बचपन में उठ गया पिता का साया, मां से प्रेरणा लेकर बटियों ने रचा इतिहास; एक एम्स में डॉक्टर तो दूसरी बनी अफसर
मोहनियां के केकढा गांव की तीन बहनों ने पिता के निधन के बाद भी मां की प्रेरणा से सफलता की ...और पढ़ें

खुशबू कुमारी और पूजा कुमारी। फोटो जागरण
HighLights
केकढा गांव की तीन बहनों ने पाई सफलता।
एक बहन एम्स में डॉक्टर, दूसरी अधिकारी बनी।
मां और दादा की प्रेरणा से हासिल किया मुकाम।
संवाद सहयोगी, मोहनियां। 'परिंदों को तालीम नहीं दी जाती उड़ानों की, वे खुद ही छू लेते हैं बुलंदियां आसमानों की' इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है स्थानीय प्रखंड के केकढा गांव की तीन सगी बहनों ने।
स्व. रामनारायण और सरिता कुंवर की तीन पुत्रियों में खुशबू कुमारी, पूजा कुमारी व आकांक्षा कुमारी का नाम शामिल है। बचपन में ही इनके सिर से पिता का साया उठ गया।
पति की मौत के बाद सरिता कुंवर के सामने बच्चे-बच्चियों की परवरिश और शिक्षा की समस्या खड़ी हो गई, लेकिन उन्होंने इसका डटकर सामना किया और नौकरी पाने का प्रयास जारी रखा।
वर्ष 2000 में सरकारी शिक्षिका के रूप में उनका चयन हो गया। इससे उनका आत्मबल बल बढ़ गया। संघर्ष के दौर में यह उम्मीद की किरण थी। दादा जगदीश सिंह व्यास के संरक्षण और मां की प्रेरणा से खुशबू, पूजा और आकांक्षा ने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया।
ग्रामीण परिवेश में रहकर हासिल किया सफलता का मुकाम
तीनों बहनों ने दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन से साबित किया कि ग्रामीण परिवेश सफलता के शिखर को चूमने में बाधक नहीं बन सकता। महाराणा प्रताप महाविद्यालय मोहनियां से तीनों ने स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर अपने पैरों पर खड़े होने की धुन में लग गईं।
खुशबू कुमारी ने बिहार प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर परीक्षा दी। उनका चयन हो गया। आज रोहतास जिले में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। पूजा कुमारी एमबीबीएस की पढ़ाई कर एम्स दिल्ली में चिकित्सक हैं।
पूजा के स्वास्थ्य के क्षेत्र में रुचि देख छोटी बहन आकांक्षा ने भी इसी क्षेत्र को चुना। नीट की परिक्षा में सफल होने के बाद वे अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज गया से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।
तीनों बहनों ने बताया कि पिता के असामयिक निधन से माता और दादा को गहरा आघात लगा था। इनलोगों की प्रेरणा से हौसला बढ़ा। दृढ़ इच्छा शक्ति से आत्म निर्भर बनने का सपना साकार हुआ।
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