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बिहार में भाजपा-राजद के वोट बैंक में सेंध, जनसुराज और निर्दलीय बने नई पसंद

Published: Fri, 30 Oct 2026 06:30 PM (IST)

मिथिला और कोसी क्षेत्र में भाजपा और राजद को अपने पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने की चुनौती मिल रही ...और पढ़ें

दरभंगा में मतगणना स्थल के बाहर जुटे कार्यकार्ता। जागरण

दरभंगा में मतगणना स्थल के बाहर जुटे कार्यकार्ता। जागरण

HighLights

  1. भाजपा-राजद के पारंपरिक वोटरों में बदलाव के संकेत।

  2. जनसुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाया।

  3. एनडीए को 31 विधायक होने के बावजूद चुनाव में हार मिली।

मुकेश कुमार श्रीवास्तव, दरभंगा। मिथिला और कोसी क्षेत्र की राजनीति केंद्र, दरभंगा में भाजपा और राजद को अपने पारंपरिक वोटरों को साधने की चुनौती मिल रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी दरभंगा शहर के निवासी हैं, जबकि जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा का यह राजनीति क्षेत्र का मूल केंद्र है।

वहीं राजद के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अली अशरफ फातमी का यह गृह जिला है। ऐसे में जिन मतदाताओं के भरोसे एनडीए और राजद चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं, उनके रुख में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं।

विधानसभा चुनाव से लेकर विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन तक वोटों का बिखराव इस बदलाव को रेखांकित कर रहा है।

वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा नगर क्षेत्र में भाजपा के कुछ कोर वोटरों ने सड़क पर उतरकर जनसुराज का दामन थाम लिया था। इसका असर चुनाव परिणामों में भी दिखा। जिले की 10 विधानसभा सीटों में जनसुराज को सर्वाधिक 10 हजार से अधिक मत दरभंगा नगर क्षेत्र से मिले।

हालांकि, भाजपा अपनी सीट बचाने में सफल रही, लेकिन पारंपरिक वोटरों के बीच उभरती नाराजगी की चर्चा अब विधान परिषद चुनाव में भी तेज हो गई है।

शिक्षक निर्वाचन में भाजपा गठबंधन के जदयू ने अतिपिछड़ा वर्ग से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया। जो 13 उम्मीदवारों के बीच 862 मत लाकर चौथे स्थान पर रहे।

जबकि, राजद के कुमर राउत को मात्र 128 मतों से संतोष करना पड़ा। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर उपविजेता रहे सुरेश प्रसाद राय इस बार जनसुराज के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। यह परिणाम शिक्षक मतदाताओं के बीच राजनीतिक समीकरण में बदलाव का संकेत देता है।

स्नातक निर्वाचन में भाजपा के सर्वेश कुमार को राजद समर्थित उम्मीदवार अनिल कुमार झा कड़ी टक्कर देते हुए अंतिम कड़ी में बाजी अपने नाम कर ली। हालांकि, इस चुनाव में राजद सहित भाजपा के पारंपरिक वोटरों के बीच बिखराव के संकेत मिले हैं।

वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जिन क्षेत्रों में एआइएमआइएम के उम्मीदवार मैदान में थे, वहां उन्हें बेहतर मत मिले थे।

स्नातक निर्वाचन में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले हैं। जनसुराज के मो. इम्तियाज और यादव समाज से आने वाले निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप कुमार ने उम्मीद से अधिक मत हासिल कर चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

मो. इम्तियाज ने 10वें राउंड में 10 ह जार 227 मत प्राप्त किया, जबकि, छात्र नेता के रूप में पहचान रखने वाले दिलीप को छह हजार 80 मत मिले। इन मत से राजद को नुकसान होने की बात कही जा रही है।

उधर, 2020 के चुनाव में निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले सर्वेश कुमार को इस बार भाजपा के पाले में होने से पारंपरिक मतों के मिलने की काफी उम्मीद थी। लेकिन, परिणाम विपरीत रहा। परंपरागत मत अंदर ही अंदर घिसक गया।

ऐसे में इन प्रत्याशियों को मिले मतों ने प्रमुख दलों के चुनावी समीकरण को प्रभावित किया है। ऐसे में भाजपा और राजद के सामने अपने पारंपरिक मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के साथ-साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

37 विधानसभा सीटों में 31 विधायक, फिर भी एनडीए की हार 

विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में दरभंगा प्रमंडल के तीनों जिलों के साथ बेगूसराय जिले भी शामिल है।

इन चारों जिलों की कुल 37 विधानसभा सीटों में एनडीए के 31 विधायक हैं। इसके अलावा छह सांसद भी निर्वाचित हैं। इतनी बड़ी जनप्रतिनिधियों की संख्या और सांगठनिक ताकत के बावजूद एनडीए को शिक्षक एवं स्नातक चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

चुनाव परिणाम ने एनडीए के सांगठनिक ढांचे और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल विधायकों और सांसदों की संख्या चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती। इसके लिए जमीनी स्तर पर लगातार सक्रियता और कार्यकर्ताओं से बेहतर समन्वय भी जरूरी है। चर्चा है कि क्षेत्र में अपेक्षित सक्रियता की कमी और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हार के प्रमुख कारणों में शामिल रही।

37 में 31 विधायक, फिर भी एनडीए नाकाम

विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनाव को लेकर दरभंगा प्रमंडल के तीनों जिलों के साथ बेगूसराय जिला शामिल है। इन चारों जिलों के 37 विधानसभा में एनडीए के 31 विधायक है।

वहीं छह सांसद निर्वाचित हैं। बावजूद, शिक्षक और स्नातक चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि जमीनी स्तर पर काम नहीं करने और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हार का मूल का कारण है।

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