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1833 में राजा गुरु प्रसाद ने कराया था निर्माण, जमुई का खैरा दुर्गा मंदिर 193 साल से क्यों बना है आस्था का केंद्र

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:25 AM (IST)

जमुई के खैरा स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर 1833 में राजा गुरु प्रसाद द्वारा निर्मित, डेढ़ शताब्दी से अधिक समय से आस्था का केंद्र है।

जमुई के खैरा स्थित डेढ़ सौ वर्ष पुराने ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर का मुख्य परिसर।

जमुई के खैरा स्थित डेढ़ सौ वर्ष पुराने ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर का मुख्य परिसर।

HighLights

  1. प्राचीन खैरा दुर्गा मंदिर 1833 में राजा गुरु प्रसाद ने बनवाया।

  2. इसे 'सर्व मनोकामना सिद्धि धाम' के रूप में जाना जाता है।

  3. नवरात्रि और दशहरा पर हजारों श्रद्धालु जुटते, बलि की परंपरा।

संवाद सूत्र, खैरा (जमुई)। जमुई जिले के खैरा स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर बीते डेढ़ शताब्दी से अधिक समय से श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

अपनी अलौकिक शक्तियों, चमत्कारों और प्राचीन मान्यताओं के कारण यह पवित्र मंदिर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में 'सर्व मनोकामना सिद्धि धाम' के रूप में विख्यात है।

यहां आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि सच्चे मन और पूरी निष्ठा के साथ मां के दरबार में की गई अरदास कभी खाली नहीं जाती और हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

वर्ष 1833 में राजा गुरु प्रसाद ने कराया था निर्माण; राजमहल का इतिहास

इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास पर नजर डालें तो इसका निर्माण वर्ष 1833 में तत्कालीन खैरा स्टेट के राजा गुरु प्रसाद द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर राजा के भव्य राजमहल के मुख्य द्वार के ठीक सामने स्थित है।

हालांकि समय के बदलाव के साथ राजमहल का अधिकांश हिस्सा अब काल के गाल में समाकर ध्वस्त हो चुका है, परंतु माँ दुर्गा का यह प्राचीन मंदिर आज भी उसी शान और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मंदिर की महत्ता को और बढ़ाने के लिए हाल ही में मंदिर कमेटी द्वारा गहबर का नया निर्माण और कलश स्थापना का कार्य संपन्न कराया गया है।

अष्टमी-नवमी पर पारंपरिक बलि और श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़

मंदिर की विशेषताओं में नवरात्र और दशहरा का पर्व सबसे खास होता है। इस दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। अष्टमी की रात्रि से लेकर नवमी की सुबह तक यहां परंपरागत बलि दिए जाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है।

नवरात्र के इन पावन दिनों में दूर-दराज के इलाकों से लोग आकर मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं।

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"मां की महिमा अपरंपार है। जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ अपनी मुरादें लेकर मां के दरबार में पहुंचते हैं, माता रानी उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करती हैं।"

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— प्रदीप आचार्य, मुख्य पुजारी (खैरा दुर्गा मंदिर)

"स्थापना काल से ही यहां पूरी निष्ठा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से पूजा-पाठ होती आ रही है। दशहरा मेला को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों का हमेशा से भरपूर सहयोग मिलता रहा है।"


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— सुमित कुमार सिंह, अध्यक्ष सह पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, बिहार सरकार