जमुई में बालू माफिया ने छीनी उलाई नदी की खूबसूरती, कीचड़ और गंदगी के बीच कैसे अर्घ्य देंगे व्रती ?
गिद्धौर में लोक आस्था के महापर्व छठ के लिए उलाई नदी के घाट बालू माफियाओं के अवैध खनन से बदहाल हो गए हैं।

नदियों का सीना हुआ छलनी। फोटो जागरण
HighLights
गिद्धौर में छठ घाटों की सफाई नहीं, बदहाल स्थिति।
अवैध बालू खनन से उलाई नदी कीचड़ और गंदगी से भरी।
प्रशासन की निष्क्रियता से छठ व्रतियों को होगी परेशानी।
संवाद सहयोगी, जमुई। लोक आस्था के महापर्व छठ की दस्तक के साथ ही घाटों की सफाई और व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज हो जानी चाहिए थीं, लेकिन गिद्धौर में तस्वीर इसके ठीक उलट है। कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचानी जाने वाली उलाई नदी आज बेतरतीब बालू उठाव की चोट से बदहाल है।
नदी की तलहटी में कंकड़, मिट्टी और कीचड़ का साम्राज्य है, जबकि जगह-जगह गड्ढों में जमा गंदा पानी और दुर्गंध छठ व्रतियों की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है।
बुधवार दोपहर दैनिक जागरण की पड़ताल में हनुमान घाट, दुर्गा मंदिर घाट और कलाली घाट की बदहाली सामने आई। पर्व में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन घाटों की सफाई का कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आया। पंचायतों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर छठ के दिन श्रद्धालु गंदगी और कीचड़ के बीच सुरक्षित तरीके से अर्घ्य कैसे देंगे? बालू खनन से बिगड़ा नदी का प्राकृतिक स्वरूप और जिम्मेदारों की सुस्ती अब आस्था के महापर्व पर भारी पड़ती दिख रही है।
बालू सौदागरों ने नदियों के अस्मिता पर किया प्रहार
पर्यावरणविद् विवेक कुमार बताते हैं कि कटाव और खोदाई से जमुई जिले के नदियों का प्राकृतिक स्वरूप व संतुलन बिगड़ा है। नदी की तलहटी तक बेजान हो रही है। इसका असर छठ घाटों पर भी दिखेगा।
वहीं, स्थानीय लोगों का मानना है कि कुछ महीने पूर्व ही मानक को ताक पर रखकर बालू खनन की गई। धरना-प्रदर्शन के बावजूद स्थिति यथावत रही। यह बालू सौदागरों के सितम का ही प्रतिफल है कि आज नदियों के अस्मिता पर प्रहार हो रहा है।
गिद्धौर में एक्सवेटर मशीन और ट्रैक्टर से नदियों से बालू उठाकर नदियों की कोख सूनी कर दी गई है, जिससे छठ घाट का नजारा इस बार बेरंग दिखेगा। इस संदर्भ में फिलहाल प्रखंड प्रशासन भी अभी तक अपनी कुंभकर्णी निंद्रा से नहीं जागी है।
