मैं इमली का पेड़ नहीं, 175 सालों से दरभंगा की सांसों का रखवाला हूं... क्या बच पाऊंगा?
दरभंगा का 175 साल पुराना इमली का पेड़, जो शहर की पहचान और कई पीढ़ियों का सहारा रहा है, एलिवेटेड ...और पढ़ें

इमली पेड़ के नीचे खड़े लोग।
HighLights
दरभंगा का 175 साल पुराना इमली का पेड़ खतरे में।
एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण के कारण अस्तित्व पर संकट।
स्थानीय लोग और विशेषज्ञ पेड़ बचाने की कर रहे अपील।
संवाद सहयोगी, दरभंगा। दरभंगा के दोनार और अल्लपट्टी चौक के बीच वीआइपी रोड किनारे खड़ा 175 वर्ष पुराना इमली का पेड़ सिर्फ एक वृक्ष नहीं, यह शहर की पहचान बन चुका है।
दशकों से लोग इसे लैंडमार्क के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे 600 वर्ष पुराना गंगासागर तालाब और सामने रिहायशी मोहल्ले हैं। समय के साथ शहर बदला, लेकिन यह पेड़ अपनी जगह अडिग खड़ा रहा।
मेरी छांव में बीती हैं कई पीढ़ियां
गर्मी में राहगीरों को राहत देने वाली इसकी घनी छांव वर्षों से लोगों का सहारा रही है। बरसात में भी लोग इसके नीचे शरण लेते हैं। बच्चे इसके फल तोड़ते हैं, बुजुर्ग इसकी छाल और पत्तियों का औषधीय उपयोग करते हैं। सुबह मॉर्निंग वॉकर, दोपहर में राहगीर और शाम को युवाओं की चौपाल यहां सजती है।
यादों का सजीव गवाह
अल्लपट्टी निवासी 60 वर्षीय रामबालक यादव बताते हैं कि बचपन में वह अपने पिता के साथ यहां इमली चुनने आते थे। बाद में दोस्तों की महफिलें भी इसी पेड़ के नीचे जमीं। आज उसी पेड़ के सामने दुकान चलाकर जीवनयापन कर रहे हैं। उनके लिए यह वृक्ष सिर्फ पेड़ नहीं, जीवन की स्मृतियों का हिस्सा है।
विकास की राह में संकट
शहर में बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर से विकास के नए द्वार खुलेंगे, लेकिन इसके निर्माण क्षेत्र में यह ऐतिहासिक इमली का पेड़ भी आ गया है। पेड़ के समीप पिलर निर्माण के लिए खुदाई शुरू हो चुकी है, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
क्या कोई और रास्ता नहीं?
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता कहते हैं कि बढ़ती आबादी के बीच पुराने वृक्ष लगातार कम हो रहे हैं। एलिवेटेड कॉरिडोर जरूरी है, लेकिन इसके लिए सैकड़ों वर्षों पुराने वृक्षों की बलि देना उचित नहीं होगा। यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो निर्माण के साथ इस पेड़ को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
बचानी होगी विरासत की छांव
यह इमली का पेड़ विकास का विरोध नहीं कर रहा, अपने अस्तित्व की गुहार लगा रहा है। सवाल यह है कि क्या दरभंगा अपनी इस प्राकृतिक धरोहर और 175 वर्षों की छांव को बचाने का रास्ता खोज पाएगा?
