जमुई की गिद्धेश्वर पहाड़ियों में खुलेगा पर्यटन का नया द्वार! DM-DFO ने परखी संभावनाएं, एक माह में बनेगा मास्टर प्लान
जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ियों और परासी पठार को राज्य के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर लाने की ...और पढ़ें
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गिद्धेश्वर की पहाड़ियों व परासी पठार पर अधिकारियों संग पर्यटन संभावनाओं का जायजा लेते डीएम।
HighLights
गिद्धेश्वर पहाड़ियों और परासी पठार को पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी।
इको-टूरिज्म, ट्रेकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स के विकास का मास्टर प्लान बनेगा।
उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर एक माह में प्रस्ताव तैयार होगा, रोजगार के अवसर।
संवाद सहयोगी, जमुई। जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत गिद्धेश्वर की मनोरम पहाड़ियों और परासी पठार को राज्य के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है।
प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और रोमांचकारी पर्यटन (Adventure Tourism) की असीम संभावनाओं को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है।
जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ियों एवं परासी पठार का जिला अधिकारी (डीएम), डीएफओ तेजस जायसवाल और डीडीसी शिप्रा विजय कुमार चौधरी ने किया संयुक्त स्थलीय निरीक्षण
प्राकृतिक सुंदरता, जलस्रोतों और धार्मिक महत्व से समृद्ध गिद्धेश्वर में इको-टूरिज्म, ट्रेकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स व व्यू-प्वाइंट्स विकसित करने की योजना
उपमुख्यमंत्री (तथा प्रभारी मंत्री) के निर्देश के बाद एक माह के भीतर विकास प्रस्ताव (मास्टर प्लान) तैयार कर राज्य सरकार को भेजने की कवायद तेज
पर्यटन सर्किट के विकास से स्थानीय लोगों और युवाओं के लिए रोजगार व आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद
इसी सिलसिले में गुरुवार की शाम जिला अधिकारी (डीएम) ने वन प्रमंडल अधिकारी (डीएफओ) तेजस जायसवाल और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शिप्रा विजय कुमार चौधरी सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ गिद्धेश्वर क्षेत्र और परासी पठार का विस्तृत स्थलीय
भ्रमण कर विकास की जमीनी रूपरेखा तैयार की। गिद्धेश्वर की पहाड़ियां अपनी हरियाली, जलस्रोतों और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं।
इको-टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा; विकसित होगा समन्वित पर्यटन सर्किट
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की टीम ने गिद्धेश्वर और परासी पठार की प्राकृतिक संरचना, पहाड़ी भू-दृश्य और जैव विविधता का बारीकी से अवलोकन किया। क्षेत्र में इको-टूरिज्म के साथ-साथ युवाओं और पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, सफारी, व्यू-प्वाइंट्स और नेचर वॉक जैसी रोमांचक गतिविधियों को विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया।

पर्यटकों की सुगमता के लिए बेहतर पहुंच मार्ग (सड़कें), पेयजल, विश्राम गृह, सूचना केंद्र और सुरक्षा व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का खाका खींचा जा रहा है ताकि प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़कर एक एकीकृत पर्यटन सर्किट का निर्माण किया जा सके।
उप-मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक्शन; स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
यह प्रशासनिक तत्परता उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया चकाई/जमुई भ्रमण के दौरान दिए गए निर्देशों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने एक महीने के भीतर गिद्धेश्वर क्षेत्र के विकास का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर विभागीय स्वीकृति के लिए भेजने को कहा था।
इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को बरकरार रखते हुए पर्यटन का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि गिद्धेश्वर के प्रमुख पर्यटन केंद्र बनने से स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष अवसर पैदा होंगे।
"गिद्धेश्वर की पहाड़ियां और परासी पठार इको-टूरिज्म व एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। उपमुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एक माह के भीतर पर्यटन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं को शामिल करते हुए मास्टर प्लान तैयार कर सरकार को भेजा जा रहा है। इससे क्षेत्र में पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार के बड़े अवसर बनेंगे।"
