दरभंगा में 700 साल पुराना बरगद, आस्था का प्रतीक, जटाओं ने लिख दी अमर होने की दास्तान
Nature Wonder of Darbhanga : दरभंगा के पघारी गांव में एक विशाल बरगद का पेड़ है, जिसे 700-800 साल पुराना ...और पढ़ें

पघारी गांव का प्राचीन बरगद पेड़। जागरण।
संवाद सहयोगी, बहेड़ी (दरभंगा)। Historic Banyan Tree : बिहार में दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड के पघारी गांव में स्थित विशाल बरगद का पेड़ गांव की पहचान, आस्था और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक माना जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार सात से आठ सौ वर्ष पुराना यह वृक्ष कई पीढ़ियों के जीवन, संस्कृति और परंपराओं का साक्षी रहा है। इसकी फैली हुई शाखाएं और जटाएं आज भी गांव के अतीत की कहानी सुनाती हैं।
सदियों से खड़ा है इतिहास का साक्षी
लहेरियासराय-बहेड़ी मुख्य सड़क पर स्थित यह विशाल बरगद वर्षों से गांव की पहचान बना हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि यह वृक्ष मध्यकालीन काल से लेकर आधुनिक समय तक हुए सामाजिक परिवर्तनों का मौन गवाह रहा है। इसकी वास्तविक आयु का पता वैज्ञानिक और पुरातात्विक अध्ययन के बाद ही चल सकेगा।
लोककथाओं में बसती है इसकी कहानी
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जहां आज यह वृक्ष मौजूद है, वहां कभी घना वन क्षेत्र हुआ करता था। प्रचलित मान्यता है कि किसी पुराने कुएं के पास उगा यह पौधा समय के साथ विशाल बरगद में बदल गया। यह कथा आज भी ग्रामीणों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है।
जटाओं से फिर खड़ा हुआ नया संसार
समय के साथ इस बरगद का मूल तना समाप्त हो गया, लेकिन इसकी जटाओं और शाखाओं से नए वृक्ष विकसित होते गए। वर्तमान में यह एक विशाल वृक्ष समूह का रूप ले चुका है, जो प्रकृति की अद्भुत शक्ति और निरंतरता को दर्शाता है।
ब्रह्मस्थान के रूप में है विशेष मान्यता
ग्रामीण इस स्थान को गांव का मूल निवास स्थल और ब्रह्मस्थान मानते हैं। यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है और धार्मिक आयोजनों में भी इस स्थल की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। लोगों की गहरी आस्था इस वृक्ष से जुड़ी हुई है।
वैज्ञानिक जांच और संरक्षण की जरूरत
मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौधरी का कहना है कि रेडियो कार्बन डेटिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इसकी वास्तविक आयु का निर्धारण किया जाना चाहिए। साथ ही इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
पर्यावरण और संस्कृति का अमूल्य प्रतीक
परमानंद चौधरी इस वृक्ष को गांव की आत्मा का प्रतीक मानते हैं। राम भरोस झा के अनुसार यह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की अनमोल धरोहर है।
वहीं राकेश कुमार मंडल और राजन कुमार राम का कहना है कि यह बरगद पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करता रहेगा।
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