गाइड बांध टूटा तो चंपारण तटबंध पर बढ़ा गंडक का दबाव, बालू की बोरी लेकर उतरे ग्रामीण
गंडक नदी में बढ़ते जलस्तर के कारण अरेराज प्रखंड की सरेया पंचायत में मनरेगा से बना गाइड बांध टूट गया, ...और पढ़ें

बाढ़ से बचाव के लिए कार्य जारी है।
HighLights
अरेराज में मनरेगा से बना गाइड बांध गंडक के दबाव से टूटा।
चंपारण तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ा, ग्रामीण बचाव में जुटे।
एसएच-74 पर डेढ़ किमी तक पानी, आवागमन हुआ बाधित।
संवाद सहयोगी,अरेराज (पूर्वी चंपारण)। गंडक के बढ़ते जलस्तर और पानी के तेज दबाव के बीच अरेराज प्रखंड की सरेया पंचायत में मनरेगा से बना गाइड बांध मंगलवार की सुबह अचानक टूट गया।
बांध टूटते ही पानी का बहाव आसपास के निचले इलाकों की ओर तेजी से बढ़ गया और पड़ोसी मिश्रवलिया पंचायत के कुछ हिस्सों में पानी प्रवेश कर गया।
इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। गाइड बांध टूटने का असर चंपारण तटबंध पर भी पड़ा है। नगदाहां पंचायत के सखवा ढाला के पास तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ने के बाद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां ग्रामीण खुद बालू भरे बोरे लगाकर तटबंध को बचाने में जुटे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गाइड बांध की कमजोर स्थिति और उस पर बढ़ रहे पानी के दबाव की जानकारी पहले से संबंधित विभाग के अभियंताओं को थी। इसके बावजूद समय रहते सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मनरेगा से निर्मित गाइड बांध की सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर जल संसाधन विभाग के स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। जिम्मेदारी और समन्वय के अभाव के बीच पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया और अंतत: मंगलवार सुबह बांध ध्वस्त हो गया।

बांध टूटते ही निचले इलाकों में फैला पानी
गाइड बांध के टूटने के बाद पानी का बहाव तेजी से आसपास के निचले क्षेत्रों में फैलने लगा। मिश्रवलिया पंचायत के कुछ हिस्सों में पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि गंडक के जलस्तर और दबाव में और वृद्धि हुई तो पानी का फैलाव व्यापक हो सकता है। इससे तटबंध के साथ आसपास बसे गांवों पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
सखवा ढाला पर ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
गाइड बांध टूटने के बाद नगदाहां पंचायत के सखवा ढाला के समीप चंपारण तटबंध की स्थिति भी दयनीय बताई जा रही है। पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए ग्रामीण स्वयं बालू भरे बोरे लेकर तटबंध पर पहुंचे और कमजोर हिस्सों को बचाने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय तटबंध की सुरक्षा में थोड़ी भी चूक भारी पड़ सकती है।
सूचना मिलने के बाद अंचलाधिकारी समेत प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और सुरक्षात्मक कार्य शुरू कराया। प्रशासन की टीम पानी के बहाव और तटबंध की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
एसएच-74 पर डेढ़ किमी तक दो फीट पानी
इधर, बाढ़ के पानी का असर आवागमन पर भी पड़ा है। एसएच-74 में वृति टोला से इजरा तक करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी में लगभग दो फीट पानी बह रहा है।
सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के कारण प्रशासन ने इस मार्ग पर वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। इससे आसपास के गांवों के लोगों के आवागमन में परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों की नजर अब चंपारण तटबंध की सुरक्षा पर टिकी है। लोगों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से संवेदनशील स्थलों पर तत्काल सुरक्षात्मक कार्य तेज करने, पानी के बहाव की लगातार निगरानी करने और कमजोर हिस्सों को मजबूत करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गाइड बांध के टूटने के बाद तटबंध पर बढ़ा दबाव किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
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