खगड़िया में बागमती का कहर, 14 करोड़ की सड़क का आधा हिस्सा नदी में समाया, दियारा की लाइफलाइन ठप
खगड़िया में बागमती नदी के भीषण कटाव ने नवादा घाट-धमारा घाट मुख्य सड़क का आधा हिस्सा निगल लिया है, जिससे दियारा क्षेत्र की जीवनरेखा बाधित हो गई है।
HighLights
बागमती नदी कटाव से खगड़िया की मुख्य सड़क क्षतिग्रस्त।
नवादा घाट-धमारा घाट सड़क का आधा हिस्सा जलमग्न।
सड़क निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल।
संवाद सूत्र, चौथम (खगड़िया)। कोसी-बागमती दियारा क्षेत्र की लाइफलाइन कही जाने वाली नवादा घाट से धमारा घाट जाने वाली मुख्य सड़क इन दिनों बागमती नदी के भीषण कटाव की जद में आ गई है। खेत-खलिहानों को काटते-काटते उफनती बागमती ने अब पक्की सड़क को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
कोसी-बागमती दियारा की ठुठी मोहनपुर पंचायत अंतर्गत खरैता महादलित टोला के समक्ष बागमती नदी तेजी से सड़क को निशाना बनाकर कटाव कर रही है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।
ज्ञात हो कि नवादा घाटa से धमारा घाट जाने वाली इस सड़क का निर्माण कार्य लगभग 14 वर्ष पूर्व राजा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा शुरू किया गया था। इस बहुप्रतीक्षित सड़क का शिलान्यास अक्टूबर 2012-13 में हुआ था और वर्ष 2024 में इसका कार्य पूर्ण कर विभाग को सौंपा गया था।
नियमों के अनुसार, कार्य पूर्ण होने के बाद पांच वर्षों तक रखरखाव (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी संवेदक की ही होती है। अभी इसके मेंटेनेंस के दो वर्ष ही बीते हैं और तीन वर्ष का कार्य शेष है, लेकिन उससे पहले ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा बागमती में विलीन हो गया है।
आधे से अधिक सड़क नदी में समाई, वाहनों का परिचालन ठप
खरैता महादलित टोला मोड़ के समीप सड़क का आधे से अधिक भाग नदी में समा चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यहां पिछले कई दिनों से कटाव जारी है, लेकिन जल संसाधन विभाग से लेकर ग्रामीण कार्य विभाग तक सूचना देने के बावजूद समय रहते कटाव रोकने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
परिणामस्वरूप, मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में बह गया है और कटाव के कारण चौपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और अन्य भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है।
आवागमन बाधित होने से अब किसानों की आने वाली रबी की खेती पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता का पूरा ख्याल नहीं रखा गया था।
"नदी का पानी घट रहा है और उक्त स्थल के पास डीप माइनिंग शुरू हो गई है। पहले जो फ्लड फाइटिंग कार्य कराए गए थे, वे कटाव में समा गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। स्थायी समाधान के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजा जा रहा है, जिस पर आगामी 6 नवंबर को एंटी इरोजन कमेटी की बैठक में चर्चा होगी।"
— मनोज कुमार, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-दो, खगड़िया।
