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में तीन क्लस्टरों का चयन किया गया है। वहीं, परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिले को 500 हेक्टेयर में जैविक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य मिला है।
इसके अंतर्गत दिघलबैंक प्रखंड की चयनित पांच पंचायतों में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को जैव उपादान खरीदने के लिए प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अनुदानित दर पर बीज उपलब्ध कराने का निर्देश
उन्होंने बताया कि तिलहनी एवं दलहनी फसलों के अलावा अन्य बीज अनुदानित दर पर वितरित करने के लिए विभाग से लक्ष्य प्राप्त हुआ है। डीएम ने वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत चयनित किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्राथमिकता के आधार पर अनुदानित दर पर बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
कार्यशाला में महिला किसानों को जीरो टिलेज, सीड ड्रिल, जलवायु अनुकूल कृषि, मोटे अनाज, रबी मक्का की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई। इसके अलावा मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, पौधा संरक्षण, जैविक खेती और कृषि कार्यों में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल के बारे में बताया गया।
फसल विविधीकरण के माध्यम से आय बढ़ाने पर जोर
किसानों को बिहार राज्य फसल सहायता योजना, मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना, कृषि यंत्रीकरण योजना, आत्मा योजना और उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान कृषि लागत कम करने, उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और फसल विविधीकरण के माध्यम से आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में वाइब्रेंट विलेजेज के अंतर्गत चयनित गांवों की महिला किसानों को बहुस्तरीय खेती के लिए सात प्रकार की सब्जियों के बीज और वर्मी कंपोस्ट के पैकेट दिए गए। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र महिला किसानों को प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उन्हें कृषि आधारित स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाए। कार्यशाला में प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित कर कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
