किशनगंज में चाय, ड्रैगन फ्रूट और अनानास की खेती, किसानों की बढ़ेगी कमाई, खुलेगा तरक्की का रास्ता
नाबार्ड ने किशनगंज में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बैंकर्स जागरूकता बैठक आयोजित की। इसमें किसान ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
नाबार्ड ने किशनगंज में बैंकर्स जागरूकता बैठक आयोजित की।
केसीसी ऋण, पशुपालन, मत्स्यपालन पर विशेष जोर।
अनानास, ड्रैगन फ्रूट, चाय की खेती को बढ़ावा।
संवाददाता, किशनगंज। Bihar Tea Cultivation Dragon Fruit Farming Pineapple Farming: किशनगंज जिले में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने तथा किसानों व ग्रामीण उद्यमियों तक संस्थागत ऋण की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। इसी उद्देश्य के तहत गुरुवार को नाबार्ड (NABARD) की ओर से एक महत्वपूर्ण बैंकर्स जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में मुख्य रूप से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से न केवल पारंपरिक फसल उत्पादन, बल्कि पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी संबद्ध गतिविधियों के लिए भी सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
साथ ही, जिले की भौगोलिक और कृषि संबंधी विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए अनानास, ड्रैगन फ्रूट, चाय और मत्स्यपालन जैसे संभावनाशील क्षेत्रों में परियोजना-आधारित (प्रोजेक्ट बेस्ड) वित्तपोषण बढ़ाने की जरूरत पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
समयबद्ध तरीके से हो ऋण आवेदनों का निष्पादन
बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी प्रभात कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) अखिलेश कुमार, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (DDM) पुष्कर चौधरी और जिला मत्स्य पदाधिकारी मनोज कुमार सहित विभिन्न बैंकों, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), डेयरी विभाग और सीएफएल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने बैंकों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि पात्र किसानों को उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप समय पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जाए। ऋण आवेदनों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो, ताकि किसानों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
क्लस्टर आधारित विकास और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
किशनगंज जिले की कृषि संभावनाओं का आकलन करते हुए क्लस्टर आधारित विकास और वित्तपोषण को प्रोत्साहित करने पर खास मंथन हुआ। अनानास, ड्रैगन फ्रूट, चाय और मत्स्यपालन के क्षेत्रों में किसानों व कृषि उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए आसान शर्तों पर ऋण देने की बात कही गई। इसके अलावा, वार्षिक ऋण योजना के निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र (Priority Sector) में ऋण प्रवाह बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
छोटे एवं सीमांत किसानों तथा ग्रामीण लाभार्थियों तक संस्थागत ऋण को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए संयुक्त देयता समूह (JLG) के गठन और उन्हें बैंकों से जोड़ने पर भी बल दिया गया। बैठक के अंत में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक पुष्कर चौधरी ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
