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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Nariyal Ki Kheti: नारियल की खेती करने वाले किसानों की बल्ले-बल्ले, नीतीश सरकार के इस ऑफर से हो जाएंगे मालामाल

Published: Wed, 14 May 2025 02:34 PM (IST)

बिहार के भभुआ जिले में नारियल की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का काम चल रहा है। ...और पढ़ें

नारियल की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा अनुदानित दर पर पौधा (जागरण)
नारियल की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा अनुदानित दर पर पौधा (जागरण)

HighLights

  1. बीते वर्ष जिले में 800 पौधा किसानों काे उपलब्ध कराया गया था
  2. कैमूर के किसान परंपरागत खेती पर जोर दे रहे हैं

जागरण संवाददाता, भभुआ। Nariyal Ki Kheti Kaise Karen: भभुआ जिले में नारियल की खेती करने के लिए किसानों को उद्यान विभाग की राज्य स्कीम मद से अनुदानित पर नारियल के पौधा का उपलब्ध कराया जाएगा। जिले में 16 सौ पौधों का लगाने का लक्ष्य मिला है। योजना का लाभ पाने के लिए किसानों का डीबीटी पंजीकरण अनिवार्य है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किसानों को पौधे दिए जाएंगे।

इस संबंध में सहायक निदेशक उद्यान डा. अभय कुमार गौरव ने बताया कि जिले में विभिन्न प्रकार के फलों की खेती करने के लिए किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। अब कैमूर के किसान परंपरागत खेती के साथ ही आम, केला, पपीता, अमरूद, नींबू, आवंला, बागवानी कर रहे है।

बीते वर्ष में जिले में 800 पौधा किसानों को उपलब्ध कराया गया था

विभाग के द्वारा नारियल की खेती करने के लिए सार्थक पहल की गई है। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष जिले में 800 पौधा किसानों काे उपलब्ध कराया गया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 16 सौ नारियल के पौधों को लगाने का लक्ष्य मिला है। सहायक निदेशक ने बताया कि एक लाभार्थी किसान को न्यूनतम पांच तथा अधिकतम 712 पौधा अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत नारियल पौधा का वितरण वैसे किसानों को किया जाएगा जो अपने घर के आसपास की जमीन, किचेन, गार्डेन खेतों में लगाने के इच्छुक है। शहरी क्षेत्र के लोग भी इस योजना का लाभ ले सकेेगे। नारियल का प्रति पौधा कीमत 85 रुपये है।

जिस पर 75 प्रतिशत अनुदान देय है। 63.75 रूपये अनुदान मिलेगा। बता दें कि कृषि विभाग के माध्यम से किसानों के हित के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ फल, फूल व सब्जी की खेती कर आर्थिक रूप से खुशहाल है। जिले के कई प्रखंडों की पहचान सब्जी की खेती के रूप में की जाती है।

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