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गांव में स्कूल नहीं तो 2.5 KM पैदल चले, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से संवरी राह; शंघाई में चमके दिलखुश तो PM मोदी बोले- शाबाश

Published: Sat, 10 Oct 2026 08:15 AM (IST)

कटिहार के मोहम्मद दिलखुश ने शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता में अपनी तकनीकी दक्षता का परचम लहराया, जिससे उनके ...और पढ़ें

Dilkhush World Skills:

Dilkhush World Skills: 

HighLights

  1. मोहम्मद दिलखुश ने शंघाई में विश्व कौशल प्रतियोगिता में परचम लहराया।

  2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिलखुश की उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित किया।

  3. कटिहार के सिहपुर गांव के लिए दिलखुश बने प्रेरणास्रोत युवा।

जागरण संवाददता, कटिहार। Dilkhush World Skills: छोटा सा गांव, पगडंडियों का डगर और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, लेकिन सीने में पल रहे सपने गगनचुंबी थे। कटिहार जिले के कदवा प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती सिहपुर गांव में आज गर्व और उल्लास की लहर है। इस मिट्टी के लाल मो. दिलखुश ने चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता (वर्ल्ड स्किल्स) में अपनी असाधारण तकनीकी दक्षता का परचम लहराकर न केवल अपने साधारण परिवार, बल्कि पूरे बिहार और देश का मान अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया है।

प्रतियोगिता से लौटने के बाद नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई आत्मीय मुलाकात और पीएम द्वारा हौसला अफजाई के बाद दिलखुश की यह उपलब्धि गांव-गांव तक प्रेरणा की नई मिसाल बन चुकी है। जिस गांव में बुनियादी शिक्षा हासिल करने के लिए भी बच्चों को दूसरे गांव का रुख करना पड़ता है, वहां के एक युवा की वैश्विक कामयाबी अब सीमांचल के सुदूर इलाकों में शिक्षा, हुनर और सुनहरे भविष्य की नई उम्मीद जगा रही है।

माता-पिता की आंखों में छलके गर्व के आंसू

दिलखुश की इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे मर्मस्पर्शी और भावुक तस्वीर उसके माता-पिता के आंसुओं और शब्दों में झलकती है। बेटे की उपलब्धि पर गदगद पिता मोहम्मद इमामुद्दीन कहते हैं, "जीवन भर जो मेहनत और मजदूरी की, उसका फल आज मिल गया। अब लोग मुझे मेरे नाम से नहीं, बल्कि दिलखुश के अब्बा के रूप में पहचानते हैं। किसी भी पिता के लिए इससे बड़ा सम्मान और फख्र का लम्हा क्या हो सकता है!"

Bihar Dilkhush Shines at World Skills Meets PM Modi (2)

पिता बोले- बेटे के नाम से मिली पहचान

वहीं, मां दिलबरी खातून की जुबां पर बेटे के लिए सिर्फ दुआएं हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इस खुशी को लफ्जों में बयां नहीं किया जा सकता। तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे दिलखुश ने कभी गरीबी और तंगहाली को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उसने अपनी अटूट लगन से पिता के पसीने का मोल चुकाया है और गांव के सपनों को नई परवाज दी है।

गांव में स्कूल तक नहीं

दिलखुश की कामयाबी के पीछे कड़े संघर्ष की ऐसी दास्तान है, जो अभावों में जीने वाले हर नौजवान को हिम्मत देती है। सिहपुर गांव में स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण उसे अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए रोजाना ढाई किलोमीटर दूर बलिया बेलौन जाना पड़ता था।

संघर्ष से शंघाई तक: मो. दिलखुश की प्रोफाइल

  • नाम: मोहम्मद दिलखुश

  • गांव व प्रखंड: सिहपुर, कदवा प्रखंड, जिला- कटिहार (बिहार)।

  • माता-पिता: मां दिलबरी खातून एवं पिता मोहम्मद इमामुद्दीन (साधारण किसान)।

  • परिवार: तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे।

  • शुरुआती चुनौती: गांव में विद्यालय न होने के कारण रोज ढाई किलोमीटर दूर बलिया बेलौन पैदल जाकर पढ़ाई की।

  • वैश्विक मंच: चीन के शंघाई में आयोजित 'वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता' में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व और टॉप-10 में स्थान।

  • ताजा उपलब्धि: प्रधानमंत्री आवास में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा विशेष मुलाकात और उत्साहवर्धन।

ढाई किमी दूर पैदल जाकर पूरी की तालीम

पिता बताते हैं कि कड़ी धूप हो या बरसात की कीचड़, दिलखुश रोजाना 15 से 20 मिनट तेज कदमों से चलकर स्कूल पहुंचता था। जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी अक्सर ग्रामीण प्रतिभाओं का दम तोड़ देती है, वहीं दिलखुश ने पढ़ाई और सीखने की ललक को अपना सबसे बड़ा संबल बनाया। उसने यह सिद्ध कर दिया कि मंजिल की राह में दूरियां और आर्थिक तंगहाली रुकावट बन सकती हैं, लेकिन मजबूत संकल्प के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।

एक बेटे की कामयाबी से पूरे इलाके में जगी उम्मीद की नई किरण

गांव के मुखिया मिराज आलम, पूर्व मुखिया मो. शाहिद, प्रदीप कुमार दास, मो. शमसी और पूर्व मुखिया अब्दुल रऊफ बताते हैं कि इमामुद्दीन ने बेहद तंगहाली और कठिनाइयों के बीच अपने बच्चों की परवरिश की। दिलखुश बचपन से ही मेधावी और शांत स्वभाव का था।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि दिलखुश की यह वैश्विक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह पूरे पिछड़े इलाके की सोच बदलने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी। अब गांव के बच्चों के सामने एक ऐसा रोल मॉडल मौजूद है, जिसे देखकर वे भी पगडंडियों से निकलकर आसमान छूने और तकनीकी हुनर से तकदीर संवारने का सपना देख सकेंगे।

Dilkhush World Skills Champion from Katihar Meets PM Modi

हुनर ने बदली पहचान

दिलखुश का यह सफर सिर्फ एक ग्रामीण लड़के की निजी कामयाबी का दस्तावेज नहीं है। यह उस पिता के अनथक श्रम और त्याग की कहानी है, जिसने फटेहाल होकर भी बच्चों के हाथों से कलम नहीं छूटने दी। यह उस सुदूर गांव की दास्तान है, जहां विकास की रोशनी देर से पहुंची, लेकिन हुनर का उजाला पहले जगमगा उठा।

अब पीढ़ियों की तकदीर बदलने की आस

जिस पिता को आज अपने बेटे के नाम से सामाजिक सम्मान मिल रहा है, उसी बेटे की कामयाबी अब आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करेगी। सिहपुर के लिए दिलखुश की यह उड़ान यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा की सीमा तय नहीं कर सकती। लगन, शिक्षा और हुनर जब एक साथ मिलते हैं, तो इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षर खुद-ब-खुद लिखे जाते हैं।

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