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आंध्र में खुली गोल्ड माइन, अब जमुई के 'सोनमटिया' की बारी! जमीन के गर्भ में 222 मिलियन टन स्वर्ण भंडार; कब होगा खनन?

Published: Sat, 31 Oct 2026 01:25 PM (IST)

Jamui Gold Reserve Karmatia: बिहार के जमुई जिले में देश का 44% स्वर्ण भंडार (लगभग 222.88 मिलियन टन) मौजूद है, ...और पढ़ें

Jamui Gold Reserve Karmatia: जमुई के सोनो प्रखंड स्थित करमटिया (सोनमटिया) की पहाड़ियों का विहंगम दृश्य

Jamui Gold Reserve Karmatia: जमुई के सोनो प्रखंड स्थित करमटिया (सोनमटिया) की पहाड़ियों का विहंगम दृश्य

HighLights

  1. जमुई में देश का 44% स्वर्ण भंडार मौजूद है।

  2. 222.88 मिलियन टन स्वर्ण धातु युक्त अयस्क दफन।

  3. आंध्र प्रदेश की तर्ज पर जमुई में खनन की उम्मीद।

ड‍िजि‍टल डेस्‍क, जमुई। Jamui Gold Reserve Karmatia: जिन दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों में कभी नक्सलियों की बंदूकों से बारूद की गंध निकलती थी और लाल गलियारे का खौफ पसरा रहता था, आज वही धरती देश की सबसे कीमती धातु यानी सोना उगलने को तैयार है। बात हो रही है बिहार के सीमावर्ती जमुई जिले की, जिसके गर्भ में इतना सोना दफन है कि यह न सिर्फ बिहार की आर्थिकी की तस्वीर बदल सकता है, बल्कि पूरे भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और केंद्रीय खनन मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, जमुई में लगभग 222.88 मिलियन टन स्वर्ण धातु युक्त भंडार मौजूद है, जिसमें 37.6 टन शुद्ध धातुयुक्त अयस्क शामिल है। यह आंकड़ा पूरे देश के कुल प्रमाणित स्वर्ण भंडार का करीब 44 प्रतिशत बैठता है। हालांकि, लाल गलियारे की इस सुनहरी हकीकत को पूरी तरह स्वीकारने और संसद के पटल तक पहुंचने में व्यवस्था को चार दशक का लंबा वक्त लग गया।

करमटिया कैसे बन गया 'सोनमटिया', 42 साल की दास्तान

जमुई जिले के सोनो प्रखंड अंतर्गत करमटिया गांव का नाम अब स्थानीय लोग गर्व से 'सोनमटिया' लेने लगे हैं। यहां सोने की खोज की कहानी 42 साल पुरानी है। सबसे पहले वर्ष 1982 से 1986 के बीच इस इलाके को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर जीएसआई की टीम ने व्यापक खुदाई की थी। हालांकि, उस दौर की तकनीक और अत्यधिक लागत के अनुपात में पर्याप्त स्वर्ण धातु न मिलने का हवाला देकर काम धीमा कर दिया गया था।

Jamui Gold Mine Bihar 44 Percent Gold Reserves Await Mining (1)

इसके बाद वर्ष 2010-11 में अत्याधुनिक मशीनों से डीप बोरिंग (भू-छेदन) कर जमीन के भीतर से कई मीटर गहराई के सैंपल निकाले गए। इन नमूनों के प्रयोगशाला परीक्षण के बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। आखिरकार वर्ष 2021 में संसद में सांसद डॉ. संजय जायसवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में तत्कालीन केंद्रीय खान मंत्री प्रहलाद जोशी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि देश का 44 फीसदी स्वर्ण भंडार अकेले जमुई के सोनो क्षेत्र में मौजूद है। हालिया वर्षों में जीएसआई ने यहां की ऊपरी सतह के नमूनों का फिर से संग्रह कर तकनीकी आधार को और मजबूत किया है।

आंध्र प्रदेश की 'स्वर्णागिरी' माइन ने जगाई करमटिया में नई अलख

हाल ही में आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले स्थित जोन्नागिरी गांव में देश की पहली बड़ी प्राइवेट गोल्ड माइन में खनन कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है। वहां करीब 13 टन से अधिक सोना प्रमाणित हो चुका है, जिसके 42 टन तक जाने का अनुमान है। उस गांव का नाम अब बदलकर 'स्वर्णागिरी' कर दिया गया है।

कुरनूल में खनन का पहिया घूमते ही जमुई के करमटिया में भी उम्मीदों को नए पंख लग गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि जब आंध्र प्रदेश में निजी निवेश के जरिए सोने का निष्कर्षण संभव हो सकता है, तो फिर 222 मिलियन टन के विशाल भंडार वाले जमुई को 42 वर्षों से केवल फाइलों और सर्वेक्षणों में क्यों उलझा कर रखा गया है? यदि यहां समयबद्ध नीति के तहत खनन शुरू हो, तो स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और पलायन पर स्थायी ब्रेक लग सकेगा।

Jamui Gold Mine Bihar 44 Percent Gold Reserves Await Mining (2)

बाजार से जमीन तक: सराफा के तेवर और रेत से सोना तराशने का हुनर

एक तरफ जहां जमुई की पहाड़ियों में अरबों रुपये का सोना दफन है, वहीं खुदरा सराफा बाजार में भी पीली धातु ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। जमुई के स्थानीय आभूषण बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत ₹1,43,990 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर बनी हुई है (बीते सत्र के ₹1,44,010 के मुकाबले मामूली ₹20 की नरमी)। वहीं, जेवराती 22 कैरेट सोना ₹1,31,990, 18 कैरेट ₹1,07,992 और 14 कैरेट ₹83,994 प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है।

रोचक पहलू: आरा के गुदरी बाजार की नालियों में 'सोने' की तलाश

बिहार में सोने से जुड़ा एक अनोखा और हैरतअंगेज पहलू भोजपुर (आरा) के प्रसिद्ध गुदरी बाजार और जगजीवन मार्केट में देखने को मिलता है। आभूषण निर्माण, बारीक कटाई, घिसाई और नक्काशी के दौरान उड़ने वाले स्वर्ण कण कार्यशालाओं के फर्श, धूल और पानी के साथ बहकर आसपास की नालियों में चले जाते हैं।

इस बेकार समझी जाने वाली गाद (कीचड़) में भी कीमती धातु के सूक्ष्म अंश छिपे होते हैं। इसी संभावना ने आरा में 'न्यारिया' समाज के लोगों के लिए आजीविका का एक अलग कारोबार खड़ा कर दिया है। ये कारीगर सुबह-सवेरे नालियों की गाद निकालकर, उसे विशेष रासायनिक प्रक्रियाओं और भट्ठियों में धोकर व तपाकर सोने के सूक्ष्म कण अलग करते हैं। एक तरफ जहां तकनीक जमुई के गर्भ से 44% सोना निकालने का इंतजार कर रही है, वहीं पारंपरिक हुनर नालियों के कचरे से भी धातु का कतरा-कतरा बटोर रहा है।

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