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किशनगंज में पाइपलाइन से रसोई गैस की सप्लाई, इंडियन ऑयल खगड़ा में लगाएगा डी-कंप्रेशन यूनिट 

Published: Sat, 17 Oct 2026 11:52 AM (IST)

किशनगंज में घरों तक पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है, जिसके तहत इंडियन ऑयल खगड़ा में डी-कंप्रेशन यूनिट स्थापित करेगा।

एआई जनरेटेड फोटो

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HighLights

  1. किशनगंज में पाइपलाइन से रसोई गैस आपूर्ति की योजना शुरू।

  2. इंडियन ऑयल खगड़ा में डी-कंप्रेशन यूनिट स्थापित करेगा।

  3. 5-6 माह में घरों तक पीएनजी गैस मिलने की उम्मीद।

अमरेंद्र कांत, किशनगंज। किशनगंज में घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से रसोई गैस पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से किशनगंज के खगड़ा में डी-कंप्रेशन यूनिट स्थापित की जाएगी।

जिला प्रशासन ने इसके लिए जमीन उपलब्ध करा दी है। कंपनी की ओर से जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है।

उम्मीद है कि पांच से छह माह में गैस आपूर्ति शुरू हो जाएगी। प्रारंभिक चरण में शहरी क्षेत्रों के घरों तक पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचाने की योजना है।

पाइपलाइन के माध्यम से मिलने वाली इस गैस को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कहा जाता है। यह वर्तमान में घरों में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी सिलेंडर गैस से अलग होती है।

एलपीजी में मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस होती हैं, जबकि पीएनजी में मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के अनुसार, पीएनजी प्राकृतिक गैस है, जिसे पाइपलाइन के नेटवर्क के माध्यम से घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों तक पहुंचाया जाता है।

सिलेंडर की जगह पाइपलाइन से मिलेगी गैस

वर्तमान में घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के माध्यम से रसोई गैस मिलती है। सिलेंडर खत्म होने पर उपभोक्ताओं को दोबारा गैस बुक करानी पड़ती है और उसकी आपूर्ति का इंतजार करना होता है। वहीं, पीएनजी कनेक्शन मिलने के बाद पाइपलाइन के जरिए घरों तक गैस पहुंचाई जा सकेगी।

इससे सिलेंडर की बुकिंग और उसकी डिलीवरी पर निर्भरता कम होगी। उपभोक्ता जरूरत के अनुसार गैस का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, इसकी नियमित उपलब्धता संबंधित नेटवर्क और गैस आपूर्ति की व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

पीएनजी की आपूर्ति के लिए खगड़ा में स्थापित होने वाली डी-कंप्रेशन यूनिट महत्वपूर्ण होगी। इस इकाई के माध्यम से गैस को वितरण नेटवर्क के अनुरूप तैयार कर आगे आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी।

जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप कुमार सिंह के अनुसार, यूनिट की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। कंपनी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करेगी।

एलपीजी और पीएनजी में क्या है अंतर

घरों में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। इसे दबाव के तहत तरल रूप में सिलेंडर में रखा जाता है।

इसके विपरीत, पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस में मुख्य रूप से मीथेन होती है। इसे पाइपलाइन के माध्यम से गैसीय अवस्था में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस को अपेक्षाकृत स्वच्छ जीवाश्म ईंधन माना जाता है।

सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी उपयोगी

प्राकृतिक गैस हवा से हल्की होती है। पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर रिसाव की स्थिति में यह ऊपर की ओर फैलती है। इसके विपरीत, एलपीजी हवा से भारी होती है और रिसाव होने पर निचले हिस्सों में जमा हो सकती है। हालांकि, दोनों ही गैसें ज्वलनशील हैं और इनके इस्तेमाल में सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है।

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