3.5 करोड़ की सड़क, दो पुल गायब, किशनगंज में 5 हजार की आबादी की राह रोकती चेंगा नदी
किशनगंज के ठाकुरगंज में साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनी सड़क दो पुलों के अभाव में बेकार साबित हो ...और पढ़ें

ठाकुरगंज प्रखंड के सखुआडाली पंचायत में लंबित पुल निर्माण कार्य स्थल का दृश्य। जागरण
HighLights
साढ़े तीन करोड़ की सड़क पुलों के बिना बेकार।
आठ गांवों के पांच हजार लोग प्रभावित, संपर्क कटा।
विभागीय अधिकारियों ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया।
संसू,, ठाकुरगंज (किशनगंज)। विकास योजनाओं पर पानी किस तरह फिर जाता है, इसकी एक बानगी किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के सखुआडाली पंचायत में साफ तौर पर देखने को मिल रही है।
सड़क निर्माण पर सरकार ने साढ़े तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर दी, लेकिन बीच रास्ते में दो पुलों का निर्माण नहीं कराए जाने के कारण यह सड़क आम जनता के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित नहीं हो पा रही है।
परिणाम यह है कि करीब चार किलोमीटर लंबी पक्की सड़क बन जाने के बावजूद बरसात के दिनों में चेंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही कई गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुँचाने से लेकर छोटे-छोटे बच्चों के स्कूल आने-जाने तक में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आठ गांवों की पांच हजार आबादी पर असर, योजना का उद्देश्य अधूरा
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क संपर्क योजना के तहत मुंशीभिट्ठा से भेरभेरी होते हुए नेमुभिट्ठा तक इस सड़क का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल किशनगंज-2 द्वारा कराया गया था। लेकिन योजना तैयार करते वक्त अधिकारियों ने झील क्षेत्र और भेरभेरी गांव के समीप पुलों की आवश्यकता का सही आकलन नहीं किया।
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सखुआडाली पंचायत के वार्ड संख्या 3, 12 और 13 के अंतर्गत आने वाले नेमुभिट्ठा, कटहलडांगी, झकवाटोली, दहीभाषा, बथान गांव, भेरभेरी, शीशागुड़ी और हटातपाड़ा सहित आसपास के करीब आठ गांवों की लगभग पाँच हजार आबादी इस सड़क पर निर्भर है।
स्थानीय ग्रामीण समीर कुमार, दिलीप मरांडी, विकास साह, मुन्ना मरांडी, सुरजा मरांडी, चंद्रशेखर बेसरा, श्याम हासदा, रूबी मरांडी, लाल पान बेसरा, ढेना मुर्मु, युगल किस्कू, राजेश किस्कू और लखीराम किस्कू का कहना है कि जब तक दोनों स्थानों पर पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक सड़क निर्माण का वास्तविक लाभ नहीं मिल सकेगा।
ग्रामीणों के सवाल और प्रशासनिक आश्वासन
ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर सड़क बनाते वक्त पुलों की अनदेखी क्यों की गई। यदि सड़क अलग बनी और पुल अलग योजना के तहत बनना था, तो अब तक इस दिशा में ठोस काम क्यों शुरू नहीं हुआ।
मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधि की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है:
विभागीय पक्ष: विभाग के सहायक अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि पुल की स्वीकृति विभाग से मिल चुकी है और सर्वे टीम के जल्द आने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधि: स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने कहा कि दोनों स्थानों पर पुल निर्माण के लिए जिला संचालन समिति की बैठक में प्रस्ताव स्वीकृत करा लिया गया है। सरकार की ओर से राशि आवंटित होते ही प्राथमिकता के आधार पर दोनों पुलों का निर्माण कराया जाएगा।
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