दाखिल-खारिज की फाइलों में फंसी जमीन, पूर्वी चंपारण में 120 दिन से धूल फांक रहीं फाइलें; 7571 केस पेंडिंग
पूर्वी चंपारण जिले में दाखिल-खारिज के 7,571 मामले लंबित हैं, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री और स्वामित्व के दस्तावेज राजस्व अभिलेख में दर्ज कराने में देरी हो रही है।

दाखिल-खारिज में मोतिहारी फिसड्डी तो चकिया-पताही पास, जिले में 7571 मामले अब भी पेंडिंग (AI Generated Image)
HighLights
पूर्वी चंपारण में दाखिल-खारिज के कुल 7,571 मामले लंबित।
मोतिहारी अंचल में सर्वाधिक 1,236 मामले लंबित, निष्पादन दर कम।
रामगढ़वा में 77 मामले 120 दिन से अधिक समय से लंबित।
जागरण संवाददाता, मोतिहारी। जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर विरासत और स्वामित्व के दस्तावेजों को राजस्व अभिलेख में दर्ज कराने के लिए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आम लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन जिले में बड़ी संख्या में मामले अब भी फाइलों में अटके हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आंकड़े प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों के बोझ की तस्वीर सामने रखते हैं। 27 अंचलों में दाखिल कुल 34,460 वादों में 26,889 का निष्पादन हुआ है, जबकि 7,571 वाद अभी लंबित (पेंडिंग) हैं।
सबसे गंभीर स्थिति मोतिहारी अंचल की है। यहां कुल 3,526 वादों में 2,290 का निष्पादन किया गया, लेकिन 1,236 वाद अब भी लंबित हैं।
इनमें 563 मामले 35 दिन से कम, 444 मामले 35 दिन से अधिक, 213 मामले 75 दिन से अधिक और 16 मामले 120 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। मोतिहारी अंचल का कुल निष्पादन प्रतिशत 64.95 है।
रक्सौल-रामगढ़वा भी लंबित मामलों के बोझ में
मोतिहारी के बाद रक्सौल में 757 और रामगढ़वा में 577 वाद लंबित हैं। रक्सौल में 2,737 में से 1,980 और रामगढ़वा में 2,204 में से 1,627 वादों का निष्पादन हुआ है। अडापुर में भी 462 मामले लंबित हैं। बंजरिया में 480, हरसिद्धि में 378 और कोटवा में 326 वाद लंबित हैं।
120 दिन पार करने वाले 167 मामले
लंबित मामलों की उम्र भी तस्वीर को गंभीर बनाती है। जिले में 167 वाद 120 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें रामगढ़वा के 77, मोतिहारी के 16, अडापुर के 14, पहाड़पुर के 2 और अन्य अंचलों के पुराने मामले शामिल हैं। रामगढ़वा में 120 दिन से अधिक पुराने मामलों की संख्या सबसे अधिक 77 है।
चकिया-पताही में बेहतर निष्पादन
वहीं कुछ अंचलों में निष्पादन की तस्वीर बेहतर है। चकिया में 93.93 प्रतिशत और पताही में 93.52 प्रतिशत वादों का निष्पादन दर्ज किया गया है। इसके विपरीत संग्रामपुर में निष्पादन 62.60 प्रतिशत और मोतिहारी में 64.95 प्रतिशत रहा।
आंकड़े बताते हैं कि जिले के अलग-अलग अंचलों में लंबित मामलों और निष्पादन की स्थिति में बड़ा अंतर है।
लंबित मामलों के निष्पादन के लिए संबंधित अंचलाधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है। - मुकेश कुमार सिन्हा, अपर समाहर्ता पूर्वी चंपारण
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