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कभी सिर्फ पत्तियां तोड़ती थीं जीविका दीदियां, अब किशनगंज में खुद चला रही हैं अपनी टी फैक्ट्री

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:17 PM (IST)

Kishanganj Jeevika Didi Tea Factory: किशनगंज में जीविका दीदियां अब चाय बागानों से लेकर फैक्ट्री संचालन और बाजार में बिक्री तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

किशनगंज की जीविका दीदियां। (जागरण)

किशनगंज की जीविका दीदियां। (जागरण) 

HighLights

  1. जीविका दीदियां चाय उत्पादन, फैक्ट्री संचालन और बिक्री में सक्रिय।

  2. इस सीजन 2.81 लाख किलोग्राम महानंदा लीफ चाय का उत्पादन।

  3. महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

संवाद सहयोगी, किशनगंज। कभी चाय बागानों में पत्तियां तोड़ने और खेती तक सीमित रहने वाली जीविका दीदियां अब चायपत्ती उत्पादन से लेकर फैक्ट्री संचालन और बाजार में बिक्री तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

उनके सामूहिक प्रयास ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और चाय की खेती से जुड़े किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी रोजगार एवं आमदनी के नए रास्ते खोले हैं।

किशनगंज के पोठिया स्थित टी फैक्ट्री महिला सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक सफल सामुदायिक उद्यम के रूप में उभर रही है।

महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई में इस सीजन अब तक 2 लाख 81 हजार किलोग्राम महानंदा लीफ चायपत्ती का उत्पादन किया जा चुका है।

इसके लिए स्थानीय किसानों से लगभग 12 लाख 51 हजार किलोग्राम हरे चायपत्ते की खरीद की गई है। जबकि पिछले सीजन में 6 लाख 86 हजार किलोग्राम हरे चायपत्ते की खरीद कर 1 लाख 55 हजार किलोग्राम महानंदा लीफ चायपत्ती तैयार की गई थी।

बिहार सरकार से मिली टी फैक्ट्री

पिछले वर्ष बिहार सरकार की कैबिनेट से टी फैक्ट्री मिलने के बाद यह उत्पादन का दूसरा सीजन है। महानंदा लीफ चायपत्ती की बिक्री जीविका सामुदायिक संगठनों, संकुल संघों, किसान उत्पादक समूहों और ग्रामीण बाजारों के माध्यम से की जा रही है।

इसके साथ ही ई-कामर्स प्लेटफार्म अमेजन पर भी यह चायपत्ती उपलब्ध है। इससे स्थानीय उत्पाद को व्यापक बाजार मिल रहा है। किसानों को बाजार और परिवारों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो रहे हैं। गांव से बाजार तक महिलाओं की आर्थिक राह सुगमता पूर्वक तैयार हो रही है।

टी फैक्ट्री के संचालन से चायपत्ती की खेती करने वाले किसानों को हरे पत्ते का बेहतर मूल्य मिल रहा है। जबकि उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेजिंग से जुड़ी गतिविधियों में जीविका दीदियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

सामूहिक प्रयास से महिलाएं अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि उद्यम संचालन और कारोबार प्रबंधन में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं। इस पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ महिलाओं के भीतर उद्यमिता और आत्मविश्वास का नया संचार किया है।

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महानंदा लीफ चायपत्ती की सफलता यह साबित कर रही है कि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे गरीबी से बाहर निकलने के साथ पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं।

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अनुराधा चंद्रा, जीविका डीपीएम