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खगड़िया में शिक्षा विभाग की खुली पोल; 18 में से 14 बड़े पद खाली; 4 लाख छात्रों व 1152 स्कूलों की निगरानी कैसे हो?

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:55 PM (IST)

Khagaria Education Department Officer Vacancy: खगड़िया जिले में शिक्षा विभाग गंभीर संकट से जूझ रहा है, जहाँ 18 में से ...और पढ़ें

Khagaria Education Department Officer Vacancy: 18 में 14 पद खाली, किराए के मकान में दफ्तर

Khagaria Education Department Officer Vacancy: 18 में 14 पद खाली, किराए के मकान में दफ्तर

HighLights

  1. खगड़िया शिक्षा विभाग में 18 में से 14 पद रिक्त।

  2. 4 लाख छात्रों और 1152 स्कूलों की निगरानी प्रभावित।

  3. अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम, गुणवत्ता पर असर।

मुकेश, खगड़िया। Khagaria Education Department Officer Vacancy: बिहार सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। खगड़िया जिले में शिक्षा विभाग खुद अधिकारियों और कर्मियों के घोर संकट से जूझ रहा है। जिले के 1152 प्राथमिक, मध्य और उत्क्रमित प्लस-टू विद्यालयों की व्यवस्था संभालने वाले शिक्षा विभाग में डीपीओ, पीओ और बीईओ के डेढ़ दर्जन (18) महत्वपूर्ण पदों में से 14 पद वर्षों से खाली पड़े हैं।

जिले के सरकारी स्कूलों में करीब चार लाख से अधिक बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उनकी निगरानी और प्रशासनिक कार्यों को संभालने वाला कोई पूर्णकालिक तंत्र मौजूद नहीं है। मुख्यालय से 50 से 60 किलोमीटर दूर सुदूर ग्रामीण इलाकों और दियारा क्षेत्र में स्थित विद्यालयों तक विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन पहुंचाना और नियमित निरीक्षण करना विभाग के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है।

दूसरे विभागों के प्रभारियों के भरोसे चल रहा काम

अधिकारियों की भारी कमी को पाटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला पंचायत राज विभाग और अन्य विभागों के पदाधिकारियों को शिक्षा विभाग के विभिन्न संभागों और प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

खगड़िया शिक्षा विभाग: रिक्तियों का गणित

  • कुल सरकारी विद्यालय: 1152 (प्राथमिक, मध्य व प्लस टू)।

  • नामांकित बच्चे: करीब 4 लाख से अधिक।

  • जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO): 5 सृजित पद — 4 पद रिक्त (सिर्फ 1 कार्यरत)।

  • प्रोग्राम ऑफिसर (PO): 6 सृजित पद — 4 पद रिक्त (सिर्फ 2 कार्यरत)।

  • प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO): 7 सृजित पद — 6 पद रिक्त (सिर्फ 1 कार्यरत)।

  • दफ्तरों की स्थिति: समग्र शिक्षा व एमडीएम कार्यालय किराए के मकानों में संचालित।

हालांकि, यह व्यवस्था कागजी खानापूर्ति से अधिक साबित नहीं हो रही है। दूसरे विभागों के अधिकारी पहले अपने मूल विभाग की प्राथमिकताओं और दायित्वों को पूरा करते हैं, जिसके बाद ही वे शिक्षा विभाग के संचिकाओं और निर्देशों पर ध्यान दे पाते हैं। इसके अलावा, शिक्षा विभाग की जटिल कार्यप्रणाली और योजनाओं (जैसे छात्रवृत्ति, पोशाक, एमडीएम व साइकिल योजना) की मॉनिटरिंग समझना भी उनके लिए आसान नहीं होता, जिसका सीधा खामियाजा हजारों शिक्षकों और लाखों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

7 प्रखंडों में 6 BEO नदारद, निरीक्षण का नियम बेअसर

विभागीय मानकों के अनुसार, प्रत्येक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को अपने प्रखंड के कम से कम 20 विद्यालयों का हर माह स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपनी होती है। लेकिन जिले के 7 प्रखंडों में से 6 प्रखंडों में स्थायी बीईओ ही नहीं हैं। इसी प्रकार, जिला स्तर पर नीतियों और योजनाओं को धरातल पर उतारने वाले जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के 5 पदों में से 4 पद वर्षों से रिक्त हैं। वहीं, 6 पीओ में से मात्र 2 ही पदस्थापित हैं। ऐसे में प्रभारियों से नियमित स्थलीय जांच और गुणवत्तापूर्ण मॉनिटरिंग की उम्मीद करना बेमानी साबित हो रहा है।

किराए के मकानों में चल रहे हैं दफ्तर

अधिकारियों के खाली पदों के साथ-साथ जिले में आधारभूत संरचना की स्थिति भी बदहाल है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और स्थापना डीपीओ का कार्यालय अनुमंडल परिसर में किसी तरह संचालित हो रहा है। वहीं, समग्र शिक्षा अभियान और मध्याह्न भोजन (MDM) जैसी अतिमहत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यालय आज भी निजी किराए के मकानों में चल रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा अभियान का संचालन भी दूसरे विभागों के भवनों से हो रहा है।

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"जिले के सात प्रखंडों में बीईओ के स्वीकृत सात पदों में से छह पद रिक्त पड़े हैं। इसी तरह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) के पांच में से चार पद खाली हैं और छह पीओ के स्थान पर केवल दो ही अधिकारी पदस्थापित हैं। अधिकारियों की इस कमी और वास्तविक स्थिति से शिक्षा विभाग के मुख्यालय को विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर अवगत करा दिया गया है।"

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अमरेंद्र कुमार गोंड, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), खगड़िया