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'केवल GDP नहीं; GEP भी विकास का पैमाना', नेपाल से बक्सर पहुंची पद्मभूषण अनिल जोशी की साइकल यात्रा 

Published: Wed, 21 Oct 2026 02:52 PM (IST)

राष्ट्रीय साइकिल यात्रा बक्सर पहुंची, जो आर्थिक प्रगति के साथ प्रकृति के स्वास्थ्य को भी विकास का पैमाना बनाने पर जोर दे रही है।

अनिल प्रकाश जोशी की साइकल यात्रा। फोटो जागरण

अनिल प्रकाश जोशी की साइकल यात्रा। फोटो जागरण

HighLights

  1. पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी के नेतृत्व में राष्ट्रीय साइकिल यात्रा बक्सर पहुंची।

  2. यात्रा सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP) को विकास का पैमाना बनाने पर जोर।

  3. जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की जिम्मेदारी मुख्य संदेश।

जागरण संवाददाता, बक्सर। आर्थिक तरक्की का आकलन केवल उत्पादन और आय के आंकड़ों से नहीं, बल्कि प्रकृति की सेहत से भी होना चाहिए।

विकास की इसी वैकल्पिक सोच को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में निकली राष्ट्रीय साइकिल यात्रा मंगलवार को बक्सर पहुंची।

नेपाल के जनकपुर से गांधी जयंती पर शुरू हुए इस अभियान में जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को प्रमुखता दी जा रही है।

यात्रा के समन्वयक और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय पत्रकार पंकज मालवीय ने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) को भी विकास का पैमाना बनाने की जरूरत है।

जीडीपी आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन की स्थिति बताता है, जबकि जीईपी जंगल, नदियों, मिट्टी, जलस्रोतों और जैव विविधता से मिलने वाले लाभों का आकलन करने की अवधारणा है।

उनका कहना था कि आर्थिक उपलब्धियां बढ़ने के बावजूद यदि प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण जारी रहे, तो विकास को संपूर्ण नहीं माना जा सकता।

प्रकृति को पूजने की परंपरा से सीखने की जरूरत

डॉ. जोशी ने कहा कि सभी धर्मों में प्रकृति को प्रभु के रूप में स्वीकार किया गया है। ऐसे में अपनी पुरातन परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को फिर से व्यवहार में उतारना होगा।

अभियान का संदेश है कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जवाबदेही है।

जनकपुर से देहरादून तक सफर

‘जल, जीवन, जन-जागरण’ के संदेश के साथ निकली यह यात्रा देवघर, पटना, लखनऊ और दिल्ली होते हुए देहरादून तक जाएगी।

लगभग तीन हजार किलोमीटर की प्रस्तावित दूरी वाली इस यात्रा में जलस्रोतों के पुनर्जीवन, नदियों के संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।

बिहार में बाढ़, जलजमाव और जलस्रोतों के क्षरण जैसी चुनौतियों के बीच जीईपी की अवधारणा को स्थानीय विकास योजनाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण बताया गया। बुधवार को यात्रा बक्सर से उत्तर प्रदेश के बलिया के लिए रवाना होगी।

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