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Pitru Paksha: 16 वेदियों में पिंडदान से विष्णुलोक मिलने की मान्यता, गयाजी की देव परिधि में उमड़ी भीड़

Published: Sun, 04 Oct 2026 09:40 AM (IST)

पितृपक्ष के आठवें दिन गयाजी की देव परिधि में पिंडदानियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां 16 वेदियों पर कर्मकांड कर पितरों के लिए विष्णुलोक की कामना की गई।

वेदियों में पूजा करते श्रद्धालु। फोटो जागरण

वेदियों में पूजा करते श्रद्धालु। फोटो जागरण

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जागरण संवाददाता, गयाजी। धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी गयाजी को मोक्ष की भूमि कहा जाता है। पितृपक्ष में इसका महत्व और बढ़ जाता है।

देश-विदेश से पिंडदानी अपने पितरों की मोक्ष-कामना लेकर गयाजी पहुंचते हैं और यहां स्थित विभिन्न वेदियों पर कर्मकांड कर पितरों के मोक्ष की कामना करते हैं।

पितृपक्ष के आठवें दिन शनिवार को देव परिधि में पिंडदानियों की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही विभिन्न वेदियों पर कर्मकांड का सिलसिला शुरू हो गया।

विष्णलोक की प्राप्ति की मान्यता

देव परिधि में सोलह वेदी के अंतर्गत सूर्यपद, चंद्रपद, गणेशपद, संध्याग्रिपद, कंवपद, मातंगपद, कोंचपद, अगस्त्यपद, दधीचिपद, इंद्रपद एवं कश्यपपद वेदियों पर पिंडदानियों ने विधि-विधान से कर्मकांड किया।

मान्यता है कि इन देव एवं ऋषि पदों पर पिंडदान करने से पितरों को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। कर्मकांड के बाद पिंड विष्णुचरण में अर्पित किए गए। देव परिधि की वेदियां धर्मशिला पर स्तंभ के रूप में स्थित हैं।

कठिनाई में भी विधि विधान से पूजा पूजा 

पिंडदानी कर्मकांड के दौरान पिंडों को वेदी स्तंभ से सटाकर विधि पूरी कर रहे थे। हालांकि, चट्टान ढलाननुमा होने के कारण कई पिंडदानियों को कर्मकांड करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसके बावजूद पितरों के प्रति आस्था और कर्मकांड पूरा करने का उत्साह बना रहा। देव परिधि में 15 और 17 दिनों का कर्मकांड करने वाले पिंडदानियों की संख्या अधिक दिखाई दी। इनमें मारवाड़ी समाज के पिंडदानियों की संख्या भी उल्लेखनीय रही।

पिंडदानी सुबह से ही देव परिधि पहुंचने लगे थे। तर्पण के बाद पुरोहितों के मार्गदर्शन में विभिन्न वेदियों पर कर्मकांड संपन्न कराया गया।

विष्णुपद मंदिर में भी उमड़ी भीड़

वहीं, विष्णुपद मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए पिंडदानियों की लंबी कतार लगी रही। सुरक्षा में तैनात पुलिस बल द्वारा जांच के बाद ही पिंडदानियों को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी।

पिंडदानी अपने साथ जौ का आटा, काला तिल, कुश, दूध, घी, फल सहित अन्य पूजन सामग्री लेकर देव परिधि पहुंचे। पितृपक्ष के कर्मकांड के क्रम में रविवार को पिंडदानी रामगया और सीताकुंड में पिंडदान एवं तर्पण करेंगे।

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