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Pitru Paksha: गयाजी की धर्मारण्य वेदी में पिंडदान से दूर होता है पितृदोष, महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता  

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:05 PM (IST)

पितृपक्ष की तृतीया तिथि पर गयाजी की धर्मारण्य वेदी पर लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध किया।

पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण। फोटो जागरण

पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण। फोटो जागरण

HighLights

  1. धर्मारण्य वेदी पर पितृपक्ष की तृतीया को 50 हजार श्रद्धालु पहुंचे।

  2. पितृदोष मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति हेतु पिंडदान, तर्पण किया गया।

  3. इस वेदी का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है, विशेष महत्व।

संतोष कुमार, बोधगया। गया जी की 54 प्रमुख वेदियों में शामिल धर्मारण्य वेदी पर मंगलवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पितृपक्ष की तृतीया तिथि पर करीब 50 हजार श्रद्धालु धर्मारण्य वेदी पहुंचे।

सुबह से ही वेदी परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया।

वहीं पंडितों और कर्मकांडी आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे विधि विधान के साथ पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया गया।

तृतीया तिथि में पिंडदान का महत्व

धर्मारण्य वेदी पर तृतीया तिथि के दिन पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है। खासकर मारवाड़ी समाज के लिए इस वेदी पर तृतीया के दिन होने वाला पिंडदान धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मान्यता है कि विधि-विधान से यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है।

महाभारत काल से जुड़ी है इस वेदी का मान्यता

धर्मारण्य वेदी को महाभारत काल से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए धर्मराज युधिष्ठिर ने यहां पिंडदान और यज्ञ किया था।

गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु से जुड़े प्रसंग और युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को यहां यज्ञ कराने की भी मान्यता प्रचलित है।

धर्मारण्य वेदी परिसर में स्थित महाभारत कालीन हवन कुंड भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु पिंडदान के साथ हवन और तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हैं।

पितृदोष से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

धर्मारण्य वेदी पर तृतीया के दिन पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध कराने को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां कर्मकांड करने से पितृदोष, अकाल मृत्यु, दुर्घटना में मृत्यु और प्रेत बाधा जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

संतान प्राप्ति में बाधा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण भी कई लोग यहां विशेष पूजा और त्रिपिंडी श्राद्ध कराते हैं।

इसी आस्था के कारण तृतीया तिथि पर धर्मारण्य वेदी पर दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पंडितों और कर्मकांडी आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया गया।

त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है धर्मारण्य वेदी

धार्मिक परंपरा में धर्मारण्य वेदी को त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय पंडितों के अनुसार, जिन परिवारों में पूर्वजों से संबंधित धार्मिक दोष या अकाल मृत्यु से जुड़ी मान्यता होती है, वे तृतीया के दिन यहां विशेष रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध कराते हैं।

मंगलवार को भी वेदी पर सुबह से देर शाम तक पिंडदान और कर्मकांड का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने फल, फूल, तिल, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री के साथ पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

बोधगया के धर्मारण्य वेदी पर सुरक्षा को लेकर मुस्तैद रहे अधिकारी

पितृपक्ष की तृतीया तिथि पर धर्मारण्य वेदी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंगलवार सुबह से ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मुस्तैद रहे।

एसडीपीओ मधु कुमारी, थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार गुप्ता और बीडीओ अजीत कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने सुरक्षा, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा का जायजा लिया। मेडिकल टीम भी मौके पर तैनात रही।

कार्यपालक पदाधिकारी ने धर्मारण्य, मातंगवापी और सरस्वती मंदिर में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया, जबकि एसडीपीओ ने थाना प्रभारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की।

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