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बिहार के इस किसान ने 1 एकड़ से शुरू की पपीते की खेती, अब 8 एकड़ से कमा रहे 5 लाख तक मुनाफा!

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:56 PM (IST)

बक्सर के किसान विनोद सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़ पपीते की खेती को आय का प्रमुख स्रोत बनाया है। उन्होंने ...और पढ़ें

अरक गांव में पपीते के बगीचे में क‍िसान विनोद स‍िंह। जागरण

अरक गांव में पपीते के बगीचे में क‍िसान विनोद स‍िंह। जागरण

HighLights

  1. बक्सर के किसान विनोद सिंह ने पपीते की खेती अपनाई।

  2. एक एकड़ से शुरू कर आठ एकड़ तक विस्तार किया।

  3. प्रति एकड़ 4-5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे।

अनिल गिरी, चक्की (बक्सर)। परंपरागत खेती में अधिक मेहनत और अपेक्षाकृत कम मुनाफे के बीच बक्सर के एक किसान ने पपीते की खेती को अपनी आय का प्रमुख माध्यम बनाया है।

चक्की प्रखंड के अरक गांव निवासी किसान विनोद सिंह ने वर्ष 2022 में एक एकड़ में पपीते की खेती शुरू की थी। बेहतर परिणाम मिलने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खेती का रकबा बढ़ाया।

अब आठ एकड़ में पपीते की फसल उगा रहे हैं। उनका कहना है कि सही तरीके से खेती और बाजार की उपलब्धता से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

कृषि विभाग की सलाह पर शुरू की खेती

विनोद सिंह ने पारंपरिक फसलों के साथ पपीते की खेती का प्रयोग शुरू किया था। खेती से आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने सबसे पहले कृषि विभाग से संपर्क किया।

विभाग की सलाह और प्रोत्साहन के बाद उन्होंने एक एकड़ में पपीते के पौधे लगाए। कम लागत में बेहतर आमदनी मिलने से उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया। वर्ष 2026 तक उनकी पपीते की खेती आठ एकड़ में फैल चुकी है।

एक एकड़ में डेढ़ लाख तक लागत, चार से पांच लाख मुनाफे का दावा

किसान विनोद सिंह के अनुसार, पपीते की खेती में प्रति एकड़ लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च आता है। वहीं, चार से पांच लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है। इस आमदनी ने उन्हें खेती को नए तरीके से करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

उनका कहना है कि पपीते की फसल तैयार होने के बाद बाजार में बिक्री को लेकर भी अधिक परेशानी नहीं होती। व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचकर फल खरीद लेते हैं।

वहीं से तुड़ाई कर अपने साथ ले जाते हैं। इससे किसानों को उपज बेचने के लिए अलग से बाजार तलाशने की जरूरत कम पड़ती है।

फरवरी-मार्च में पौधारोपण, अक्टूबर तक आने लगते हैं फल

विनोद सिंह के मुताबिक, पपीते की खेती में समय पर पौधारोपण और उचित देखभाल का विशेष महत्व है। फरवरी-मार्च में पौधे लगाने पर अक्टूबर तक फल आने लगते हैं। हालांकि, उत्पादन का समय किस्म, मौसम और फसल प्रबंधन पर भी निर्भर करता है।

पपीते की खेती के लिए खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी है। खेत में पानी जमा होने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है।

इसलिए पौधारोपण से पहले खेत की स्थिति और जल निकासी का ध्यान रखना चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और पौधों की नियमित देखभाल से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

आसपास के किसान भी ले रहे खेती की जानकारी

आठ एकड़ में लगी पपीते की फसल अब आसपास के किसानों का ध्यान आकर्षित कर रही है। दूसरे किसान विनोद सिंह के खेत पर पहुंचकर पौधारोपण, फसल प्रबंधन और खेती के तौर-तरीकों की जानकारी ले रहे हैं।

उनकी खेती स्थानीय किसानों के बीच वैकल्पिक फसल के रूप में पपीते की संभावनाओं को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।

विनोद सिंह का मानना है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ दूसरी लाभकारी फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।

खेती से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा में भी मददगार हो सकती है। उनका अनुभव है कि कृषि विभाग की सलाह, उचित फसल प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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