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बिहार की बेटी रोशनी ने SSB में पाई सफलता, अब BPSC परीक्षा से प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना

Published: Sun, 01 Nov 2026 07:00 AM (IST)

पूर्वी चंपारण की रोशनी कुमारी ने विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष कर सशस्त्र सीमा बल (SSB) में कांस्टेबल का पद हासिल ...और पढ़ें

पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव निवासी  रोशनी कुमारी।

पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव निवासी रोशनी कुमारी। 

HighLights

  1. पूर्वी चंपारण की रोशनी ने SSB में कांस्टेबल बनकर देश सेवा की।

  2. अब बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा पास कर अधिकारी बनेंगी।

  3. पिता के प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने का लक्ष्य।

आदित्य कुमार सिंह, पताही (पूर्वी चंपारण) । बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के पदुमकेर गांव निवासी स्व. रामजतन सिंह व चंद्रावती देवी की पुत्री रोशनी कुमारी ने अपने मन को देश सेवा के दीप से रोशन रखा है।

मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी रोशनी ने विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में कांस्टेबल बनकर देश सेवा शुरू की है।

सेवा की पहली सीढ़ी पर खड़े होने के साथ रोशनी ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में सफलता हासिल कर प्रशासनिक अधिकारी बन लोक सेवा करने की तैयारी शुरू की है। गांव की इस बेटी की सफलता के पीछे संघर्ष, त्याग और उनकी मां के अटूट विश्वास की लंबी कहानी है।

पिता की मौत के बाद मां संग किया संघर्ष अब मिली सफलता

रोशनी बचपन से ही कुछ अलग कर अपने पैरों पर खड़ा होने के साथ देश सेवा की इच्छा थी। परिवार की परिस्थितियां विपरीत रहने के बाद भी कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

रोशनी की मां चंद्रावती देवी बताती हैं- पति रामजतन सिंह चाहते थे कि बेटी पढ़-लिखकर प्रशासनिक अधिकारी बने। 2011 में पति का निधन हो गया। परिवार के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गईं।

पति को खोने के दुख संग बेटी के भविष्य और उसके सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी। पति की इच्छा और बेटी के सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प बना लिया। बेटी की पढ़ाई जारी रखी।

आज उनकी बेटी एसएसबी में कांस्टेबल है। विश्वास है कि रोशनी अपनी मेहनत के दम पर आगे चलकर अधिकारी भी बनेगी। रोशनी घर की लक्ष्मी है।

गांव से शुरू हुआ सफर महाविद्यालय तक पहुंचा

रोशनी की प्रारंभिक शिक्षा पताही में हुई। यहां के बाद मोतिहारी स्थित मुंशी सिंह महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह तब पूरा हुआ जब गांव में बच्चियों को पढ़ाना और वहां से शहर भेजना मुश्किल था।

रोशनी की मां चंद्रावती देवी ने सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों की परवाह किए बिना बेटी की शिक्षा जारी रखी। अब वह बीपीएससी की तैयारी कर आगे बढ़ना चाहती है।

स्नातक के बाद एसएसबी में जाने का लिया निर्णय

वर्ष 2019 में स्नातक की परीक्षा पूरी करने के बाद रोशनी ने देश की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में जाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि नौकरी के साथ देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात होगी।

इसी उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2020 में सशस्त्र सीमा बल की भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया। पूरी लगन और मेहनत से तैयारी की और परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके बाद एसएसबी में कांस्टेबल के रूप में उनका चयन हुआ।

वर्दी पहनने के बाद बड़े सपने की राह पर

एसएसबी में कांस्टेबल बनने के बाद रोशनी का लक्ष्य बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होकर सफलता हासिल करना है। वह प्रशासनिक अधिकारी बनकर राज्य और समाज के लिए बेहतर कार्य करना चाहती हैं।

बताती हैं कि जब एक बार इंसान अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए संघर्ष करना सीख जाता है तो उसके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुलते जाते हैं। एसएसबी में सेवा देना गर्व की बात है, लेकिन पिता का प्रशासनिक अधिकारी बनाने का सपना पूरा करना है।

बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर सभी परिवारों को अपने घर में बेटी के नाम से एक दीपक जरूर जलाना चाहिए। इससे बेटियों को भी यह एहसास होगा कि परिवार और समाज में उनका विशेष स्थान है। बेटियां इसी तरह आगे बढ़कर अपने परिवार, गांव और देश का नाम रोशन करती रहें।
- सरोज सिंह, मुखिया प्रतिनिधि

बेटियां केवल घर की लक्ष्मी ही नहीं, बल्कि परिवार का सौभाग्य और सम्मान भी होती हैं। आज शिक्षा, प्रशासन, खेल और सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में बेटियां अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। दीपावली पर उनके सम्मान में एक दीपक जरूर जलना चाहिए। इससे समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और विश्वास का संदेश जाएगा।
- तुलिका कुमारी

मेहनत, अभ्यास और अनुशासन के मामले में बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं। उन्हें सही मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकती हैं। बेटियां अपने परिवार, जिले और पूरे बिहार का नाम रोशन करने की क्षमता रखती हैं। जरूरत है तो बस उन्हें प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ने का अवसर देने की।
- नीरज झा

आज बेटियां किसी से कम नहीं हैं। सफलता हासिल करने के लिए उन्हें बड़े शहर या संपन्न परिवार में जन्म लेने की जरूरत नहीं है। छोटे-छोटे गांवों में भी प्रतिभाशाली बेटियां हैं। यदि उन्हें अच्छी शिक्षा, जरूरी सुविधाएं और परिवार का भरोसा मिले तो वे किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती हैं। बेटियों पर विश्वास करना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना जरूरी है।
- राजा कुमार

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