कटिहार में मखाना बना समृद्धि की चाबी! मखदुमपुर में घर-घर प्रोसेसिंग से बढ़ी कमाई, ऑनलाइन विदेश तक पहुंचा बाजार
कटिहार का मखदुमपुर गांव मखाना प्रसंस्करण के दम पर आत्मनिर्भरता और समृद्धि की मिसाल बन गया है, जहां ग्रामीण सालाना ...और पढ़ें

कटिहार के मखदुमपुर गांव में मखाना लावा फोड़ने और उसकी ग्रेडिंग में जुटे स्थानीय कारीगर
HighLights
मखदुमपुर गांव मखाना प्रसंस्करण से आत्मनिर्भरता की मिसाल बना।
सुरेश शाह और उपेंद्र महलदार ने मखाना फोड़ी की शुरुआत की।
पलायन रुका, हर परिवार सालाना 10-15 लाख रुपये कमा रहा।
मो इम्तियाज, गेड़ाबाड़ी (कटिहार)। कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत महज तीन हजार की आबादी वाला मखदुमपुर गांव आज पूरे बिहार के लिए आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि की मिसाल बन चुका है।
लगभग एक दशक पूर्व तक जो गांव घोर आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और पलायन के दंश से जूझ रहा था, वहां आज घर-घर में खुशहाली और संपन्नता का वास है। ग्रामीणों ने अपनी मेहनत, सीमित संसाधनों और मखाना प्र्रसंस्करण (फोड़ी) के बल पर न केवल अपनी तकदीर बदली है, बल्कि पूरे गांव को 'मखाना हब' के रूप में स्थापित कर दिया है।
मखदुमपुर की यह कायाकल्प कहानी यह साबित करती है कि पारंपरिक फसलों का सही मूल्य संवर्धन (Value Addition) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकता है।
दो लोगों की पहल से शुरू हुआ सफर, आज हर घर में 10 से 15 लाख का सालाना कारोबार
स्थानीय मुखिया किशुन देव रविदास, समिति सदस्य प्रेम कुमार महलदार और सरपंच सुमन कुमार बताते हैं कि दस वर्ष पूर्व तक यहां के लोग रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को विवश थे। इस बदलाव की शुरुआत गांव के दो साहसी ग्रामीणों—सुरेश शाह और उपेंद्र महलदार ने की। उन्होंने छोटे स्तर पर मखाना फोड़ी और व्यापार शुरू किया।
धीरे-धीरे जब मखाना की खेती और प्रसंस्करण में लाभ दिखने लगा, तो अन्य ग्रामीण भी जुड़ते गए। आज स्थिति यह है कि गांव का लगभग हर परिवार कच्चा मखाना (फोड़ी) खरीदकर उसे घर में ही फोड़ता है और तैयार मखाना बाजार में बेचता है, जिससे प्रत्येक परिवार सालाना 10 से 15 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहा है।
पलायन रुका, ऑनलाइन मार्केटिंग से विदेशों तक पहुंचा मखदुमपुर का मखाना
मखाना उद्योग के इस विस्तार ने न केवल स्थानीय स्तर पर पलायन को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, बल्कि अब पड़ोसी जिलों और अन्य क्षेत्रों से भी मजदूर रोजगार की तलाश में मखदुमपुर आ रहे हैं। सुरेश शाह और उपेंद्र महलदार का तैयार मखाना अब कटिहार और पूर्णिया के स्थानीय बाजारों से निकलकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, केरल, बेंगलुरु और पंजाब जैसे बड़े महानगरों तक भेजा जा रहा है।
यही नहीं, गांव के पढ़े-लिखे युवा अब ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर विदेशों में भी मखाना का सीधा निर्यात कर रहे हैं। इस आर्थिक सशक्तीकरण से गांव के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और युवा सरकारी नौकरियों में भी सफलता का परचम लहरा रहे हैं।
