कटिहार में बेमौसम बारिश से आलू-मक्का की खेती पर संकट, खेतों में पानी जमा होने से फसल बर्बाद होने का डर
कटिहार के पोठिया प्रखंड में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने ...और पढ़ें

बारिश के बाद आलू के खेतों में जमा पानी।
HighLights
पोठिया में अचानक हुई मूसलाधार बारिश से किसान चिंतित।
खेतों में पानी भरने से आलू की फसल सड़ने का खतरा।
अक्टूबर प्लांट मक्का की बुवाई में भी हुई देरी।
संवाद सूत्र, पोठिया (कटिहार)। कटिहार जिले के पोठिया प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर हुई अचानक मूसलाधार बारिश ने स्थानीय किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
खेतों में पानी भर जाने से जहां हाल ही में बोई गई आलू की फसल को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका बन गई है, वहीं अक्टूबर प्लांट के तहत की जाने वाली मक्का की बुवाई पर भी ब्रेक लग गया है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने कृषि कार्यों में लगे किसानों की पूरी योजना और गणित को बिगाड़ कर रख दिया है।
दोपहर में अचानक बदला मौसम, झमाझम बरसे बदरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक आसमान में काले घने बादल मंडराने लगे। इसके कुछ ही देर बाद मेघ गर्जन और गरज-चमक के साथ तेज बारिश शुरू हो गई।
देखते ही देखते खेतों में पानी भर गया। बारिश के कारण सबसे अधिक नुकसान आलू उत्पादक किसानों को होने की आशंका जताई जा रही है।
आलू की फसल सड़ने का खतरा, मक्का बुवाई अटकी
क्षेत्र के पीड़ित किसान प्रदीप प्रभा, नीरज कुमार, ललन और अखिलेश ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले दो सप्ताह से मौसम पूरी तरह अनुकूल बना हुआ था, जिसे देखते हुए उन्होंने काफी लागत लगाकर आलू की रोपाई का काम पूरा किया था। अब खेतों में पानी जमा हो जाने से आलू के अंकुरण और पौधों के समुचित विकास पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यदि खेतों से पानी जल्द बाहर नहीं निकला तो आलू के कंद/बीज सड़ांध का शिकार हो जाएंगे।
दूसरी ओर, जो किसान अक्टूबर प्लांट के तहत मक्का की बुवाई की तैयारी में लगे थे, उनके तैयार खेतों में अत्यधिक नमी बढ़ गई है। नमी अधिक होने के कारण अब किसानों को बुवाई के लिए खेत सूखने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
फसल एवं वर्षा प्रभाव विवरण
| प्रभावित फसल | मुख्य समस्या / जोखिम | संभावित प्रभाव |
| आलू की खेती | खेतों में अत्यधिक जलजमाव | अंकुरण बाधित होना एवं बीजों के सड़ने का खतरा |
| मक्का की खेती | खेतों में नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ना | अक्टूबर प्लांट बुवाई में देरी एवं तैयारी प्रभावित |
| प्रभावित क्षेत्र | पोठिया प्रखंड (कटिहार) | किसानों की लागत डूबने की आशंका |
हमने अनुकूल मौसम देखकर ही आलू की रोपाई की थी। लेकिन शुक्रवार की बारिश से खेतों में पानी भर गया है। जलजमाव के कारण फसल सड़ने का डर है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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