विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कभी पाई-पाई को थीं मोहताज, आज थैला फैक्ट्री से 5 लाख की कमाई, खगड़िया की कृष्णा ने 18 लोगों को दिया रोजगार

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:06 AM (GMT+05:30)

खगड़िया की कृष्णा देवी ने गरीबी से निकलकर थैला निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आज उनकी वार्षिक आय 5 लाख ...और पढ़ें

थैला निर्माण फैक्ट्री में कार्य करतीं जीविका से जुड़ी स्वावलंबी उद्यमी कृष्णा देवी।

थैला निर्माण फैक्ट्री में कार्य करतीं जीविका से जुड़ी स्वावलंबी उद्यमी कृष्णा देवी।

HighLights

  1. कृष्णा देवी ने थैला निर्माण व्यवसाय से पाई सफलता।

  2. श्वेता जीविका समूह से ऋण लेकर की शुरुआत।

  3. 5 लाख वार्षिक आय, 18 लोगों को मिला रोजगार।

जागरण संवाददाता, खगड़िया। खगड़िया जिले की ग्रामीण महिलाएं आज अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और हुनर के बल पर आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रही हैं।

गरीबी से जूझकर न केवल खुद को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार का सहारा देकर समाज से गरीबी मिटाना—इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अलौली प्रखंड की कृष्णा देवी ने पेश किया है।

  • खगड़िया जिले के अलौली की अत्यंत गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली कृष्णा देवी ने अपनी मेहनत से गरीबी उन्मूलन की पेश की मिसाल

  • कोरोना काल में पति के घर लौटने पर श्वेता जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ली सिलाई-कटाई की ट्रेनिंग और 50 हजार का लिया ऋण

  • दिल्ली में थैला कंपनी के अनुभव का लाभ उठाकर गांव में लगाई प्रिंटिंग व थैला निर्माण मशीन; आज डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार

  • उत्कृष्ट गुणवत्ता और त्वरित डिलीवरी के बल पर आसपास के कई जिलों से मिल रहे ऑर्डर; वर्तमान में सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक

कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाली कृष्णा देवी ने 'अर्श से फर्श' तक पहुंचकर महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल कायम की है। आज वह न केवल अपने परिवार को खुशहाल जिंदगी दे रही हैं, बल्कि अपनी फैक्ट्री और मार्केटिंग के जरिए लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार का जरिया भी उपलब्ध करा रही हैं।

कृष्णा देवी एक अत्यंत गरीब परिवार से आती हैं। उनके पति पहले दिल्ली में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे, जिससे दो बेटों और एक बेटी का पालन-पोषण और पढ़ाई-लिखाई बहुत मुश्किल से हो पाती थी।

कोरोना काल में पति का रोजगार छूट गया और वे घर लौट आए। परिवार को इस आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिए कृष्णा ने वर्ष 2021-22 में प्रयास शुरू किए।

श्वेता जीविका समूह से मिला 50 हजार का ऋण; पति के अनुभव से शुरू किया थैला निर्माण

कृष्णा देवी अलौली स्थित 'श्वेता जीविका स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह से जुड़कर उन्होंने छोटी-छोटी बचत शुरू की और सिलाई-कटाई सहित अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्राप्त किए।

उनके आत्मविश्वास और मजबूत कार्य योजना को देखते हुए समूह के सदस्यों ने सहमति बनाकर उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया। अपनी छोटी-सी बचत और ऋण राशि को मिलाकर कृष्णा ने गांव में ही थैला निर्माण का व्यवसाय शुरू किया।

इस कार्य में उनके पति ने पूरा सहयोग दिया, क्योंकि दिल्ली में वे एक थैला निर्माण कंपनी में काम कर चुके थे। पति के इसी अनुभव का लाभ उठाकर उन्होंने थैला सिलने और उस पर दुकानों के नाम व पते प्रिंट करने की आधुनिक मशीनें स्थापित कीं।

5 लाख रुपये के पार पहुंची सालाना आय; डेढ़ दर्जन लोगों को मिल रहा रोजगार

शुरुआत में कारोबार थोड़ा मंदा रहा, लेकिन थैलों की बेहतरीन सिलाई, मजबूती और आकर्षक प्रिंटिंग की वजह से जल्द ही उनके व्यवसाय ने रफ्तार पकड़ ली।

देखते ही देखते जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिलों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों से उन्हें भारी मात्रा में बैग निर्माण के ऑर्डर मिलने लगे। आज उनकी थैला निर्माण फैक्ट्री में आधा दर्जन से अधिक मजदूर प्रत्यक्ष रूप से कार्य कर रहे हैं, जबकि थैलों की बिक्री और मार्केटिंग कार्य में एक दर्जन से अधिक युवाओं को रोजगार मिला हुआ है।

वर्तमान में कृष्णा देवी की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। वह अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला रही हैं। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से प्रेरित होकर श्वेता जीविका समूह की दो दर्जन से अधिक महिलाएं आज विभिन्न प्रकार के लघु उद्यम शुरू कर स्वावलंबी बन रही हैं।

यह भी पढ़ें- पीएम मोदी के 'मन की बात' से मिली प्रेरणा, मुंगेर की प्रीति ने आटा मिल से बदली तकदीर, एक दर्जन महिलाओं को दे रहीं रोजगार