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शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में सजेगी खीर की थाली, जानिए इसका महत्व और समय

Published: Thu, 22 Oct 2026 02:47 PM (IST)

बक्सर में शरद पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्रमा की दूधिया रोशनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी। मान्यता है कि ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में सजेगी खीर की थाली (AI Generated Image)

शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में सजेगी खीर की थाली (AI Generated Image)

जागरण संवाददाता, बक्सर। शरद पूर्णिमा की रात चमकते पूर्ण चंद्रमा की दूधिया रोशनी में खीर रखने की परंपरा एक बार फिर घर-आंगन में निभाई जाएगी। आश्विन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह रहता है।

मान्यता है कि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के साथ लोग खुले आसमान के नीचे खीर रखेंगे और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में विशेष दिव्य गुण होते हैं। कहा जाता है कि चांदनी में रखी खीर अमृत के समान हो जाती है, इसलिए घरों में दूध, चावल और मेवे से बनी खीर तैयार कर रात में खुले आसमान के नीचे रखी जाती है।

सुबह परिवार के लोग इसे प्रसाद मानकर खाते हैं। यह परंपरा परिवार के सदस्यों को साथ बैठकर पर्व की खुशियां साझा करने का अवसर भी देती है।

चरित्रवन के अधिवक्ता प्रणेश शर्मा बताते हैं कि पहले उन्हें इस परंपरा की जानकारी नहीं थी। पत्नी के आने के बाद घर में खीर चांदनी में रखने की परंपरा शुरू हुई, जिसका अब नियमित रूप से पालन किया जाता है।

उनके अनुसार, खीर से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन शरद पूर्णिमा की रात रखी खीर का स्वाद उन्हें सालभर बनने वाली खीर से अलग लगता है।

आयुर्वेदाचार्य वेद प्रकाश के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी को विशेष महत्व दिया जाता है। पारंपरिक मान्यता है कि चांदनी में रखी खीर में औषधीय गुण आते हैं और उसका सेवन लाभकारी होता है।

हालांकि, खीर को चांदनी में रखने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने या उसमें विशेष औषधीय गुण पैदा होने की पुष्टि के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। दूध और चावल की खीर पौष्टिक आहार हो सकती है।

रविवार को शरद पूर्णिमा, सोमवार को स्नान-दान

आचार्य अमरेंद्र कुमार मिश्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि रविवार को दिन में 11:05 बजे शुरू होकर सोमवार सुबह 9:57 बजे तक रहेगी।

इस आधार पर रविवार को शरद पूर्णिमा और सोमवार को स्नान-दान की पूर्णिमा होगी। श्रद्धालु रात में चंद्रमा की पूजा कर खीर चांदनी में रखेंगे और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।

डॉ. एडी उपाध्याय कहते हैं कि धार्मिक आस्था हो या परिवार के साथ शरद ऋतु की सुहानी रात बिताने का अवसर, शरद पूर्णिमा की खीर का आकर्षण आज भी बरकरार है।

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