'मम्मी जोर की भूख लगी है...' कटिहार अग्निकांड में सब गंवा चुकी मां बोली—बेटा, पानी पीकर पेट भर लो
कटिहार के बुद्ध नगर गांव में भीषण अग्निकांड से 10 परिवारों का आशियाना उजड़ गया है। बेघर हुए परिवारों के ...और पढ़ें

आगजनी के बाद खुले आसमान के नीचे बैठीं पीड़ित महिलाएं और उनके बेबस बच्चे।
HighLights
कटिहार के बुद्ध नगर में भीषण अग्निकांड से तबाही।
दस परिवारों का आशियाना उजड़ा, बच्चे भूख से बेहाल।
मखाना कारोबारी के लाखों रुपये भी आग में स्वाहा।
संवाद सूत्र, पोठिया (कटिहार)। "मम्मी-मम्मी, जोर की भूख लगी है, कुछ खाने को दो..." मासूम बच्चे की यह मासूम पुकार सुनकर किसी भी मां का कलेजा फट जाएगा।
लेकिन उस मां पर क्या बीती होगी, जिसका आशियाना और दाने-दाने का अनाज पलभर में आग की भेंट चढ़ चुका हो। पोठिया थाना क्षेत्र के बुद्ध नगर गांव में भीषण अग्निकांड के बाद सामने आया यह मार्मिक दृश्य हर किसी की आंखें नम कर देने के लिए काफी है, जहां दस परिवारों की गृहस्थी उजड़ने के बाद अब उनके सामने जीने का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
राख के ढेर पर बैठी मां और बिलखते बच्चे
अग्निकांड के बाद पीड़ित उपेंद्र महलदार की पत्नी तेतरी देवी अपने बच्चों काजल, राखी, साक्षी, नीति, पवन और तूफान के साथ खुले आसमान के नीचे बरामदे में बैठी थीं।
कभी वे घर की राख के ढेर को निहारतीं, तो कभी अपने बच्चों के चेहरों को देखतीं; उनकी आंखों में गहरी बेबसी और लाचारी साफ झलक रही थी। जब बच्चों ने खाने की जिद की, तो मां ने उन्हें अपने सीने से चिपका लिया और भर्राए गले से बोलीं— "बेटा, सब कुछ जल गया है। पानी पीकर पेट भर लो, शाम तक खाने का कुछ इंतजाम करती हूं।"
इतना कहकर मां ने अपना मुंह फेर लिया और आंचल से आंसू पोंछते हुए आगे बढ़ गईं। अब इन परिवारों के पास सिर छिपाने के लिए आसमान के सिवा कोई दूसरा सहारा नहीं बचा है। दिन की चिलचिलाती धूप और रात की गुलाबी ठंड ने इनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है।
मखाना कारोबार के लिए रखे रुपये भी जले
वहीं दूसरी ओर, सिकंदर महलदार की पत्नी अरबिना देवी अपने बच्चों अजीत, सुजीत, लक्ष्मी और मधु के साथ आंगन में एक चौकी पर बैठी फफक-फफक कर रो रही थीं। उनके पति मखाना का कारोबार करने के साथ-साथ लीज पर खेती भी करते थे।
किसानों से खरीदे गए मखाना के गुरिया का भुगतान करने के लिए जो नकदी रुपये उन्होंने घर में सहेज कर रखे थे, वे भी आग में जलकर स्वाहा हो गए। अरबिना को अब इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि वे किसानों का बकाया और जमीन मालिक को लीज की रकम कैसे चुकाएंगी।
यही हाल उषा देवी, धर्मेंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार, मंटू शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा, मिथिलेश शर्मा, गौतम शर्मा और भोला शर्मा के परिवारों का भी है। सब कुछ गंवा चुके इन पीड़ितों का दर्द यह है कि हादसे के इतने घंटे बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि या समाजसेवी की ओर से सूखा राशन या अन्य राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे उनके पेट की भूख शांत हो सके।
