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दरभंगा की जुगनू ने अभावों को बनाया सफलता की सीढ़ी, बनीं बिहार पुलिस मेजर सर्जेंट

Published: Wed, 04 Nov 2026 02:47 PM (IST)

दरभंगा की जुगनू ने गरीबी और संघर्षों को अपनी ताकत बनाकर बिहार पुलिस में मेजर सर्जेंट का पद हासिल किया। ...और पढ़ें

मेजर सर्जेंट जुगनू। सौजन्य से परिजन।

मेजर सर्जेंट जुगनू। सौजन्य से परिजन।

HighLights

  1. आर्थिक अभावों के बावजूद जुगनू बनीं बिहार पुलिस मेजर सर्जेंट।

  2. मां के त्याग और ननिहाल के सहयोग से मिली सफलता।

  3. संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस बनने का लक्ष्य।

अरुण कुमार राय, कुशेश्वरस्थान (दरभंगा)। घर की माली हालत ऐसी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल था। पिता गणेश चौधरी की मानसिक बीमारी ने परिवार को संकट में डाल दिया।

घर की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। परिवार का पेट पालने के लिए मां ने सिलाई मशीन को अपनी आजीविका का सहारा बनाया। आर्थिक तंगी के इस दौर में बेटी के सपनों को पूरा करना आसान नहीं था।

लेकिन मां ने हालात के आगे हार नहीं मानी और बेटी जुगनू ने भी अभाव को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि संघर्ष की ताकत बनाया। नतीजा यह हुआ कि प्रखंड के हिरणी गांव की जुगनू बिहार पुलिस में मेजर सर्जेंट बन गईं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे गांव की बेटियों के लिए उम्मीद की नई रोशनी जगाई है।

जुगनू की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, परिवार का त्याग और मजबूत इच्छाशक्ति की कहानी छिपी है। समस्तीपुर जिले के सिंघिया गांव स्थित ननिहाल में नाना-नानी के संरक्षण में प्रारंभिक शिक्षा शुरू की।

सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए सिंघिया कालेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। आर्थिक परेशानियां कदम-कदम पर रास्ता रोकती रहीं, लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

नाना-नानी और मामा ने दिया सपनों को सहारा

उच्च लक्ष्य हासिल करने की चाह में जुगनू नाना-नानी और मामा के सहयोग से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पटना चली गईं। सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ स्टेशन मास्टर और एसएससी की परीक्षाओं में भी अपनी किस्मत आजमाई। उन्हें सफलता भी मिली।

लेकिन उनके मन में पुलिस सेवा में जाने की प्रबल इच्छा थी। इसके लिए फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर में दाखिला लिया। लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता की तैयारी में जुट गईं। वर्ष 2022 की दारोगा भर्ती परीक्षा में शामिल हुई।

निरंतर अभ्यास, अनुशासन और मेहनत आखिरकार रंग लाई। बिहार पुलिस में मेजर सर्जेंट के पद पर उनका चयन हुआ। मां का त्याग, ननिहाल का संबल और जुगनू की मेहनत मिलकर सफलता की ऐसी कहानी बन गई, जो समाज के सामने एक प्रेरक उदाहरण है।

वह अपनी सफलता को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि आगे की यात्रा का एक पड़ाव मानती हैं। जुगनू का सपना संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर आइएएस या आइपीएस बनने का है।

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बेटियों की सफलता की पहली सीढ़ी परिवार का विश्वास और सहयोग है। उनकी उड़ान को पंख परिवार देता है और संघर्ष उन्हें मंजिल तक पहुंचाता है। आर्थिक तंगी और सामाजिक बंदिशें भी उस बेटी का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जिसके सपनों के साथ उसका परिवार मजबूती से खड़ा हो। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके सपनों को बेटों के समान महत्व देना अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है।

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— मधुकांत झा मिंटू, सामाजिक कार्यकर्ता।

बेटियां आज शिक्षा, खेलकूद और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उनकी सफलता केवल परिवार का गौरव नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रगति और बदलती सोच का प्रतीक है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर मेजर सर्जेंट बनी जुगनू कुमारी ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के आगे संसाधनों की कमी बाधा नहीं बन सकती। परिवार और समाज का सहयोग मिले तो बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती हैं।

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-- मनोज शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता

बेटियों में प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं होती है। उनके सफलता की राह परिवार के सहयोग और विश्वास शुरू होती है। पढ़ाई हो या खेलकूद, बेटियों को बेटों के समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। बेटियां जब कोई लक्ष्य निर्धारित कर लेती हैं तो उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन और मेहनत से जुट जाती हैं। बेटियों को आगे बढ़ाने के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। बेटियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं।

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-- राखी आनंद, सामाजिक कार्यकर्ता।

बेटियों की सफलता की राह परिवार के विश्वास और सहयोग से ही प्रशस्त होती है। यदि उन्हें अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। पढ़ाई हो या खेलकूद, बेटियों को समान अवसर और सम्मान देना परिवार की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति से भरपूर बेटियां अपने संकल्प को मेहनत और लगन के बल पर मुकाम तक पहुंचाने का दम रखती हैं। इस बदलाव को हर घर तक पहुंचाने की जरूरत है।


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-- सुनीता देवी, मुखिया।

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