Pitru Paksha: जिनका कोई नहीं, उनका भी तर्पण; गयाजी में अनजाने लोगों का हुआ सामूहिक पिंडदान
मातृ नवमी के अवसर पर गयाजी में फल्गु तट पर बाबू सुरेश नारायण मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा ज्ञात-अज्ञात दिवंगतों के लिए सामूहिक तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान किया गया।

सामूहकि पिंडदान करते संस्था के लोग। फोटो जागरण
HighLights
मातृ नवमी पर गयाजी में सामूहिक तर्पण और पिंडदान हुआ।
अज्ञात दिवंगतों की आत्मा शांति हेतु विशेष अनुष्ठान किया गया।
बाबू सुरेश नारायण मेमोरियल ट्रस्ट ने 26वीं बार यह आयोजन किया।
जागरण संवाददाता, गयाजी। फल्गु की रेत पर रविवार को उन आत्माओं के लिए भी श्रद्धा के हाथ उठे, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं है।
मातृ नवमी के अवसर पर बाबू सुरेश नारायण मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से फल्गु तट पर ज्ञात-अज्ञात दिवंगतों के लिए सामूहिक गयाजी तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान कराया गया।
आतंकवादी घटनाओं, दुर्घटनाओं, प्राकृतिक व मानवीय आपदाओं, महामारी सहित विभिन्न कारणों से असमय दिवंगत हुए लोगों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए रविवार की दोपहर धार्मिक विधि-विधान से अनुष्ठान हुआ।
पिंडदान के बाद फल्गु में पिंड विसर्जित कर भगवान विष्णु और गदाधर से मुक्ति की प्रार्थना की गई। पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण भी किया गया।
जहां रिश्ते खत्म होते हैं, वहां मानवता साथ खड़ी होती है
इस आयोजन की खासियत यही रही कि यहां किसी परिवार के अपने पितर ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी स्मरण किया गया, जिनके लिए शायद कोई तर्पण करने वाला नहीं था।
देश-दुनिया में हुई हिंसक घटनाओं, दुर्घटनाओं और आपदाओं में जान गंवाने वाले ज्ञात-अज्ञात लोगों के निमित्त सामूहिक पिंडदान कर उन्हें श्रद्धा अर्पित की गई।
कार्यक्रम का आचार्यत्व महंत स्वामी जगद्गुरु वेंकटेश प्रपन्नाचार्य और रामानुजमठ, गया के विद्वान आचार्यों ने किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पितृ अनुष्ठान संपन्न हुआ। ऐसे लोग भी अनुष्ठान में स्मरण किए गए, जो किसी कारण गयाजी नहीं पहुंच सके।
2001 में रखी गई थी नींव, अब 26वें वर्ष में परंपरा
ट्रस्ट के कर्ताधर्ता और जदयू के प्रदेश स्तरीय नेता चंदन कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2001 में उनके पिता स्वर्गीय सुरेश नारायण सिंह ने इस परंपरा की शुरुआत की थी।
लगातार आयोजन के साथ इस वर्ष यह परंपरा 26वें वर्ष में पहुंच गई।उन्होंने कहा कि दुख और संवेदना की कोई जाति, धर्म या सीमा नहीं होती।
गयाजी की धरती से पिछले 26 वर्षों से सामूहिक तर्पण के माध्यम से मानवता, प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया जा रहा है।
पितरों की श्रद्धा के साथ विश्व शांति की कामना
चंदन कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा और अशांति की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में दिवंगतों के लिए सामूहिक प्रार्थना मानवता के प्रति संवेदना व्यक्त करने का माध्यम है।
फल्गु तट पर हुआ यह अनुष्ठान पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ आने वाली पीढ़ियों को करुणा और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का संदेश भी देता है।
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