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चींटियों ने दिखाया था सोने का खजाना! जमुई के बेचिरागी गांव करमटिया की जमीन उगल रही सोना, जानें 8 किमी दायरे का रहस्य

Published: Sat, 31 Oct 2026 01:59 PM (GMT+05:30)

Jamui Gold Reserve Karmatia: जमुई के सोनो प्रखंड स्थित करमटिया गांव में सोने का विशाल भंडार मिला है, जिसकी खोज ...और पढ़ें

Jamui Gold Reserve Karmatia: जमुई में बरगद के नीचे मिट्टी से चमका था सोना

Jamui Gold Reserve Karmatia: जमुई में बरगद के नीचे मिट्टी से चमका था सोना

HighLights

  1. जमुई के करमटिया गांव में मिला सोने का विशाल भंडार।

  2. चींटियों ने बरगद के पेड़ के पास सोना बाहर निकाला था।

  3. यह खजाना लगभग आठ किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

डि‍ज‍िटल डेस्‍क, जमुई। Jamui Gold Reserve Karmatia:  भगवान महावीर की पावन धरा जमुई का सोनो इलाका इन दिनों देश भर में चर्चा के केंद्र में है। लेकिन जिस करमटिया मौजे के गर्भ में यह सुनहरी दौलत दफन है, उसका अपना एक बेहद अनूठा और दिलचस्प भूगोल व इतिहास है।

सोनो प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर और जमुई जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित करमटिया वास्तव में एक 'बेचिरागी' गांव है। यानी सरकारी राजस्व अभिलेखों में यह एक ऐसा मौजा है, जहां कोई आबादी नहीं बसती। इस पूरे मौजे की जमीन पर मालिकाना हक पड़ोस के चुरहैत गांव के बाशिंदों का है।

चुरहैत पंचायत के मुखिया गेना मांझी गर्व से कहते हैं कि जमीन में दफन इस खजाने ने आज सोनो प्रखंड के नाम की ऐतिहासिक प्रासंगिकता को सच साबित कर दिया है। अब पूरे अंचल को उस घड़ी का इंतजार है जब सरकारी स्तर पर खनन की प्रक्रिया जमीन पर उतरेगी।

Jamui Gold Mine Bihar 44 Percent Gold Reserves Await Mining (4)

जब चींटियों की बांबी से चमकी थी पीली धातु

करमटिया में सोने की मौजूदगी का पता चलने की कहानी किसी लोककथा जैसी रोमांचक है। बुजुर्गों के मुताबिक, दशकों पहले यहां एक विशाल बरगद का पेड़ हुआ करता था, जिसकी घनी छांव में चरवाहे दोपहर की धूप से बचने के लिए सुस्ताते थे।

उसी पेड़ की जड़ों के पास चींटियां अपनी बांबी (घरौंदा) बना रही थीं। जमीन के भीतर से चींटियों द्वारा बाहर निकाली गई मिट्टी के ढेर में कुछ पीली चमकती हुई कड़ियां और कण दिखाई दिए।

करमटिया मौजा और लोककथाएं

  • भौगोलिक स्थिति: सोनो प्रखंड मुख्यालय से 8 किमी और जमुई मुख्यालय से 35 किमी दूर

  • गांव की आबादी: बेचिरागी (राजस्व रिकॉर्ड में शून्य आबादी वाला मौजा)

  • जमीन का मालिकाना हक: पड़ोसी गांव चुरहैत के ग्रामीणों के पास

  • भंडार का फैलाव (8 किमी का दायरा): करमटिया, घुटवे, घोटारी, जुगड़ी, मड़रो और अमेठियाडीह

  • प्रथम संकेत: बरगद पेड़ के नीचे चींटियों के बांबी/घरौंदे की मिट्टी में मिले सुनहरे कण

  • जुड़ी किंवदंतियां: महाभारत कालीन अंगराज कर्ण की दान परंपरा और डुमरी गांव स्थित कंचनेश्वर महादेव मंदिर

  • स्थानीय नेतृत्व की राय: मुखिया गेना मांझी के अनुसार, अब सोनो प्रखंड के नाम की सार्थकता सिद्ध हुई है

चरवाहों और स्थानीय ग्रामीणों ने जब उस चमकती धूल को देखा, तो उत्सुकतावश उसे उठाया। धीरे-धीरे यह बात जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई कि करमटिया की माटी में सोना है। इसके बाद वर्षों तक स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं तैरती रहीं और कहा जाने लगा कि कई लोग उस दौर में रातों-रात संपन्न हो गए।

8 किलोमीटर के दायरे में फैला है खजाना

जमुई में सोने की मौजूदगी केवल करमटिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार लगभग आठ किलोमीटर के विशाल परिक्षेत्र में है। भूवैज्ञानिक अध्ययनों के क्रम में जीएसआई की टीम ने जिन क्षेत्रों को चिह्नित कर सतह और गहराई के नमूने जुटाए थे, उनमें प्रमुख रूप से घुटवे, घोटारी, जुगड़ी, मड़रो और अमेठियाडीह के इलाके शामिल हैं।

Jamui Gold Mine Bihar 44 Percent Gold Reserves Await Mining (5)

5 इलाकों से लिए गए थे सैंपल

इन सभी इलाकों की भू-संरचना का सूक्ष्म विश्लेषण करने के बाद ही वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे थे कि इस समूचे क्षेत्र के गर्भ में सुनहरी धातु का एक निरंतर नेटवर्क मौजूद है।

दानवीर कर्ण और कंचनेश्वर मंदिर से जुड़ती हैं किंवदंतियां

जमुई और आसपास के अंचलों में सोने को लेकर कई पौराणिक और ऐतिहासिक किस्से भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुने जाते हैं। स्थानीय लोग इस अकूत संपदा का संबंध महाभारत काल के अंग देश के राजा दानवीर कर्ण से जोड़ते हैं, जो प्रतिदिन सवा मन सोना दान किया करते थे।

वहीं, करमटिया से महज तीन किलोमीटर दूर डुमरी गांव में अवस्थित प्राचीन 'कंचनेश्वर मंदिर' को लेकर भी मान्यता है कि इसका नामकरण कंचन (सोना) के इसी प्रभाव के कारण हुआ था। हालांकि, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के पास इन लोकमान्यताओं का कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण नहीं है।

बहरहाल, किंवदंतियों के इस दौर से निकलकर अब जब विज्ञान और सरकार दोनों ने इस खजाने की मौजूदगी पर मुहर लगा दी है, तो ग्रामीणों की निगाहें नीतिगत फैसलों और खनन के अगले कदमों पर टिकी हैं।

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