Bihar Tourist Place: सर्दियों में गुलजार हुआ जमुई का नागी-नकटी, रूस और यूरोप से पहुंचने लगे प्रवासी पक्षी
जमुई का नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के आगमन से गुलजार हो गया है, जहां प्रकृति प्रेमी पक्षियों की अठखेलियां और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।

नागी बर्ड सेंचुरी। फोटो जागरण
HighLights
नागी-नकटी में सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू।
नकटी में पर्यटकों के लिए इको-टूरिज्म सुविधाएं बढ़ीं।
नागी-नकटी जून 2024 में रामसर स्थल घोषित।
सत्यम कुमार सिंह, झाझा (जमुई)। अगर आप पक्षियों की अठखेलियां देखने, प्रकृति के करीब कुछ सुकून भरे पल बिताने और पर्यावरण की खूबसूरती को महसूस करने के शौकीन हैं, तो जमुई की नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी आपका इंतजार कर रही है।
सर्द मौसम की दस्तक के साथ ही दोनों जलाशय प्रवासी पक्षियों के स्वागत को तैयार हैं। नवंबर से विदेशी मेहमानों की चहचहाहट बढ़ेगी तो जलाशयों का नजारा भी बदल जाएगा।
पानी पर तैरते पक्षियों के झुंड, आसमान में उड़ान भरते परिंदे और चारों ओर फैली हरियाली प्रकृति प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव बन सकती है। नागी में हर साल आठ से नौ हजार और नकटी में चार से पांच हजार पक्षियों की मौजूदगी रहती है।
पक्षियों के साथ प्रकृति को करीब से जानने का मौका
नागी-नकटी की खासियत केवल प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या नहीं, बल्कि यहां का प्राकृतिक परिवेश भी है। सर्दियों में यहां लालसर, बार-हेडेड गूज, ग्रेलेग गूज, कामन पोचार्ड और गडवाल सहित कई प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं।
ओपनबिल स्टार्क और पनडुब्बी जैसी प्रजातियां भी इस क्षेत्र की जैव विविधता को खास बनाती हैं। दुर्लभ फाल्केटेड डक को भी यहां देखे जाने की जानकारी सामने आ चुकी है। सुबह और शाम का समय पक्षियों को देखने के लिए विशेष आकर्षण रखता है।
जलाशय के शांत वातावरण में पक्षियों की आवाज और पानी में उनकी अठखेलियां प्रकृति से जुड़ने का अवसर देती हैं।
प्रवासी पक्षियों का आगमन सामान्य तौर पर नवंबर से अप्रैल तक रहता है। इस दौरान बिहार के विभिन्न शहरों के साथ दूसरे राज्यों से भी पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद रहती है।
नकटी में पर्यटकों के लिए बढ़ीं सुविधाएं
नागी पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। अब नकटी को भी इको टूरिज्म के तहत विकसित करने की दिशा में पहल की गई है। यहां पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए पांच क्वार्टर, रेस्टोरेंट और रोशनी की व्यवस्था की गई है।
बैठने के लिए स्थान बनाए गए हैं, जबकि बांस से बनी संरचनाएं परिसर की खूबसूरती बढ़ा रही हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रन पार्क बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। वन विभाग ने दोनों जलाशयों के आसपास छायादार और फलदार पौधे लगाए हैं।
पक्षियों के भोजन और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जलाशय में मछलियों, घोंघों और अन्य जलीय जीवों की उपलब्धता पक्षियों के भोजन का प्रमुख आधार है। उद्देश्य है कि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
रामसर स्थल के रूप में दुनिया में पहचान
जून 2024 में नागी और नकटी को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। इससे जमुई के इन जलाशयों को वैश्विक पहचान मिली। वर्ष 2025 में श्रीलंका, जर्मनी, लंदन और भारत के ओडिशा सहित विभिन्न स्थानों से पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई थी।
नागी के बर्ड गाइड संदीप कुमार ने पर्यटकों को यहां के प्राकृतिक परिवेश और पक्षियों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी थी। बुधवार को भी नागी-नकटी में तीन प्रजातियों के करीब एक दर्जन पक्षियों के आगमन की जानकारी मिली।
इनमें एक जोड़ा कामन पोचार्ड, छह गडवाल और चार ग्रीन सैंडपाइपर शामिल बताए गए हैं। शुरुआती आमद के साथ ही अब पक्षी प्रेमियों की नजर नवंबर से बढ़ने वाली संख्या पर है।
बर्ड म्यूजियम बने तो पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
नागी में बिहार का सबसे बड़ा बर्ड म्यूजियम बनाने की घोषणा जुलाई 2024 में की गई थी। इसके लिए भूमि वन विभाग को हस्तांतरित किए जाने की जानकारी है। विभागीय स्तर पर प्राक्कलन और अन्य तैयारियां किए जाने के बावजूद राशि के अभाव में निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
म्यूजियम बनने से पक्षी प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए नागी नई पहचान बना सकता है। रेंजर रवि कुमार के अनुसार, सर्दी की शुरुआत के साथ प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। नवंबर से इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
ऐसे में प्रकृति, पक्षियों और पर्यावरण में रुचि रखने वाले लोगों के लिए नागी-नकटी घूमने का अच्छा अवसर है। जरूरत है कि पर्यटक यहां की सुंदरता का आनंद लेने के साथ पक्षियों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
