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चीन में 28 देशों के बीच भारत को दिलाया टॉप-10 में स्थान, ब‍िहार के दिलखुश से मिले PM मोदी, अपने हाथों से खिलाया लड्डू

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:46 PM (GMT+05:30)

Katihar Dilkhush World Skills: ब‍िहार कटिहार के दिलखुश ने चीन में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत को टॉप-10 में ...और पढ़ें

Katihar Dilkhush World Skills: कटिहार के किसान पुत्र दिलखुश ने शंघाई में लहराया तिरंगा; PM मोदी ने PM आवास में अपने हाथों से खिलाया लड्डू

Katihar Dilkhush World Skills: कटिहार के किसान पुत्र दिलखुश ने शंघाई में लहराया तिरंगा; PM मोदी ने PM आवास में अपने हाथों से खिलाया लड्डू

HighLights

  1. कटिहार के दिलखुश ने वर्ल्ड स्किल्स में भारत को टॉप-10 में स्थान दिलाया।

  2. प्रधानमंत्री मोदी ने दिलखुश को लड्डू खिलाकर सम्मानित किया, हौसला बढ़ाया।

  3. आर्थिक अभावों के बावजूद तकनीकी दक्षता से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।

माधवेंद्र, भागलपुर। Katihar Dilkhush World Skills: सीमांचल के सुदूर और आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले कटिहार जिले के बलिया बेलौन के एक लाल ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर ऐसा ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है, जिस पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है। एक बेहद साधारण किसान व मजदूर परिवार की कोख से निकले युवा दिलखुश ने चीन के शंघाई में आयोजित वैश्विक तकनीकी महाकुंभ ‘वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता’ में तिरंगा लहराया।

पलक झपकते भूल गया सारे दर्द

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में भारतीय दल के साथ दिलखुश को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल दिलखुश की पीठ थपथपाकर हौसला अफजाई की, बल्कि खुद अपने हाथों से लड्डू खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया। सीमित संसाधनों और घोर अभावों के बीच से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने के बाद दिलखुश ने फोन पर 'दैनिक जागरण' से अपने इस प्रेरणादायी सफर को साझा किया।

Bihar Dilkhush Shines at World Skills Meets PM Modi (1)

भाइयों ने दिल्ली में की मजदूरी

कटिहार के बलिया बेलौन निवासी दिलखुश का जीवन संघर्ष और अदम्य जिजीविषा की अनूठी मिसाल है। पिता मोहम्मद इमामुद्दीन साधारण किसान हैं, जिनकी छोटी सी जोत से नौ सदस्यों के बड़े परिवार का पेट भरना भी दूभर रहता था। परिवार की तंगहाली का आलम यह था कि दिलखुश के बड़े भाइयों को रोजी-रोटी की खातिर दिल्ली जाकर मेहनत-मजदूरी करनी पड़ी।

तंगी ने छीना था डॉक्टर बनने का सपना

पांच भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे दिलखुश शुरू से ही मेधावी छात्र रहे। मैट्रिक की परीक्षा 84 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण करने के बाद उनकी दिली तमन्ना डॉक्टर बनने की थी, लेकिन जेब में फीस के पैसे न होने के कारण मेडिकल की पढ़ाई का सपना आंसुओं में बह गया।

Bihar Dilkhush Shines at World Skills Meets PM Modi (2)

मनोहर सर बने सारथी

निराशा के भंवर में फंसे दिलखुश के जीवन में बारसोई हाई स्कूल के सरकारी शिक्षक और कोचिंग संचालक मनोहर सर एक मसीहा बनकर आए। मनोहर सर ने दिलखुश की तीक्ष्ण बुद्धि और तकनीकी समझ को परखा। उन्होंने दिलखुश को 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के बारे में बताया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड ने खोली तकदीर की राह

इस योजना के तहत मिले तीन लाख रुपये के शिक्षा ऋण की बदौलत दिलखुश ने ओडिशा की प्रतिष्ठित सी.वी. रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग’ ट्रेड में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा में दाखिला लिया।

Bihar Dilkhush Shines at World Skills Meets PM Modi (3)

ओडिशा से मिला था बड़ा ऑफर

डिप्लोमा के दौरान जब दिलखुश की असाधारण प्रतिभा सामने आई, तो संस्थान प्रबंधन चाहता था कि वे ओडिशा राज्य की ओर से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें। लेकिन कटिहार की मिट्टी के प्रति वफादार दिलखुश ने स्पष्ट कर दिया कि वे खेलेंगे तो सिर्फ अपनी जन्मभूमि बिहार के नाम से।

पर चुना अपनी माटी बिहार का नाम

इसके बाद राज्य स्तर, जोनल स्तर, राष्ट्रीय स्तर और कड़े तकनीकी मूल्यांकन के हर पड़ाव पर दिलखुश ने लगातार 'गोल्ड मेडल' अपने नाम किए और भारतीय दल में अपना स्थान पक्का किया। शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स में 28 विकसित व विकासशील देशों के महारथियों के बीच दिलखुश ने अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपनी अद्भुत तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाया, जिसके दम पर भारत इस वर्ग में टॉप-10 देशों में शुमार हुआ। प्रतियोगिता का संपूर्ण खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया गया था।

Bihar Dilkhush Shines at World Skills Meets PM Modi (4)

PM ने अपने हाथों से खिलाया लड्डू

प्रधानमंत्री से मुलाकात के भावुक पलों को बयां करते हुए दिलखुश ने बताया, "बलिया बेलौन के कच्चे घर और गलियों से निकलकर देश के प्रधानमंत्री के सम्मुख खड़े होना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने न केवल हमारी पीठ थपथपाई, बल्कि अपने हाथों से मुझे लड्डू खिलाया और कहा कि देश को तुम जैसे हुनरमंद युवाओं पर गर्व है। उस एक पल ने मेरी जिंदगी के सारे संघर्ष, अभाव और आंसुओं को गर्व में तब्दील कर दिया।"

सिर्फ डिग्रियों के पीछे न भागें, हुनर को बनाएं हथियार

देश के नौजवानों को संदेश देते हुए दिलखुश ने कहा कि आज का युग सिर्फ कागजी डिग्रियों का संग्रह करने का नहीं है। युवाओं को किसी एक तकनीकी विधा या हुनर में खुद को वैश्विक स्तर पर पारंगत बनाना चाहिए। भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस सही मार्गदर्शन, अनुशासन और समयबद्ध योजना की जरूरत है। दिलखुश अपनी इस शानदार कामयाबी का श्रेय अपने गुरु मनोहर सर, प्रशिक्षक अनुराज सर, कॉलेज फैकल्टी और भारतीय तकनीकी टीम को देते हैं।

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