रेलवे स्टेशन बना प्रसव कक्ष! महिला पुलिसकर्मियों ने बचाई 2 जिंदगियां, झाझा में एकता, रेणु, मधु व महिमा का सराहनीय काम
Jhajha Railway Station Women Police Delivery: झाझा रेलवे स्टेशन पर तैनात महिला रेल जवानों ने अपनी ड्यूटी से बढ़कर मानवीयता ...और पढ़ें

झाझा स्टेशन पर महिला रेल जवानों ने पेश की ममता की मिसाल; एक माह में दो गर्भवती यात्रियों की बचाई जान, सुरक्षित प्रसव कराया
HighLights
महिला रेल जवानों ने दो गर्भवती महिलाओं की मदद की।
झाझा स्टेशन पर ही सुरक्षित प्रसव कराया गया।
उनकी मानवीयता और तत्परता की खूब सराहना हो रही है।
संवाद सूत्र, झाझा (जमुई)। Jhajha Railway Station Women Police Delivery: वर्दी में सिर्फ कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का कड़ा पहरा ही नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसमें एक संवेदनशील मां और बहन का करुणामय रूप भी दिखाई देता है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नारी सशक्तीकरण और मातृत्व की ऐसी ही अनूठी मिसाल झाझा रेलवे स्टेशन पर देखने को मिली है।
यहां तैनात महिला रेल जवानों ने कर्तव्य से आगे बढ़कर महज एक महीने के भीतर ट्रेन में सफर कर रहीं दो गर्भवती महिला यात्रियों की जान बचाई और उनका सुरक्षित प्रसव कराकर ममता की छांव दी।
सफर के दौरान अचानक असहनीय प्रसव पीड़ा से जूझ रही बेबस महिलाओं के लिए इन महिला जवानों ने देवदूत बनकर मोर्चा संभाला। आपात स्थिति में उनकी तत्परता, सूझबूझ और मातृत्व संवेदना की गूंज आज समूचे रेल महकमे से लेकर आम अवाम तक सुनाई दे रही है।
स्टेशन बना प्रसव कक्ष, जीआरपी जवानों ने कराई सुरक्षित डिलीवरी
हालिया घटना 8 अक्टूबर की है। जमुई जिले के डूमरकोला गांव निवासी कुलदीप मांझी अपनी गर्भवती पत्नी अनिता कुमारी के साथ दुर्गा पूजा के अवसर पर आसनसोल-गोंडा एक्सप्रेस से अपने घर लौट रहे थे। ट्रेन जैसे ही झाझा रेलवे स्टेशन पर पहुंची, अनिता को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और वह प्लेटफार्म पर ही कराहने लगीं।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जीआरपी की महिला सिपाही महिमा कुमारी, मधु कुमारी और रेणु कुमारी तुरंत मौके पर पहुंचीं। महिला यात्री की गरिमा और निजता को ध्यान में रखते हुए जवानों ने चादरों का घेरा बनाकर स्टेशन परिसर में ही सुरक्षित प्रसव कराया। नवजात की किलकारी गूंजते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इसके बाद तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस के जरिए जच्चा-बच्चा दोनों को झाझा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया, जहां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
आरपीएफ जवान एकता की सूझबूझ से बची थी संगीता की जान
इससे पूर्व, 7 सितंबर को भी ऐसी ही एक आपात स्थिति में आरपीएफ की महिला जवान एकता कुमारी ने अदम्य संवेदनशीलता का परिचय दिया था। गाड़ी संख्या 17007 अप सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस से संगीता कुमारी हैदराबाद से अपने गृह जिला समस्तीपुर जा रही थीं। झाझा स्टेशन पहुंचते ही उन्हें असहनीय प्रसव पीड़ा होने लगी।
प्लेटफार्म पर मुस्तैद आरपीएफ कांस्टेबल एकता कुमारी ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला। उन्होंने तत्काल स्टेशन प्रबंधक से समन्वय स्थापित कर प्लेटफार्म पर स्ट्रेचर और स्टेशन के बाहर एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। एकता की व्यक्तिगत देखरेख में प्रसूता को बिना देरी किए झाझा के स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका सुरक्षित प्रसव संपन्न हुआ।
खाकी में ममता का रूप, हर कोई कर रहा सलाम
संकट के क्षणों में त्वरित निर्णय और मानवीय संवेदना का परिचय देने वाली आरपीएफ की एकता कुमारी तथा रेल पुलिस (जीआरपी) की रेणु, मधु और महिमा कुमारी की चारों तरफ सराहना हो रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इन महिला सिपाहियों ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस का काम केवल गश्त लगाना या चालान काटना नहीं है, बल्कि संकट में फंसे नागरिकों के लिए सबसे पहले मददगार बनना भी है। नवरात्र के दिनों में महिला जवानों की यह मानवीय भूमिका नारी सशक्तीकरण का सच्चा और जीवंत संदेश दे रही है।
