दीपावली-छठ पर आरा के 'झरुआ' मिठाई की भारी मांग, एक हफ्ते में बिक जाता है 80 क्विंटल; लालू यादव भी रहे मुरीद
शाहपुर की पारंपरिक झरुआ मिठाई की दीपावली और छठ पूजा पर भारी मांग रहती है, एक सप्ताह में 70-80 क्विंटल ...और पढ़ें

आरा के 'झरुआ' मिठाई की भारी मांग
HighLights
दीपावली-छठ पर शाहपुर की झरुआ मिठाई की भारी मांग।
त्योहारों के दौरान एक सप्ताह में 80 क्विंटल तक बिक्री।
लालू यादव जैसे राजनेताओं को भी भाता है यह स्वाद।
दिलीप ओझा, शाहपुर (आरा)। बदलते दौर में मिठाइयों की भले ही कई नई किस्में बाजार में आ गई हों। लेकिन शाहपुर की पारंपरिक झरुआ मिठाई का स्वाद आज भी दीपावली में लोगों के सिर चढ़कर बोलता है।
दीपावली से लेकर छठ पूजा तक इस देसी मिठाई की मांग इतनी होती है कि महज एक सप्ताह के दौरान करीब 70 से 80 क्विंटल तक इसकी खपत पहुंच जाती है।फिलहाल बाजार में इसकी कीमत 120 से 130 रुपये प्रति किलोग्राम है।
दीपावली के दिन भी खरीदारी में तेजी
धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और छठ पर्व को लेकर झरुआ बनाने वाले कारीगरों और कारोबारियों को पूरे साल इंतजार रहता है। त्योहार नजदीक आते ही इसके निर्माण का काम तेज हो जाती है। मांग को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात जुटे रहते हैं।
गोवर्धन पूजा और भैया दूज के अवसर पर ही करीब 30 से 40 क्विंटल झरुआ की बिक्री हो जाती है। वहीं दीपावली के दिन भी खरीदारी में तेजी रहती है। इसकी मांग का सिलसिला छठ पूजा तक जारी रहता है।
देसी गुड़ और चने के बेसन से तैयार होती है खास मिठाई
शाहपुर की झरुआ मिठाई की खासियत इसकी पारंपरिक स्वाद और बनाने का देसी तरीका है। चने के बेसन से तैयार छोटी-छोटी बूंदियों को शुद्ध घी या डालडा में छानने के बाद देसी गुड़ के पाग में मिलाया जाती है। इसी प्रक्रिया से तैयार होती है शाहपुर की प्रसिद्ध झरुआ मिठाई।
गुड़ की प्राकृतिक मिठास और बेसन का स्वाद इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान देता है। यही वजह है कि लोग इसे पूजा-पाठ के लिए भी विशेष रूप से पसंद करते हैं।
तीन सौ वर्षों से कायम है स्वाद की परंपरा, आधा दर्जन परिवारों के हाथों में विरासत
शाहपुर में झरुआ बनाने की परंपरा करीब तीन सौ वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है। स्थानीय कारोबारी अनील साह के अनुसार, वर्तमान में आधा दर्जन परिवार इस पारंपरिक मिठाई के निर्माण से जुड़े हैं।
इनमें अनील गुप्ता, संतोष साह, तुला साह और श्रीभगवान साह के परिवार प्रमुख हैं। ये परिवार सालों भर झरुआ तैयार करते हैं। वहीं इसकी बिक्री करने वाले दुकानदारों की संख्या सैकड़ों में है।
राजनेताओं को भी भाता रहा है शाहपुर के झरुआ का स्वाद
शाहपुर की झरुआ मिठाई का स्वाद केवल आम लोगों तक ही सीमित नहीं रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, शिवानंद तिवारी और प्रोफेसर केके तिवारी जैसे चर्चित राजनेता भी इसके स्वाद के मुरीद रहे हैं।
वहीं लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी के सानिध्य में आयोजित होने वाले महायज्ञ और ज्ञान यज्ञ जैसे धार्मिक आयोजनों में भी झरुआ का प्रसाद वितरित किया जाती है।
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