विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Pitru Paksha: गयासुर के सिर पर क्यों किया जाता है पिंडदान? पितृपक्ष के 10वें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Published: Tue, 06 Oct 2026 12:46 PM (IST)

पितृपक्ष के दसवें दिन गयाजी में गयाकूप और गयासिर वेदी पर पिंडदानियों ने भूतबाधा व पितृदोष से मुक्ति के लिए पिंडदान किया।

गयासिर में पिंडदान करते श्रद्धालु। फोटो जागरण

गयासिर में पिंडदान करते श्रद्धालु। फोटो जागरण

HighLights

  1. पितृपक्ष के दसवें दिन गयाकूप और गयासिर पर पिंडदान।

  2. भूतबाधा और पितृदोष से मुक्ति हेतु किया गया कर्मकांड।

  3. गयासुर के सिर पर पिंडदान से मोक्ष की है मान्यता।

जागरण संवाददाता, गयाजी। धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी गयाजी को ज्ञान और मोक्ष की भूमि कहा जाता है। पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर पितृपक्ष में देश-विदेश से पिंडदानी यहां पहुंचकर विभिन्न पिंडवेदियों पर कर्मकांड करते हैं।

इसी क्रम में सोमवार को पितृपक्ष के दसवें दिन गयाकूप और गयासिर वेदी पर पिंडदानियों ने भूतबाधा, प्रेतबाधा एवं पितृदोष से मुक्ति की कामना को लेकर विधि-विधान से पिंडदान किया।

मंगलवार को मुण्डपृष्ठ, आदि गया एवं धौतपद वेदी पर कर्मकांड किया जाएगा। सुबह से ही दोनों पिंडवेदियों पर पिंडदानियों की भीड़ उमड़ पड़ी।

वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान से पूरा पिंडवेदी क्षेत्र भक्तिमय बना रहा। सात, 11, 15 एवं 17 दिनों का कर्मकांड करने वाले पिंडदानियों की संख्या अधिक देखी गई।

गयाकूप वेदी पर पिंडदानी नारियल साथ लेकर पहुंचे और कर्मकांड की विधि पूरी करने के बाद उसे गयाकूप में अर्पित किया। मान्यता है कि यहां कर्मकांड करने से अकाल मृत्यु एवं प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है।

गयासिर वेदी पर भी बड़ी संख्या में पिंडदानियों ने कर्मकांड किया। विधि पूरी करने के बाद पिंड को गयासुर के सिर पर अर्पित किया गया। भीड़ अधिक होने के कारण कई पिंडदानियों को वेदी के बाहर खुले मैदान में बैठकर कर्मकांड करना पड़ा।

दोनों स्थानों पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान का सिलसिला जारी रहा। उत्तर प्रदेश से आए संतोष शुक्ला ने कहा कि गयाजी आकर मन को काफी शांति मिल रही है। ऐसा महसूस हो रहा है कि स्वर्ग में मौजूद पूर्वज हमें कर्मकांड करते हुए देख रहे हैं।

इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है। वहीं ओडिशा से आईं संतोष वर्मा ने बताया कि घर में लंबे समय से अशांति बनी हुई थी।

इसे दूर करने की कामना से दोनों पिंडवेदियों पर कर्मकांड कर रही हूं। विश्वास है कि पितरों के निमित्त किए गए इस कर्मकांड से घर की अशांति दूर होगी।

गयासुर के सिर पर पिंडदान से मोक्ष की मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीहरि विष्णु ने जब गयासुर के सीने पर अपना चरण रखा तो उसका सिर कांपने लगा। इसके बाद भगवान विष्णु ने गयासुर के सिर पर अपनी गदा रखकर उसे शांत किया।

गयासुर के वरदान मांगने पर भगवान विष्णु ने कहा कि उसके सिर पर जिसका पिंडदान किया जाएगा, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी।

इसी मान्यता के कारण गयासिर वेदी पर पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वहीं गयाकूप वेदी पर अकाल मृत्यु एवं प्रेतबाधा से मुक्ति की कामना को लेकर कर्मकांड करने की परंपरा है।

यह भी पढ़ें- Pitru Paksha Gaya Ji: सातीकुंड में बालू से क्यों होता है पिंडदान? 9वें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़