धान-गेहूं छोड़ हल्दी की खेती पर दांव, कटिहार के फलका में किसान प्रति बीघा एक लाख तक कमाई की जता रहे उम्मीद
कटिहार के फलका प्रखंड में किसान धान-गेहूं छोड़कर हल्दी की खेती से समृद्धि पा रहे हैं। अनुकूल मिट्टी और कृषि ...और पढ़ें

कटिहार के फलका क्षेत्र में लहलहाती हल्दी की फसल और खेती।
HighLights
किसान धान-गेहूं छोड़ हल्दी की खेती अपना रहे हैं।
प्रति बीघा एक लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
कृषि विभाग आधुनिक तकनीकों से किसानों का साथ दे रहा है।
संवाद सूत्र, पोठिया (कटिहार)। कटिहार जिले के फलका प्रखंड क्षेत्र के भंगहा, पोठिया और शब्दा इलाके में हल्दी की खेती किसानों के जीवन में समृद्धि का नया रंग घोल रही है।
पारंपरिक खेती में अपेक्षाकृत कम मुनाफा मिलने को देखते हुए किसान अब धान-गेहूं के दायरे से निकलकर हल्दी जैसी नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। रसोई में स्वाद और रंग बढ़ाने वाली हल्दी अब इन इलाकों के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक सशक्त जरिया बनती जा रही है।
इस वर्ष खेतों में लहलहाती हल्दी की हरी-भरी फसल को देखकर किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। अनुकूल मौसम और फसल की बेहतर स्थिति को देखते हुए उन्हें इस बार बंपर पैदावार और शानदार आमदनी की पूरी उम्मीद है।
लागत और बंपर मुनाफे का गणित
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यहाँ की मिट्टी और जलवायु हल्दी की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल है। उचित देखभाल, समय पर सिंचाई और सही फसल प्रबंधन से बेहतरीन उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
पोठिया और भंगहा गांव के प्रगतिशील किसान रामदेव मंडल, अनिल मंडल, पुरण मंडल, राजकुमार और नरेश ने बताया कि हल्दी की बुआई का उपयुक्त समय अप्रैल महीने में होता है और फसल को पूरी तरह तैयार होने में करीब सात से आठ महीने का समय लगता है।
किसानों के अनुसार, एक बीघा जमीन में हल्दी की खेती करने पर लगभग 40 हजार रुपये की लागत आती है। यदि फसल अच्छी रही तो 100 क्विंटल से अधिक उत्पादन की संभावना रहती है।
वर्तमान बाजार भाव अनुकूल रहने पर प्रति बीघा करीब एक लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा होने की उम्मीद है, हालांकि वास्तविक लाभ उत्पादन और बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। हल्दी की खेती से किसानों को फसल चक्र अपनाने और खेतों का उचित प्रबंधन करने का अनूठा अवसर भी मिल रहा है।
कृषि विभाग दे रहा है आधुनिक तकनीकों का साथ
बढ़ते रुझान के बीच कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत किस्मों के चयन, संतुलित खाद के उपयोग, समय पर सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन से हल्दी की उत्पादकता को और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
फलका के कृषि पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु हल्दी की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को समय-समय पर उन्नत खेती, फसल सुरक्षा, कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग और सिंचाई प्रबंधन की तकनीकी जानकारियां दी जा रही हैं।
उन्होंने किसानों को रासायनिक खादों के बजाय जैविक खाद के उपयोग पर विशेष जोर देने की सलाह दी है। यदि किसानों को इसी तरह उचित बाजार और आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिलता रहा, तो आने वाले समय में फलका क्षेत्र में हल्दी की खेती का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है।
"फलका प्रखंड क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु हल्दी की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। किसान उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर इससे बेहतर पैदावार ले रहे हैं। विभाग द्वारा किसानों को लगातार फसल सुरक्षा और जैविक खाद के उपयोग को लेकर जागरूक किया जा रहा है।"
