विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

छठ ने बचाई गया की सदियों पुरानी बांस कला की सांस, देश-विदेश तक धूम मचा रहा 'बिहारी सूप और दउरा'

Published: Tue, 03 Nov 2026 11:26 AM (IST)

Soop Daura in Chhath Puja छठ महापर्व गया की सदियों पुरानी बांस कला को हर साल नया जीवन देता है, ...और पढ़ें

80 रुपये का सूप, 400 तक पहुंचता दउरा

80 रुपये का सूप, 400 तक पहुंचता दउरा

HighLights

  1. छठ महापर्व गया की सदियों पुरानी बांस कला को बचाता है।

  2. त्योहार के दौरान कारीगरों को अच्छी आर्थिक मदद मिलती है।

  3. सूप-दउरा की मांग पारंपरिक शिल्प को जीवित रखती है।

डिजिटल डेस्क, गया/पटना। Chhath Puja 2026 गया की सदियों पुरानी बांस कला बदलते समय के साथ भले ही रोजमर्रा की जिंदगी से दूर होती जा रही हो, लेकिन छठ महापर्व इसे हर साल नया जीवन दे देता है। प्लास्टिक और फाइबर के सामानों ने आम दिनों में बांस से बने उत्पादों की मांग कम कर दी है, लेकिन छठ आते ही सूप, दउरा और टोकरी की बिक्री अचानक बढ़ जाती है।

गया के कई गांवों में इन दिनों कारीगर दिन-रात बांस के सामान तैयार करने में जुटे हैं। छठ और शादी के सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले से बड़ी मात्रा में माल तैयार किया जा रहा है। तैयार सामान स्थानीय बाजारों के साथ दूसरे राज्यों तक भी भेजा जा रहा है।

छठ से पहले गांवों में लौट आते हैं कारीगर

Gaya Bamboo Craft बाराचट्टी, शेरघाटी और फतेहपुर क्षेत्र के कई गांवों में बांस से सूप-दउरा बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है।

कई परिवार साल के दूसरे समय में मजदूरी के लिए बाहर चले जाते हैं, लेकिन छठ से डेढ़-दो महीने पहले गांव लौटकर इस पारंपरिक काम में जुट जाते हैं।

बाराचट्टी के हेहेसारी गांव में तुरी समाज के करीब 40 से अधिक घरों में यह काम होता है। पुरुषों के साथ महिलाएं भी बांस काटने, चीरने और सूप-दउरा बुनने में हाथ बंटाती हैं।

दो महीने की मेहनत, डेढ़ लाख तक की कमाई

Bihar Soop Daura कारीगरों के लिए छठ केवल आस्था का पर्व नहीं बल्कि साल की बड़ी कमाई का मौका भी है। एक परिवार को छठ के सीजन में करीब 50 से 70 हजार रुपये तक की आमदनी हो सकती है। वहीं कुछ परिवार दो महीने तक लगातार काम कर डेढ़ लाख रुपये से अधिक कमा लेते हैं।

गांव की सुनीता बताती हैं कि सूप-दउरा बनाने की कमाई से उन्होंने अपना कच्चा घर पक्का कराया और बच्चों की पढ़ाई कराई। उनके लिए यह कला पुश्तैनी परंपरा के साथ परिवार चलाने का जरिया भी है।

एक बांस से तैयार होते हैं दर्जनों सामान

बांस की आपूर्ति झारखंड के ईसरी बगोदर और गिरिडीह जैसे इलाकों से होती है। कारीगरों के अनुसार एक बांस की कीमत करीब 500 रुपये तक पड़ती है। इसे चीरकर अलग-अलग आकार में तैयार किया जाता है और फिर सूप, दउरा तथा टोकरी की बुनाई होती है।

Bihar Soop Daura एक बांस से छोटे आकार के करीब 40 तक सामान तैयार हो सकते हैं। हालांकि यह काम आसान नहीं है। एक कारीगर दिनभर में सामान्य तौर पर तीन-चार सूप से ज्यादा तैयार नहीं कर पाता।

80 रुपये का सूप, 400 तक पहुंचता है दउरा

बाजार में सूप की कीमत आम तौर पर करीब 80 से 150 रुपये और दउरा की कीमत 250 से 400 रुपये तक बताई जा रही है। डिजाइन और रंग वाले सामानों की कीमत इससे अधिक हो सकती है।

शादी-ब्याह के सीजन में रंगीन और डिजाइन वाले सूप-दउरा की मांग बढ़ जाती है। वहीं छठ में पारंपरिक और बिना रंग वाले बांस के सामानों की खास मांग रहती है।

प्लास्टिक ने छीना बाजार, आस्था ने बचाई पहचान

व्यापारी बताते हैं कि करीब एक दशक पहले तक सूप-दउरा की बिक्री सालभर होती थी। अब प्लास्टिक और फाइबर के विकल्पों ने आम दिनों का बाजार काफी कम कर दिया है। इसके बावजूद छठ और लग्न के समय मांग में बड़ा उछाल आता है।

उनके मुताबिक जो परिवार पूरी तरह इस काम पर निर्भर हैं, वे सालभर छठ और शादी के सीजन की तैयारी करते हैं। एक सीजन की अच्छी बिक्री उनके लिए कई महीनों की आर्थिक मदद बन जाती है।

दूसरे देशों में भी पहुंच रहा 'बिहारी सूप-दउरा'

गया में तैयार बांस के सामान सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। थोक व्यापारी इन्हें दूसरे जिलों और राज्यों तक पहुंचाते हैं। खासकर उन शहरों में इनकी मांग रहती है, जहां बिहार से बाहर रहने वाले प्रवासी परिवार बड़ी संख्या में हैं। साथ ही अलग-अलग देशों में भी इसका मांग है।

वहां इन्हें पारंपरिक 'बिहारी सूप' और 'बिहारी दउरा' के नाम से भी पहचान मिलती है। इस तरह छठ ने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को राज्य की सीमा से बाहर तक बाजार उपलब्ध कराया है।

20 गुना तक बढ़ जाती है बिक्री

Chhath Puja 2026 ग्रामीण बाजारों में दुकान लगाने वाले संजीत कुमार बताते हैं कि उन्होंने छठ 2026 की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी। उनके अनुसार आम दिनों की तुलना में छठ के दौरान सूप-दउरा की बिक्री करीब 20 गुना तक बढ़ सकती है।

उनका कहना है कि इस कारोबार की एक खास बात यह भी है कि अगर छठ के बाद कुछ माल बच जाता है तो उसे बाद में भी बेचा जा सकता है। इसलिए व्यापारी पहले से बड़ी मात्रा में स्टॉक तैयार कर रहे हैं।

एक हजार से ज्यादा परिवार जुड़े होने का दावा

बाराचट्टी विधायक ज्योति देवी के अनुसार क्षेत्र में एक हजार से अधिक परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बांस से जुड़े काम में लगे हो सकते हैं। उनके फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाता है।

उनके मुताबिक आम दिनों में मांग कम जरूर हुई है, लेकिन छठ और शादी के सीजन में बांस के सामानों की बिक्री अभी भी बनी हुई है। कई गांवों में सूप-दउरा के अलावा बांस से दूसरे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं।

पिछले साल 1.5 करोड़ का कारोबार, इस बार मलमास का असर

Gaya Bamboo Craft Bihar Soop Daura Demand Increases व्यापारी के अनुसार पिछले साल गया जिले में सूप-दउरा और बांस से बने दूसरे सामानों का अनुमानित कारोबार करीब 1.5 करोड़ रुपये रहा था। इस बार मलमास के कारण बिक्री पर कुछ असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मलमास में नए लोगों द्वारा छठ पूजा शुरू नहीं की जाती। हालांकि पहले से छठ करने वाले परिवारों की खरीदारी जारी है और बाजारों में सूप-दउरा की तैयारी तेजी से चल रही है।

बाजार से ज्यादा आस्था से जुड़ा है सूप-दउरा

खरीदार अनामिका बताती हैं कि बाजार में प्लास्टिक के विकल्प आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन बांस के सामान प्राकृतिक होने के साथ परंपरा से जुड़े हैं। यही वजह है कि धार्मिक आयोजन और पारिवारिक कार्यक्रमों में लोग इन्हें प्राथमिकता देते हैं।

सोमी कुमारी भी बताती हैं कि उन्होंने बचपन से छठ में बांस के सूप और दउरा का इस्तेमाल होते देखा है। उनके लिए यह सिर्फ पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि परिवार और परंपरा से जुड़ी पहचान है।

छठ के सहारे जिंदा है सदियों पुरानी कला

गया की बांस कला के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती रोजमर्रा के बाजार का खत्म होना है। लेकिन छठ महापर्व ने इस पारंपरिक हुनर के लिए हर साल एक बड़ा बाजार बचा रखा है।

आस्था, परंपरा और रोजगार के इस मेल ने हजारों कारीगर परिवारों को बांस से जुड़े रहने की वजह दी है। यही कारण है कि छठ आते ही गया के गांवों में बांस की खड़खड़ाहट और सूप-दउरा की बुनाई फिर तेज हो जाती है।

यह भी पढ़ें- बिहार की 300 साल पुरानी मिठाई के आगे फीकी हैं आजकल की मिठाइयां, त्योहारों में 80 क्विंटल तक की बिक्री

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।