पितृपक्ष में गया के Vishnupad Mandir आए थे भगवान राम, 2 दावों से बना हिंदू और बौद्ध धर्म की आस्था का केंद्र
Vishnupad Temple Gaya सनातन धर्म और बौद्ध धर्म दोनों की आस्था का केंद्र है, जहां भगवान विष्णु और बुद्ध दोनों ...और पढ़ें

Gaya Vishnupad Mandir lord ram Pind Daan history। PHOTO Jagran
HighLights
विष्णुपाद मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों की आस्था का केंद्र।
भगवान राम ने यहीं अपने पूर्वजों का पिंडदान किया था।
मंगला गौरी मंदिर और अक्षयवट भी यहां के पवित्र स्थल।
डिजिटल डेस्क, गयाजी। बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'गया धाम' सनातन धर्म का बहुत ही पवित्र तीर्थस्थल है। प्राचीन मगध संस्कृति का हिस्सा रहा यह ऐतिहासिक नगर पवित्र फल्गु नदी के तट पर बसा हुआ है।
फल्गु नदी के किनारे बसे मनमोहक मंदिर और प्राकृतिक वातावरण यहां के वातावरण को आध्यात्मिक बनाते हैं। इन मंदिरों में से 'विष्णुपाद मंदिर' सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है।
हिंदू और बौद्ध दोनों की आस्था का केंद्र
Gaya Vishnupad Temple में बेसाल्ट (काले चट्टानी पत्थर) की शिला पर भगवान विष्णु के चरण-चिह्न उकेरे गए हैं।
पौराणिक कथाओं (Vishnupad Temple history) के अनुसार, असुरराज गयासुर के बढ़ते अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी गदा से उसकी छाती पर पैर रखकर उसका उद्धार किया था।
वही दिव्य पदचिह्न आज भी इस शिला पर विद्यमान हैं। गर्भगृह में ये पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं।
हिंदू मानते हैं कि विष्णुपाद मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं, जबकि बौद्ध उन्हें भगवान बुद्ध के पदचिह्न मानते हैं।
बौद्धों का मानना है कि इसी पावन भूमि पर महात्मा बुद्ध ने लगभग 1000 अग्नि-उपासकों को 'अदित्तपरीय सूत्र' (अग्नि उपदेश) दिया था, जिसके प्रभाव से वे सभी उनके शिष्य बन गए और बौद्ध धर्म अपना लिया। इस प्रकार ये मंदिर दोनों ही धर्मों की आस्था का केंद्र है।
श्रीराम ने किया था पिंडदान
हिंदुओं की मानना है कि यहां किया गया श्राद्ध और पिंडदान पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्रदान करता है। उनके मुताबिक, त्रेतायुग में स्वयं भगवान श्री राम अपने पिता महाराजा दशरथ और पूर्वजों का पिंडदान (Lord Ram pind daan in Gaya) किया था।
किंवदंती के अनुसार, भगवान राम अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गया जी आए थे और सीता उनके साथ यात्रा पर गई थीं।
सती के स्तनों की पूजा
फल्गु नदी के किनारे स्थित अक्षयवट नामक पीपल का वृक्ष हिंदुओं के लिए पवित्र माना जाता है। इस वृक्ष की दिव्यता के कारण इसकी पूजा की जाती है।
यहां मंगला गौरी का भी मंदिर है, जिन्हें भगवान शिव की पहली पत्नी माना जाता है। सती के स्तनों का प्रतीक माने जाने वाले दो गोलाकार पत्थरों को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और इसकी पूजा होती है।
प्रकृति की गोद में बसा सुंदर स्थान
गयाजी प्रकृति की गोद में बसा एक प्राचीन औऱ पवित्र स्थान है। इसे मंगला-गौरी, श्रृंग-स्थान, राम-शिला और ब्रह्मयोनि पहाड़ियां तीन ओर से घेरे हुए हैं, जिससे यह एक सुरक्षित और सुंदर स्थान बन जाता है।
गया जी न केवल हिंदुओं के लिए बल्कि बौद्धों के लिए भी पवित्र है, क्योंकि यहां कई बौद्ध तीर्थस्थल हैं। फल्गु नदी के किनारे और उन पर स्थित मंदिर सुंदर और आकर्षक हैं।
गया जी एक स्थान है और इसका समृद्ध इतिहास और विरासत है। परिवहन के विभिन्न साधन गया जी को बिहार के अन्य प्रमुख शहरों के साथ-साथ भारत के शेष हिस्सों से जोड़ते हैं।
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