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Bihar: 250 घरों वाले इस गांव में 300 से ज्यादा गायक, गुस्साए हाथी को शास्त्रीय धुन से कंट्रोल करने में महारत

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:23 PM (IST)

बिहार के गया जिले का ईश्वरपुर गांव शास्त्रीय संगीत का गढ़ है, जहां 250 घरों में 300 से अधिक संगीतकार रहते हैं।

संगीत की प्रैक्टिस करते बच्चे। फोटो जागरण

संगीत की प्रैक्टिस करते बच्चे। फोटो जागरण

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संक्षेप में पढ़ें

दिग्विजय सिंह, परैया। गयाजी जिले में टिकारी राज के गुस्साये हांथी को संगीत से नियंत्रित करने की महारत रखने वाले ईश्वरपुर के संगीतज्ञ आज विश्व पटल पर अपनी कला से अमिट छाप छोड़ रहे हैं।

कई सदी से इस गांव के कलाकार शास्त्रीय गायन के चारों पट ध्रुपद, धमाल, ठुमरी और ख्याल को अपनी गायकी से सींच रहे हैं। ईश्वर के गांव से विख्यात ईश्वरपुर में लगभग 250 घर है। जहां तीन सौ से अधिक संगीतकार और गायक शास्त्रीय संगीत की साधना में जुटे हुए हैं।

गांव की सुबह सुरीली धुन से शुरू होती है और शाम उसी पर खत्म होती है। ईश्वरपुर का संगीत घराना सदियों पुराना है। यहां के कलाकारों को ध्रुपद, धमाल, ठुमरी और ख्याल गायन के साथ तबला, हारमोनियम, सितार व तानपुरा बचाने में भी महारत हासिल है।

सालों पुरानी परंपरा बरकरार

तानसेन की संगीत कला से प्रेरित यह गांव आज उनके शास्त्रीय गायन की शैली का निर्वहन कर रहा है। मुगल काल में राजस्थान राजघराने के घटते प्रभाव के बीच इस नए युग का प्रादुर्भाव हुआ था।

जहां टिकारी महाराज ने उनकी कला को सम्मान देते हुए न सिर्फ उन्हे दरबारी गायक बनाया बल्कि ग्यारह सौ एकड़ भूमि भी दान देकर ईश्वरपुर गांव को बसाया। संगीत शिक्षक मनीष कुमार पाठक के अनुसार, उनका तानसेन के गायन शैली व परंपरा से जुड़ाव हैं।

देश के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित 

मनीष पाठक को गर्व है कि उनका जन्म ऐसे जगह हुआ, जहां सितार-ए-हिंद से विख्यात स्व. बलिराम पाठक ने जन्म लिया।जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यह सम्मान दिया था।

संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कृत स्व. कामेश्वर पाठक को शास्त्रीय गायन का बादशाह माना जाता था। वर्तमान में प्रसिद्ध ध्रुपद गायक कृष्ण मोहन पाठक को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार राष्ट्रपति ने प्रदान किया है।

इसके अलावा बलदेव उपाध्याय, तबला वादक स्व मदन मोहन उपाध्याय, प्रसिद्ध पखावज वादक रामजी उपाध्याय, सुदिन पाठक, विख्यात ठुमरी व ख्याल गायक श्रीकांत पाठक, प्रसिद्ध तबला वादक जयमंगल पाठक, विश्व प्रसिद्ध ठुमरी गायक स्व जयराम तिवारी की पहचान पूरे देश में है।

विदेशों तक ईश्वरपुर की धूम 

ईश्वरपुर के पं. अशोक पाठक शास्त्रीय संगीत के माध्यम से आज हालैंड में संगीत की छठा बिखेर रहे हैं, जिनके द्वारा सितार वादन में विशेष मुकाम हासिल किया गया है। इसके अलावा विनय पाठक मुम्बई में रहते हैं, जहां से वे अमेरिका के कई संस्थान में संगीत क्लास लेने जाते हैं।

रवि शंकर उपाध्याय संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली में प्रोफेसर हैं। अब नई पीढी रोजगार को लेकर ज्यादा सचेत है। जहां युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी तरह जुटे हुए।

जिस गांव को विश्व विख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर ने ईश्वर का गांव कहा था। उसकी गलियां धीरे-धीरे सन्नाटे से भरते जा रहे हैं। जिन गलियों में शाम के समय शास्त्री गायन और वाद्य यंत्रों की सुरीली आवाज सुनाई देती थी आज वहां सब शांत है।

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