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सावधान! बिना डायबिटीज के भी किडनी खराब कर सकता है मोटापा, AIIMS दिल्ली की स्टडी में आया सामने

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:36 AM (IST)

मोटापा, खासकर किडनी के आसपास जमा चर्बी, मधुमेह न होने पर भी किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। ...और पढ़ें

किडनी पर असर डालता है मोटापा। फोटो: सांकेतिक

किडनी पर असर डालता है मोटापा। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. मोटापा किडनी के आसपास चर्बी जमा कर कार्यप्रणाली प्रभावित करता है

  2. एम्स शोध ने मोटापे और किडनी स्वास्थ्य के संबंध को उजागर किया

  3. वजन नियंत्रण और नियमित जांच किडनी सुरक्षा के लिए आवश्यक

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। डायबिटीज नहीं है तो भी मोटापे को किडनी के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ने के साथ किडनी के आसपास जमा चर्बी भी बढ़ सकती है और इससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का खतरा रहता है।

शुरुआत में इसका असर सामान्य किडनी जांच में स्पष्ट पता नहीं चलता। ICMR से फंडेड परियोजना से जुड़े एम्स के शोध में मोटापे, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और किडनी के आसपास जमा चर्बी के बीच संबंध सामने आया है।

एम्स के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अमनदीप सिंह के नेतृत्व में हुए शोध में 160 वयस्कों को शामिल किया गया। अध्ययन में मोटापे की अलग-अलग स्थिति वाले लोगों में किडनी के आसपास जमा रेनल साइनस फैट और किडनी से जुड़े बायोमार्कर का आकलन किया गया।

मेटाबॉलिक रूप से अस्वस्थ मोटे लोगों में 77 प्रतिशत में अधिक रेनल साइनस फैट पाया गया, जबकि मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ मोटे लोगों में यह 55 प्रतिशत था।

सिर्फ वजन से नहीं समझ आएगा किडनी पर असर

डाॅ. अमनदीप सिंह के अनुसार, दो लोगों का BMI समान होने के बावजूद उनके शरीर में चर्बी के जमा होने का स्थान अलग हो सकता है। कुछ लोगों में किडनी के आसपास अधिक चर्बी जमा हो सकती है।

इसलिए केवल वजन या BMI देखकर किडनी पर मोटापे के प्रभाव का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। मोटापे के साथ रक्तचाप, रक्त शर्करा और किडनी से जुड़े संकेतों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

शोध में मोटापे की अधिकता के साथ एनजीएएल नामक बायोमार्कर का स्तर बढ़ने के संकेत भी मिले। एनजीएएल किडनी की चोट और सूजन से जुड़ा प्रोटीन है।

इसका बढ़ा स्तर किडनी में शुरुआती बदलाव का संकेत दे सकता है। हालांकि, मोटापे से जुड़े किडनी जोखिम की नियमित जांच के लिए एनजीएएल को अभी स्थापित जांच नहीं माना जाता है।

डायबिटीज के बिना भी किडनी हो सकती है प्रभावित

शोध के अनुसार किडनी में आरंभिक बदलाव केवल डायबिटीज से जुड़े नहीं हैं। मोटापा भी किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाला एक कारक हो सकता है।

आरंभिक चरण में किडनी की रक्त को छानने की क्षमता कुछ समय के लिए बढ़ सकती है। ऐसे में सामान्य किडनी फंक्शन जांच सामान्य दिखाई दे सकती है, जबकि किडनी सामान्य से अधिक काम कर रही हो।

डाॅ. अमनदीप सिंह के अनुसार डायबिटीज नहीं है तो भी बढ़ते वजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वजन नियंत्रित रखना, रक्तचाप और रक्त शर्करा की समय-समय पर जांच कराना तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किडनी की जांच कराना आवश्यक है।

समय पर जांच और सतर्कता से किडनी की कार्यप्रणाली में होने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानने में मदद मिल सकती है।

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