जमुई के 22 एकड़ के रेलवे तालाब में होगी मोती की खेती; 50 हजार सीप का लक्ष्य, किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
Jamui Pearl Farming: जमुई के झाझा प्रखंड में 22 एकड़ के रेलवे तालाब में व्यावसायिक स्तर पर मोती उत्पादन की ...और पढ़ें

Jamui Pearl Farming: झाझा के 22 एकड़ रेलवे तालाब में होगी मोती की खेती
HighLights
जमुई के 22 एकड़ रेलवे तालाब में मोती उत्पादन शुरू।
पहले चरण में 50,000 मोतियों के पालन का लक्ष्य।
किसानों को वैज्ञानिक मोती पालन का विशेष प्रशिक्षण मिला।
संवाद सूत्र, बोड़वा (जमुई)। Jamui Pearl Farming: पारंपरिक खेती में मौसम की मार और घटते मुनाफे से जूझ रहे किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए जमुई जिले में एक अभिनव प्रयोग की नींव रखी गई है। झाझा प्रखंड स्थित लगभग 22 एकड़ में फैले ऐतिहासिक रेलवे तालाब में अब मत्स्य पालन के साथ-साथ व्यावसायिक स्तर पर मोती उत्पादन (पर्ल फार्मिंग) की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत पहले चरण में करीब 50 हजार मोतियों के पालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यदि यह नवाचार धरातल पर सफल रहता है, तो कोसी-सीमांचल और अंग प्रदेश के किसानों के लिए यह स्वरोजगार का एक बड़ा मॉडल साबित होगा।
इसी क्रम में शनिवार को रेलवे तालाब परिसर में एक दिवसीय विशेष तकनीकी प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बक्सर से पधारे मोती पालन विशेषज्ञ धनंजय कुशवाहा ने स्थानीय प्रगतिशील किसानों को सीपों में मोती तैयार करने की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू कराया।
पानी की गुणवत्ता और सीपों की देखभाल सबसे अहम
प्रशिक्षक धनंजय कुशवाहा ने किसानों को बताया कि मीठे पानी में सीपों के जरिए डिजाइनर और गोल मोतियों का उत्पादन बेहद लाभकारी व्यवसाय है। उन्होंने सीपों के चयन, उनमें न्यूक्लियस प्रत्यारोपण (सर्जरी), दवाइयों के प्रयोग, उनके संतुलित आहार और तालाब के अनुकूल तापमान व पारिस्थितिकी तंत्र की विस्तृत जानकारी दी।
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विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि मोती पालन में पानी की रासायनिक गुणवत्ता (pH मान, घुलित ऑक्सीजन आदि) की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परियोजना की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए झाझा, लक्ष्मीपुर और बोड़वा के जलस्रोतों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच भी कराई गई है, जिसके परिणाम अनुकूल पाए गए हैं।
तालाब की सफाई मुकम्मल
परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर 22 एकड़ वाले रेलवे तालाब की गाद और जलकुंभी की सफाई का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। अब इसके जल प्रबंधन को वैज्ञानिक मानकों के अनुसार ढालने पर काम चल रहा है, ताकि एक ही जलक्षेत्र में मछली और सीप दोनों का बेहतर सह-अस्तित्व बन सके।
सरकारी योजनाओं का लिया जाएगा सहारा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल तालाब के संवेदक सह जिला परिषद प्रतिनिधि राकेश कुमार सिंह ने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में अतिरिक्त आय का साधन देना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए जिला प्रशासन, मत्स्य पालन विभाग तथा केंद्र व राज्य सरकार की संबद्ध सब्सिडी योजनाओं का सहयोग लेने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और समुचित प्रबंधन से यह तालाब राज्य में मोती पालन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। कार्यक्रम में बोड़वा के किसान सिकंदर साव, लक्ष्मीपुर के चंदन दास, साजन चौधरी, वरुण शर्मा सहित कई किसान उपस्थित रहे।
