बिहार के इस जिले के पुरुषों में तेजी से बढ़ा ब्लड शुगर का खतरा, महिलाओं के आंकड़ों में आई गिरावट
बक्सर जिले में पुरुषों में ब्लड शुगर का खतरा बढ़ा है, जहां एनएफएचएस-6 के अनुसार 15% पुरुषों का शुगर स्तर ...और पढ़ें

बक्सर जिले में पुरुषों में बढ़ा मधुमेह का खतरा, 15% का ब्लड शुगर 140 से ऊपर (AI Generated Image)
HighLights
बक्सर में पुरुषों का ब्लड शुगर स्तर बढ़ा।
एनएफएचएस-6 में 15% पुरुषों का शुगर 140 पार।
बदलती जीवनशैली मुख्य कारण, नियमित जांच आवश्यक।
राजेश तिवारी, बक्सर। जिले में पुरुषों के बीच ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा बढ़ा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 15 प्रतिशत पुरुषों का ब्लड शुगर लेवल 140 एमजी/डीएल से अधिक पाया गया या वे इसे नियंत्रित करने के लिए दवा लेते पाए गए।
एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 11.5 प्रतिशत था। इस तरह पांच साल के अंतराल में इसमें 3.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वे के आंकड़ों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ब्लड शुगर का स्तर 160 एमजी/डीएल से अधिक वाले पुरुषों का अनुपात भी बढ़ा है।
इसके विपरीत, महिलाओं में यह आंकड़ा पिछले सर्वे के 12.9 प्रतिशत से घटकर 12.4 प्रतिशत रह गया। इस तरह महिलाओं में 0.5 प्रतिशत अंक की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
एनएफएचएस-6 में ऐसे पुरुषों का प्रतिशत 7.8 दर्ज किया गया, जबकि एनएफएचएस-5 में यह 4.5 प्रतिशत था। यानी इस श्रेणी में 3.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, 141 से 160 एमजी/डीएल के बीच ब्लड शुगर लेवल वाले पुरुषों का आंकड़ा 6.7 प्रतिशत रहा, जो पिछले सर्वे में 6.6 प्रतिशत था। आंकड़े बताते हैं कि जिले में केवल ब्लड शुगर के सामान्य रूप से बढ़े स्तर ही नहीं, बल्कि 160 एमजी/डीएल से अधिक वाले स्तर की श्रेणी में भी वृद्धि हुई है।
बहरहाल, यह स्थिति नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सकीय परामर्श की जरूरत को रेखांकित करती है। हालांकि, सर्वे के ये आंकड़े अपने आप में जिले में मधुमेह के कुल मरीजों की संख्या नहीं बताते।
ब्लड शुगर का एक मापा गया स्तर और चिकित्सकीय जांच के आधार पर मधुमेह का निदान अलग-अलग बातें हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार, संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच से जोखिम को पहचानने में मदद मिल सकती है।
बदलती जीवनशैली को वजह मानते हैं चिकित्सक
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विन्ध्याचल कुमार सिंह कहते हैं, पिछले पांच साल में ब्लड शुगर बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली, शारीरिक श्रम में कमी, खानपान में असंतुलन, मोटापा और तनाव जैसे कई संभावित कारण हो सकते हैं। खासकर युवाओं और कामकाजी पुरुषों में लंबे समय तक बैठकर काम करना, फास्ट फूड का सेवन और नियमित व्यायाम नहीं करना जोखिम बढ़ा सकता है।
हालांकि, एनएफएचएस के आंकड़े इस बढ़ोतरी के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं करते, बल्कि ब्लड शुगर के बढ़े स्तर की स्थिति दर्शाते हैं। इसलिए लोगों को नियमित जांच, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए, ताकि समय रहते जोखिम की पहचान कर उचित उपचार किया जा सके।
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