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पिता की मौत के बाद मां के संघर्ष से रोशनी बनीं SSB कांस्टेबल, अब BPSC का लक्ष्य

Published: Sun, 01 Nov 2026 05:55 AM (IST)

Mother Daughter Struggle Success Story Bihar:पूर्वी चंपारण की रोशनी कुमारी ने पिता के निधन और मां के संघर्षों के बावजूद ...और पढ़ें

पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव की रहने वाली रोशनी कुमारी की सफलता की कहानी यही बात साबित करती है।

पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव की रहने वाली रोशनी कुमारी की सफलता की कहानी यही बात साबित करती है।

HighLights

  1. पिता के निधन के बाद मां ने बेटी को पाला।

  2. रोशनी कुमारी ने सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल बनीं।

  3. अब प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए बीपीएससी की तैयारी।

आदित्य कुमार सिंह, पताही (पूर्वी चंपारण)। SSB Constable Roshni Kumari Success Story: पति की मौत के बाद एक महिला के लिए जवान बेटी के साथ रहना किसी जंग को जीतने जैसा होता है।

उसमें यदि बेटी को पढ़ाकर कुछ बनाने का सपना जुड़ जाए, तो यह बेहद कठिन संकल्प बन जाता है। लेकिन जब इंसान कुछ कर दिखाने की ठान ले तो लक्ष्य तक पहुंचने में परेशानी जरूर आती है पर कोई उसे रोक नहीं सकता।

पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव की रहने वाली रोशनी कुमारी की सफलता की कहानी बिल्कुल यही बात साबित करती है।

विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों को मात देकर रोशनी ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में कांस्टेबल बनकर अपने परिवार और पूरे इलाके का नाम रोशन किया है।

Roshani kumar SSB constable

पिता का सपना और मां का हौसला

रोशनी के मन में बचपन से ही देश सेवा के दीप जलते रहे। मध्यमवर्गीय परिवार की इस बेटी के सिर से वर्ष 2011 में पिता रामजतन सिंह का साया उठ गया था। पिता चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर प्रशासनिक अधिकारी बने।

पति के निधन के बाद मां चंद्रावती देवी के सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने पति की इच्छा और बेटी के सपनों को ही अपना सबसे बड़ा संकल्प बना लिया। मां के इसी अटूट विश्वास और संघर्ष ने रोशनी को हर कदम पर मजबूती दी।

गांव से महाविद्यालय तक का सफर

रोशनी की शुरुआती शिक्षा पताही में ही पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने मोतिहारी के मुंशी सिंह महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

उस दौर में ग्रामीण इलाके से बेटियों को पढ़ाकर शहर भेजना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन मां चंद्रावती देवी ने सामाजिक और पारिवारिक बाधाओं की परवाह किए बिना बेटी की शिक्षा में कोई आंच नहीं आने दी।

वर्ष 2019 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोशनी ने राष्ट्र सेवा में जाने का पक्का इरादा कर लिया।

एसएसबी के बाद बीपीएससी का लक्ष्य

अपनी मेहनत और लगन के बल पर रोशनी ने वर्ष 2020 में सशस्त्र सीमा बल की भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की और एसएसबी में कांस्टेबल के रूप में चुनी गईं। वर्दी पहनने के बाद भी उनका हौसला थाम नहीं है।

अब वह बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा पास कर प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी कर रही हैं। रोशनी का मानना है कि जब इंसान अपने लक्ष्य के लिए संघर्ष करना सीख जाता है, तो सफलता के रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं।

समाज की नजर में बेटियों की उड़ान

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि बेटियां केवल घर की लक्ष्मी ही नहीं, बल्कि परिवार का सौभाग्य और सम्मान होती हैं। दीपावली के इस पावन पर्व पर हर परिवार को बेटियों के नाम पर एक दीपक जरूर जलाना चाहिए, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बेटियां हर मुकाम को हासिल कर सकती हैं।

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