भोजपुर में बाढ़ से 23 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित, किसानों को भारी नुकसान
भोजपुर जिले में गंगा नदी के उफान से बाढ़ का कहर जारी है, जिससे हजारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई ...और पढ़ें

भोजपुर में बाढ़ से 23 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित, किसानों को भारी नुकसान
HighLights
भोजपुर में 23,702.7 हेक्टेयर कृषि भूमि में फसल क्षति।
शाहपुर की सभी 21 पंचायतें बाढ़ से पूर्णतः प्रभावित।
जलस्तर घटने के बाद होगा वास्तविक क्षति का आकलन।
जागरण संवाददाता, आरा। गंगा नदी के उफान से भोजपुर जिले के कई प्रखंडों में बाढ़ का कहर जारी है। बाढ़ के पानी में डूबने से हजारों हेक्टेयर में लगी फसलें बर्बाद हो गई हैं। विभाग के आधिकारिक प्रतिवेदन के अनुसार, जिले के छह प्रखंडों में कुल 23,702.7 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का अनुमान लगाया गया है।
यह कुल प्रभावित कृषि क्षेत्र का करीब 78 प्रतिशत है। लगातार जलजमाव के कारण खेतों में लगी धान समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों डूब गई हैं। किसानों ने शीघ्र सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।
शाहपुर की सभी पंचायत बाढ़ की चपेट में
जिले की कुल 112 पंचायतों में से 80 पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। कुल 30,559.3 हेक्टेयर प्रभावित भूमि में से 23,702.7 हेक्टेयर कृषि भूमि की फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। आरा सदर प्रखंड के कुल 20 पंचायतों में से 19 पंचायतें प्रभावित हैं।
यहां 7,856 हेक्टेयर कृषि भूमि में से 5,652 हेक्टेयर (72%) फसल को नुकसान पहुंचा है। बड़हरा में 22 में से 21 पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। 5,753 हेक्टेयर क्षेत्र में से 5,048 हेक्टेयर (88%) फसल बर्बाद हो चुकी है।
शाहपुर की सभी 21 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित पाई गई हैं। यहां 6,978.65 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में लगी फसलों को 100 प्रतिशत नुकसान (6,978.65 हेक्टेयर) हुआ है।
उदवंतनगर प्रखंड में कुल 16 पंचायतों में से 7 प्रभावित हैं। 5,567 हेक्टेयर में से 3,435 हेक्टेयर (62 प्रतिशत) फसल क्षति दर्ज की गई है।
बिहिया प्रखंड में 15 पंचायतों में से आठ पंचायतें प्रभावित हुई हैं, जहां 2,942.6 हेक्टेयर में से 1,736 हेक्टेयर (59 प्रतिशत) फसल नुकसान हुआ है। वहीं कोइलवर प्रखंड में 18 में से 4 पंचायतें प्रभावित हैं, जहां 1,462 हेक्टेयर में से 853 हेक्टेयर (58 प्रतिशत ) फसल को नुकसान पहुंचा है।
क्या कहते हैं पदाधिकारी?
वर्तमान में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इस कारण बाढ़ का पानी खेतों से पूरी तरह उतरने के बाद ही वास्तविक फसल क्षति का अंतिम और सटीक आकलन किया जा सकेगा। बाढ़ का पानी उतरने के बाद वास्तविक आकलन किया जाएगा। - डॉ. नीरज कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी।
